विज्ञापन

पराग-चहल के 'वेप' विवाद के बाद DRI का ई-स‍िगरेट पर प्रहार, ₹120Cr के 3 लाख इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट जब्त, कहां से आईं?

Riyan Parag Vape Controversy Effect: क्रिकेटर रियान पराग के IPL मैच के दौरान कथित वेप पीने के विवाद के बाद DRI ने बड़ी कार्रवाई की. डीआरआई ने चीन से तस्करी कर लाए गए ₹120 करोड़ के 3 लाख प्रतिबंधित ई-सिगरेट और वेप जब्त कर बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है. ये प्रतिबंधित आइटम फर्नीचर और मेटल चेयर के नाम पर देश के अलग-अलग राज्य में लाए गए थे.

पराग-चहल के 'वेप' विवाद के बाद DRI का ई-स‍िगरेट पर प्रहार, ₹120Cr के 3 लाख इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट जब्त, कहां से आईं?
DRI Smashes International Vape Syndicate: ₹120 Crore Consignment From China Seized in Multi-State Raid.

DRI Smashes International Vape Syndicate: देश में प्रतिबंधित ई-सिगरेट और वेप की तस्करी के खिलाफ डीआरआई (Directorate of Revenue Intelligence) ने अब तक की बड़ी कार्रवाई की है.  DRI (राजस्व खुफिया निदेशालय) ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में एक बड़े स्मगलिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है. डीआरआई ने अलग-अलग पोर्ट, एयरपोर्ट और आईसीडी पर कार्रवाई करते हुए करीब 3 लाख इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और वेप जब्त किए हैं, जिनकी कीमत करीब 120 करोड़ रुपये आंकी गई है. यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और बेहद सुनियोजित तरीके से प्रतिबंधित निकोटिन उत्पादों को चीन से भारत में पहुंचाया जा रहा था.

फर्नीचर और मेटल चेयर के नाम पर आ रही थीं ई-सिगरेट और वेप 

सूत्रों के मुताबिक, डीआरआई को पहले से इनपुट मिला था कि कुछ आयातित कंटेनरों में गलत घोषणा करके प्रतिबंधित सामान देश में लाया जा रहा है. इसके बाद कई दिनों तक अलग-अलग राज्यों में निगरानी रखी गई. संदिग्ध कंटेनरों, कार्गो शिपमेंट और एयर कार्गो की जांच की गई. जब अधिकारियों ने कंटेनरों को खोला तो अंदर भारी मात्रा में ई-सिगरेट और वेप बरामद हुए. तस्करों ने इन सामानों को छिपाने के लिए बेहद चालाक तरीका अपनाया था. दस्तावेजों में इन उत्पादों को फर्नीचर, मेटल चेयर पार्ट्स और दूसरे सामान्य सामान के तौर पर घोषित किया गया था ताकि कस्टम अधिकारियों को शक न हो.

DRI Smashes International Vape Syndicate: ₹120 Crore Consignment From China Seized in Multi-State Raid.

DRI Smashes International Vape Syndicate: ₹120 Crore Consignment From China Seized in Multi-State Raid.

ई सिगरेट रेस्पिरेटरी हेल्थ के लिए कितनी खतरनाक है? जानिए हेल्थ पर इसके लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स

चीन से आए इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन उत्पाद

डीआरआई की जांच में यह भी सामने आया कि बरामद किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन उत्पाद चीन से मंगाए गए थे. इनमें कई विदेशी ब्रांड के वेप और ई-सिगरेट शामिल हैं. अलग-अलग फ्लेवर, डिजाइन और हाई-निकोटिन क्षमता वाले ये उत्पाद खास तौर पर युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए थे. एजेंसियों को शक है कि इनका बड़ा हिस्सा बड़े शहरों में सप्लाई किया जाना था, जहां वेप का अवैध बाजार तेजी से बढ़ रहा है.

देश के कई राज्यों में फैला नेटवर्क

अधिकारियों के अनुसार, तस्करी का यह नेटवर्क सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ था. महाराष्ट्र और गुजरात के समुद्री रास्तों के साथ-साथ दिल्ली और पश्चिम बंगाल के जरिए भी इनकी सप्लाई चेन संचालित की जा रही थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं, किन कंपनियों और आयातकों का इस्तेमाल किया गया और इन सामानों की फंडिंग कहां से हो रही थी.

सरकार ने कब लगाया था ई-सिगरेट पर प्रतिबंध?

भारत सरकार ने साल 2019 में ई-सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम यानी ENDS पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था. इसके लिए प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट एक्ट 2019 लागू किया गया था. इस कानून के तहत ई-सिगरेट का निर्माण, आयात, निर्यात, बिक्री, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और विज्ञापन पूरी तरह गैरकानूनी है. सरकार का मानना है कि ई-सिगरेट युवाओं को निकोटिन की लत की ओर तेजी से धकेलती है और इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

E-cigarettes Side Effects: क्या है ई सिगरेट और क्या हैं इससे होने वाले नुकसान, यहां जानें

शरीर के लिए कितनी घाटक है वेप और ई-सिगरेट?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वेप और ई-सिगरेट को अक्सर सेफ विकल्प बताकर बेचा जाता है, लेकिन इनमें मौजूद निकोटिन और केमिकल्स शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं. यही वजह है कि भारत समेत कई देशों ने इन पर सख्त नियंत्रण लगाया हुआ है. इसके बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और अवैध सप्लाई नेटवर्क के जरिए इनकी बिक्री जारी है.

अब क्या है डीआरआई का प्लान?

डीआरआई अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है. आने वाले दिनों में इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ और बड़ी कार्रवाई हो सकती है. एजेंसी अब डिजिटल ट्रेल, बैंकिंग लेनदेन, आयात दस्तावेज और सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही है. यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस रैकेट के तार अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोहों से जुड़े हुए हैं. जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से देश में प्रतिबंधित ई-सिगरेट के अवैध कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा. फिलहाल जब्त सामान को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com