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This Article is From Jan 28, 2024

SC ने भारत के जीवंत लोकतंत्र को लगातार मजबूत किया है: सुप्रीम कोर्ट के 75वें स्थापना दिवस पर PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले सप्ताह हमने सर्वोच्च न्यायालय के विस्तार और सुविधाओं में सुधार के लिए 800 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. उम्मीद है कि अब कोई इसे "फिजूलखर्ची" कहकर SC में याचिका दायर नहीं करेगा

SC ने भारत के जीवंत लोकतंत्र को लगातार मजबूत किया है: सुप्रीम कोर्ट के 75वें स्थापना दिवस पर PM मोदी
आज भारत की प्राथमिकता यह है कि न्याय मिलने में आसानी हो: प्रधानमंत्री मोदी
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 75वें स्थापना दिवस पर दिए गए संबोधन में प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा सामाजिक न्याय, मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा अपने जीवंत लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं. ⁠आज देश में बड़े सुधार हो रहे हैं. ⁠आज की नीतियां कल का आधार बनेंगी. ⁠पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है. ⁠भारत के लिए हर स्थिति का लाभ उठाना जरूरी है. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सरकार जीवन में आसानी, संचार में आसानी, यात्रा में आसानी पर ध्यान केंद्रित कर रही है. ⁠सुप्रीम कोर्ट और सरकार संयुक्त रूप से न्याय में आसानी पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. SC ने भारत के जीवंत लोकतंत्र को लगातार मजबूत किया है.

पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि मेरी सरकार अदालतों में बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है. मेरी सरकार वर्तमान सर्वोच्च न्यायालय में वकीलों और वादकारियों की समस्याओं से अवगत है. पिछले सप्ताह हमने सर्वोच्च न्यायालय के विस्तार और सुविधाओं में सुधार के लिए 800 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. उम्मीद है कि अब कोई इसे "फिजूलखर्ची" कहकर SC में याचिका दायर नहीं करेगा. जैसा कि नई संसद के मामले में किया गया था.

पीएम ने आगे कहा कि सरकार पुराने, औपनिवेशिक कानूनों में सुधार की दिशा में भी काम कर रही है. ⁠उदाहरण के लिए आपराधिक कानून में बदलाव, इन परिवर्तनों के कारण, हमारी कानूनी पुलिसिंग और जांच प्रणाली एक नए चरण में प्रवेश कर गई है. सरकार न्यायपालिका पर बोझ कम करने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा दे रही है. ⁠सुप्रीम कोर्ट के अगले 25 साल, 2047 तक भारत के परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

पीएम ने कहा दो दिन पहले भारत के संविधान ने अपने 75 वर्ष में प्रवेश किया है और आज सुप्रीम कोर्ट के भी 75वें वर्ष में प्रवेश किया है. इस अवसर पर आना सुखद है, मैं शुभकामनाएं देता हूं. बदलती परिस्थितियों मे पूरी दुनिया की नजर भारत पर है और भारत पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है. इसलिए हम किसी अवसर को जाने न दें. सरकार भी कानूनों को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है कोलोनियल कानूनों को खत्म करके हमने नए कानून शुरू किया है. हम नए दौर मे प्रवेश किया है, ये बड़ा परिवर्तन है. सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करूंगा कि सभी स्टेक होल्डर्स को एक व्यवस्था बनाने पर काम करे. सभी के प्रयास से ही भारत आगे बढ़ेगा. इस बार जो पद्म अवार्ड दिए गए है उसमे इस बार फातिमा जी को पद्मभूषण अवार्ड दिया गया है. इसके लिए मैं बहुत गौरवान्वित महसूस करता हूं.

गांधी जी की कहीं बात को ध्यान में रखकर फैसले लेते है -चीफ जस्टिस

इस अवसर पर चीफ जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने कहा कि आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण दिन है. 28 जनवरी 1950 को सुप्रीम कोर्ट की शुरुआत हुई. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि जब कभी कोई फैसला लेना हो, तो समाज के हाशिये पर खड़े व्यक्ति का ख्याल कर तय करें कि क्या उस अमुक फैसले से उसे कोई फायदा होने वाला है. SC की स्थापना के बाद से हम गांधी जी की कहीं इस बात को ध्यान में रखकर फैसले लेते रहे है. 

न्यायिक प्रशासनिक क्षेत्र में लिए गए फैसलों से हमने सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि लोगों को इंसाफ मिल सके. SC अब पूर्णत पेपरलेस कोर्ट बनने की ओर बढ़ रहा है.  कागजों के बोझ के बजाए अब एक क्लिक के जरिये आप केस फ़ाइल कर सकते है. कोरोना के बाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई जारी रखी. अभी तक हाइब्रिड सुनवाई के जरिये हम 5 लाख केस का निपटारा कर चुके है. संविधान पीठ की सुनवाई से लाइव स्ट्रीमिंग से लोगों की कोर्ट के काम के तरीके उत्सुकता बढ़ी है. हमारा देश अभी सामाजिक और जनसांख्यिक  बदलाव से गुजर रहा है. ऑपेरशन थियेटर, बॉर्डर, नेवल कमाण्डर, सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं की तादाद बढ़ रही है. डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी में 36 महिलाओं की भागीदारी है. SC में 41% लॉ क्लर्क महिला है . 2024 से पहले  पिछले 74 सालों में सिर्फ 12 महिला वकीलों को सीनियर अडवोट का दर्जा मिला  पर पिछले हफ्ते हमने एक साथ 11 महिला को सीनियर वकील का दर्जा दिया.

चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि लीगल सिस्टम में समाज के हर तबके के प्रतिनिधित्व रहे है. अभी बार और बेंच में SC/ST का प्रतिनिधित्व कम है,  प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की ज़रूरत है. हम बेवजह मामलों की सुनवाई को टालने से बचना चाहिए. इस मसले पर प्रोफेशनल रुख अपनाने की ज़रूरत है.  

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