ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत विजिलेंस विभाग ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. ओडिशा विजिलेंस ने बुधवार को धर्मगढ़ में आरएंडबी सब-डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और भवानीपटना में आरएंडबी डिवीजन के इंचार्ज एग्जीक्यूटिव इंजीनियर भुवनेश्वर सबर को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है.
शुरुआती जांच और छापेमारी के दौरान जो आंकड़े और संपत्तियां सामने आई हैं, उसने विजिलेंस अधिकारियों के साथ-साथ आम जनता को भी हैरान कर दिया है. यह मामला सरकारी सेवा की आड़ में अधिकारों के बेजा इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर किए गए भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आया है.
छापेमारी में मिली अकूत अचल संपत्ति
विजिलेंस विभाग को लंबे समय से भुवनेश्वर सबर के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध रूप से धन अर्जित करने की शिकायतें मिल रही थीं. इन गोपनीय सूचनाओं को पुख्ता करने के बाद विजिलेंस की विशेष टीमों ने इंजीनियर से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर एक साथ और अचानक छापेमारी शुरू की. इस मैराथन छापेमारी के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी के हाथ जमीन के इतने दस्तावेज़ लगे कि अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं. विजिलेंस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इंजीनियर सबर के पास कुल 97 अलग-अलग प्लॉट्स पाए गए हैं, जो लगभग 83 एकड़ भूमि में फैले हुए हैं. इतनी बड़ी तादाद में जमीन के मालिकाना हक को देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि पद का दुरुपयोग किस कदर किया गया था.

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आलीशान फार्महाउस और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का जाल
बात सिर्फ खाली जमीनों और प्लॉट्स तक ही सीमित नहीं थी. विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी इंजीनियर ने काली कमाई को रियल एस्टेट और विलासिता की चीजों में जमकर निवेश किया था. छापेमारी के दौरान उनके कब्जे से कुल पांच भव्य इमारतें मिली हैं, जिनमें से चार बहुमंजिला इमारतें हैं. इसके अलावा, लगभग 17 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले दो आलीशान फार्महाउस भी मिले हैं, जहां सुख-सुविधाओं के तमाम साधन मौजूद थे. इतना ही नहीं, भुवनेश्वर सबर ने नियमित कमाई का इंतजाम करने के लिए एक बड़ा मार्केट कॉम्प्लेक्स भी बना रखा था, जिसमें आठ केबिन (दुकानें) शामिल हैं. इन संपत्तियों की बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है.
संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज
सर्च ऑपरेशन के दौरान जब विजिलेंस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भुवनेश्वर सबर से इन तमाम चल-अचल संपत्तियों, जमीनों के कागजात और उनकी आय के वैध स्रोतों के बारे में पूछताछ की, तो वह कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. वह यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे कि एक सरकारी अधिकारी के वेतन से इतनी अकूत संपत्ति कैसे खड़ी की जा सकती है. इसके बाद, भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया और बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया.
इस बड़ी छापेमारी और खुलासे के बाद कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में आरोपी इंजीनियर के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन (अमेंडमेंट) एक्ट, 2018 के तहत केस नंबर 07/2026 दर्ज किया गया है. ओडिशा विजिलेंस का कहना है कि यह जांच का सिर्फ शुरुआती चरण है. अभी उनके बैंक खातों, लॉकरों और अन्य बेनामी संपत्तियों की जांच की जानी बाकी है, जिससे इस बात का पता चल सके कि इस भ्रष्टाचार के तार और कहाँ-कहाँ तक जुड़े हुए हैं.
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