दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस के पास विजय नगर में एक PG है. जिस इमारत में यह PG है, वह 1990 के दशक में बनी थी और आज जर्जर हो चुकी है. यह इमारत भीड़-भाड़ वाली सड़क पर है, यहां से निकलने का रास्ता संकरा है और बिजली के तार खुले हुए हैं.
यूनिवर्सिटी के पास है, इसलिए छात्र मजबूरन यहां रहते हैं, क्योंकि यूनिवर्सिटी कैंपस में हॉस्टल में पर्याप्त जगह नहीं है. कैंपस से कुछ ही दूरी पर बनी यह इमारत इलाके के कई PG में से एक है. यहां लड़कों के लिए किराया 5,700 रुपये से शुरू होता है.
कैंपस के आसपास की इमारतों पर इसलिए ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि 6 सितंबर को ही सत्य निकेतन में PG वाली इमारत गिर गई थी. इस दुर्घटना में 7 छात्रों की मौत हो गई.
सत्य निकेतन की घटना के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर नगर निगम (MCD) के 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. बिल्डिंग के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है. दिल्ली भर में उन बिल्डिंग्स को तुरंत सील करने का आदेश दिया गया है जिनमें बिना मंजूरी के पांचवीं मंजिल बनी हुई है. आसपास के PG और बिल्डिंग्स की भी बारीकी से जांच की जा रही है.
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200 से ज्यादा PG 'खतरनाक'
दिल्ली के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, '200 से ज्यादा PG खतरनाक श्रेणी में आते हैं या खतरा पैदा करते हैं. इनकी और बाकी PG की दोबारा जांच की जाएगी. जांच चल रही है.'
अधिकारी ने बताया कि सीनियर अधिकारियों की बैठक के बाद कड़े नियमों पर विचार किया जा रहा है.
लेकिन स्टूडेंट्स की कहानी कुछ और ही है. वे पानी की समस्या, बिजली के महंगे बिल और शेयर्ड रूम के लिए 10,000 से 20,000 रुपये तक के किराए की बात करते हैं.
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Photo Credit: PTI
छात्रों ने क्या बताया?
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा ने NDTV से कहा, 'मैं विजय नगर के एक PG में रहती हूं, जहां के हालात सत्य निकेतन जैसे ही हैं. किराया बहुत ज्यादा है और सुविधाएं अच्छी नहीं हैं. किराया 14,000 रुपये है और इसमें बिजली का खर्च शामिल नहीं है. बिजली का खर्च ज्यादा है और किराए भी बढ़ा दिए गए हैं. कल रात हम सोच रहे थे कि जो हुआ, वह हमारे साथ भी हो सकता है... हमारी जान भी कीमती है.'
वहीं, आस्था ने NDTV को बताया कि उनकी सबसे बड़ी चिंता खाने को लेकर है. उन्होंने कहा, 'किराया एक बहुत बड़ी समस्या है. बहुत महंगे PG की हालत भी खराब है. खाने को लेकर मकान-मालिक से मेरी लड़ाई हुई थी. हम रोज एक ही चीज खाते थे. खाने की मात्रा भी सीमित थी. मैं PG के लिए 17,000 रुपये देती हूं. PG की हालत सच में बहुत खराब है. जो लोग 11,000 रुपये वाले PG में रहते हैं, उनकी हालत तो और भी खराब है.'
नीतीश ने आगे कहा, 'मेरा भाई DU में पढ़ता था. मुझे एक घटना याद है जब भूकंप आया था. मैंने छत में दरारें देखी थीं. किराया भी बहुत ज्यादा है और ऊपर से ब्रोकरेज भी देना पड़ता है. सत्य निकेतन का भी यही हाल था. अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया.'
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'सबका मकसद बस पैसा कमाना है'
नाम न बताने की शर्त पर एक ब्रोकर ने कहा कि ब्रोकर खुद अक्सर फ्लोर को (PG) के तौर पर किराए पर दिलाने में मदद करते हैं.
उन्होंने कहा, 'होता यह है कि लोग फ्लोर किराए पर लेते हैं और फिर उन्हें PG के तौर पर चला देते हैं. उन्हें छात्रों या उनके साथ क्या होता है, इसकी कोई परवाह नहीं होती. मकसद सिर्फ पैसा कमाना होता है और इसकी वजह से छात्र परेशान होते हैं.'
आर्ट्स फैकल्टी से मास्टर्स कर रहीं खुशी को अपने उस बुरे अनुभव के बारे में याद है, जब उन्होंने कमरे और खाने के लिए 20,000 रुपये दिए थे.
उन्होंने कहा, 'मैं एक बहुत मशहूर PG में रही थी, जिसका नाम 'स्टैंजा' है. वहां मुझे टाइफाइड हो गया था. साफ पानी एक बड़ी समस्या है. DU को JNU और BHU से प्रेरणा लेनी चाहिए. वहां पूरे कैंपस में हॉस्टल हैं. हॉस्टल का इंफ्रास्ट्रक्चर एक बड़ी कमी है जिसे DU को ठीक करने की जरूरत है.'
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