- सत्य निकेतन हॉस्टल के छात्रों से रेंट एग्रीमेंट में हॉस्टल की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाली शर्तें लिखी हैं
- 'हॉस्टल डेज' के एग्रीमेंट में 3 महीने की सिक्योरिटी और 1 महीने का एडवांस किराया देना जरूरी है
- एग्रीमेंट के मुताबिक, हॉस्टल में किसी भी हादसे या जोखिम के लिए प्रबंधन जिम्मेदार नहीं
दिल्ली के सत्य निकेतन हादसा मामले में एक और नया खुलासा हुआ है. इस बीच सवाल ये भी है कि 7 छात्रों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? क्यों कि रेंट एग्रीमेंट में पीजी चलाने वाले कुछ ऐसी शर्तें लगा देते हैं जिससे वह हादसे के समय किसी भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकें. सत्य निकेतन मामले में भी कुछ ऐसा ही सामने आया है. 'हास्टल डेज' में रहने वाले छात्रों से भी कुछ ऐसा ही एग्रीमेंट कराया गया था.
सत्य निकेतन हॉस्टल का रेंट एग्रीमेंट वायरल
तीन महीने की सिक्योरिटी, एक महीने का एडवांस किराया, अगर कुछ गलत होता है, तो हॉस्टल की कोई जिम्मेदारी नहीं, 'हॉस्टल डेज़' हॉस्टल के छात्रों ने भी कुछ ऐसा ही एग्रीमेंट पर अपने सिग्नेचर किए थे. उस वक्त उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि ये उनकी मौत का एग्रीमेंट बन जाएगा. हादसे के बाद ये रेंट एग्रीमेंट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
'हादसे की जिम्मेदारी हॉस्टल की नहीं'
इस एग्रीमेंट की शर्तों के बीच एक शर्त ये भी लिखी है, " छात्रों के साथ होने वाले किसी भी हादसे या जोखिम के लिए PG मैनेजमेंट जिम्मेदार नहीं है." सवाल ये भी है कि एग्रीमेंट की इस शर्त के बाद छात्रों ने इस पर साइन कैसे कर दिए. इसके पीछे की वजह ये भी हो सकती है कि शायद उन्होंने इसे ठीक से पढ़ा ही न हो. ऐसा कई बार होता है कि रेंट एग्रीमेंट में लोग किराये से ऊपर किसी भी चीज पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं. हो सकता है कि इन बच्चों के साथ ऐसा ही हुआ हो. क्यों कि एग्रीमेंट की ये शर्त पढ़ने के बाद इसे नजरअंदाज करना मुश्किल सा लगता है.

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1 महीने का किराया और 3 महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट एडवांस
हॉस्टल में रहने वाले छात्र कई महीनों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट पहले ही जमा कर देते हैं. इसके बदले में उनको एक ऐसा एग्रीमेंट मिलता है जिसमें उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हॉस्टल की होती ही नहीं है. ये सख्त नियम उन पर रजामंदी के साथ थोप दिए जाते हैं.
'हॉस्टल डेज' के रेंट एग्रीमेंट में लिखा है कि एक महीने का एडवांस किराया और 3 महीने की सिक्योरिटी पहले ही देनी होगी. एग्रीमेंट का समय खत्म होने से पहले सिक्योरिटी डिपॉजिट किसी भी हालत में वापस नहीं किया जाएगा. साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर हॉस्टल के फर्नीचर या फिक्स्चर को कोई भी नुकसान होता है तो इसकी भरपाई उनके डिपॉजिट से की जाएगी.
एग्रीमेंट के मुताबिक, छात्रों को दीवारों पर पोस्टर या स्टिकर चिपकाना भी मना है. ये भी कहा गया कि अगर कोई छात्र तय समय से पहले हॉस्टल छोड़ता है, वजह चाहे जो भी हो तो उसे हॉस्टल फीस या सिक्योरिटी मनी रिफंड नहीं दी जाएगी.
चोट लगने नुकसान होने पर नहीं देंगे मुआवजा
हॉस्टल से जुड़े नियमों और शर्तों के एक अलग दस्तावेज में कहा गया है कि अगर हॉस्टल के नियंत्रण से बाहर की वजहों से किरायेदार को चोट लगती है, जैसे सीलिंग, आग, भूकंप, भारी बारिश या अन्य प्राकृतिक आपदाएं, तो इसके लिए हॉस्टल की किसी भी तरह का मुआवजा देने की जिम्मेदारी नहीं होगी. हॉस्टल मैनेजमेंट के पास यह अधिकार भी है कि वे हालात के मुताबिक, छात्र का कमरा या हॉस्टल की लोकेशन बदल सकते हैं. अनुशासन से जुड़ी समस्याओं की वजह से उसको हॉस्टल से तुरंत निकाल भी सकते हैं, जिसके लिए कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा.

बता दें सत्य निकेतन हादसा मामले में हॉस्टल मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला और उनके बेटे महेश बंसल को गिरफ्तार किया जा चुका है. रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रॉपर्टी के बिजली कनेक्शन हरिराम बंसल और महेश के नाम पर रजिस्टर्ड हैं, जबकि प्रॉपर्टी खुद उर्मिला के नाम पर रजिस्टर्ड है.
सत्य निकेतन में कैसे हुआ हादसा?
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई थी. इस इमारत में 'हॉस्टल डेज'नाम का बॉयज पीजी हॉस्टल चल रहा था. हादसे के समय अंदर यहां रहने वाले स्टूडेंट्स मौजूद थे. इमारत गिरने से वे मलबे में दब ए. इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं कई घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है. जानकारी के मुताबिक, पीजी वाली इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था.
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