- मोतीलाल नेहरू कॉलेज के छात्र सना वरश 50 साल पुरानी पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग में रहते थे जो अचानक ढह गई थी.
- सना वरश ने बताया कि पानी न आने के कारण वह दोस्त के घर गए थे जिससे वे हादसे में बच गए थे.
- सना वरश 14 हजार रुपये महीने किराए पर रहते थे जिसमें कॉमन बाथरूम का उपयोग शामिल था और बिजली बिल अलग था.
'अगर पानी आ रहा होता तो मैं भी उसी मलबे में दबा होता...' ये कहना है कि मोतीलाल नेहरू कॉलेज के फर्स्ट ईयर के छात्र सना वरश का. सना वरश सत्य निकेतन की उसी बिल्डिंग में रहा करते थे, जो रविवार दोपहर बाद अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई. करीब 50 साल पुराना इस पांच मंजिल वाले इमारत में पीजी चला करती थी. जिसमें कई छात्र रहते थे. सना वरश भी उसी बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर स्थित दो कमरों का एक सेट शेयर कर रहे थे. सना वरश बिल्डिंग गिरने की घटना से कुछ देर पहले तक अपने कमरे में ही थे. उन्होंने कहा- अगर पानी आ रहा होता तो मैं भी शायद उसी हादसे में दबा होगा.
मोतीलाल नेहरू कॉलेज के स्टूडेंट सना उसी पीजी में रहते थे
सना वरश पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के फलाकटा के रहने वाले हैं. उनकी उम्र महज 18 साल है. वो अभी मोतीलाल नेहरू कॉलेज में ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहे हैं. बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद सना वरश भी अपने दोस्तों की तलाश में जुटे थे. वो पहले घटनास्थल पर गए, फिर वहां से एम्स पहुंचे, जहां इस हादसे के घायल छात्रों को इलाज हो रहा है.
पानी नहीं आ रहा था, दोस्त के यहां फ्रेश होने गया और बिल्डिंग गिरी
एम्स में ही मीडिया ने सना वरश से बात की. जिसमें सना वरश ने बताया कि मैं भी उसी पीजी में रहता था. रविवार दोपहर सोकर उठने पर पता चला कि पानी नहीं आ रहा है. इसलिए वो पास ही रहने वाले एक दोस्त के घर जाकर फ्रेश होने का चले गए. वो अभी अपने दोस्त के कमरे पर ही थे, तभी बिल्डिंग गिर गई.
मजाक में दोस्तों से पूछता था- बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?
उन्होंने बताया कि बिल्डिंग गिरने से 15 मिनट पहले तक वो उसके अंदर ही थे. उन्होंने कहा, "सुबह से ही मुझे बेसमेंट से कुछ आवाजें सुनाई दे रही थीं. उन्होंने एक दोस्त से मजाक-मजाक में यह भी पूछा था कि क्या बिल्डिंग गिर जाएगी? हालांकि उनके दोस्त ने वरश की बात को हंसी में उड़ा दिया था.
कमरों का कुछ महीने पहले हुआ था रेनोवेशन
सना वरश ने कहा कुछ महीनों पहले ही कमरों का रेनोवेशन हुआ था, लेकिन बिल्डिंग पुरानी थी. उन्होंने बताया कि तीसरी मंजिल पर उनके कमरे तक जाने वाली सीढ़ी बिना किसी प्लानिंग के बनी हुई लग रही थी और वह संकरी, जर्जर और सीलन भरी थी. उन्होंने कहा, "मैं अपने दोस्तों से कहता था कि एक दिन मैं इन सीढ़ियों से गिरकर मर जाऊंगा."
14 हजार रुपए किराया, कॉमन बाथरूम यूज
सना वरश ने बताया कि हर मंजिल पर दो फ्लैट थे. वे अपने कमरे के लिए 14,000 रुपये का किराया देते थे. इसमें बिजली का बिल शामिल नहीं था. इसमें उन्हें फ़्लैटमेट्स के साथ एक कॉमन बाथरूम यूज करना होता था. कमरे में दो बेड, दो अलमारी, दो कुर्सियां और दो टेबल रखने की जगह थी.
सारे सामान और डॉक्यूमेंट अब भी मलबे में दबे हैं
सना ने यह भी बताया कि उनका लैपटॉप, हेडफोन, कपड़ों से भरे दो सूटकेस और उनके सभी डॉक्यूमेंट्स अभी मलबे के नीचे दबे है. वरश ने कहा कि उनके दो फ़्लैटमेट्स, नीतीश और नीरज अभी भी AIIMS में भर्ती है. सना वरश ने यह भी कहा कि मुझे नहीं पता कि हमें हमारा सिक्योरिटी डिपॉज़िट वापस मिलेगा या नहीं.
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