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This Article is From Jan 21, 2026

माघ मेला विवाद पर रामभद्राचार्य और पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का बयान आया सामने, जानिए क्या कहा

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान विवाद और धरने पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य तथा पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद के बयान भी सामने आया है.

माघ मेला विवाद पर रामभद्राचार्य और पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का बयान आया सामने, जानिए क्या कहा
  • प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद हो गयी थी
  • जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शास्त्र-विरोधी कार्यों को निषेध और शास्त्रसम्मत आचरण की आवश्यकता बताई है
  • पूरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का बयान भी सामने आया है
नई दिल्ली:

प्रयागराज माघ मेले में इस बार धार्मिक माहौल के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान से रोकने और बाद में उनके धरने पर बैठने की घटना ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. इसी मुद्दे पर पद्म विभूषण तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बड़ा बयान दिया है, जिसने पूरे धार्मिक जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. 

उन्होंने कहा कि शास्त्र के विरुद्ध किए गए किसी भी कार्य का परिणाम सुखद नहीं होता और जो व्यक्ति स्वयं शास्त्र-विरोधी कार्य करेगा, उसे न तो सुख मिलेगा, न शांति और न ही गति. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वह स्वयं पैदल स्नान के लिए जाते हैं, क्योंकि यही शास्त्रसम्मत मार्ग है.

पुरी के के शंकराचार्य ने क्या कहा?

उधर, पूरी के गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है.  उन्होंने कहा कि उनका निर्णय अकाट्य होता है और उनके निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय तक मान्यता देता है. हालांकि, अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर उन्होंने फिलहाल कोई सीधा टिप्पणी करने से इनकार किया, यह कहते हुए कि मामला अभी विधिवत उनके समक्ष नहीं आया है. 

इसके बावजूद उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना "लाडला" कहकर उनके प्रति स्नेह भी प्रदर्शित किया. माघ मेले के त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में भक्तों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद पर प्रतिक्रिया तभी दी जा सकती है जब वह आधिकारिक रूप से उनके संज्ञान में लाया जाए.

हालांकि उनके शब्दों और भाव-भंगिमा में अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति नरमी और अप्रत्यक्ष समर्थन देखा गया. इस पूरे प्रकरण ने धार्मिक परंपराओं, शास्त्रसम्मत आचरण और प्रशासनिक व्यवस्था पर नए प्रश्न खड़े कर दिए हैं. 

महंत हरि गिरि ने अधिकारियों को दी क्लीन चिट

उज्जैन में शंकराचार्य विवाद को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने बड़ा बयान दिया है. प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के प्रवेश विवाद पर उन्होंने अधिकारियों को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी.  हरि गिरि ने कहा कि “गुरु बनाया जाता है, बनता नहीं” और शंकराचार्य को समाज तथा 13 अखाड़ों की परंपरा को समझने की सीख दी. उन्होंने घटना को दुखद बताया और प्रार्थना की कि भविष्य में ऐसी स्थिति न दोहराई जाए. 

क्या था पूरा मामला? 

बताते चलें कि प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दौरान एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया था जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम नोज पर स्नान करने से रोक दिया गया था. इस घटना के बाद उन्होंने वहीं धरने पर बैठकर आपत्ति दर्ज कराई थी और प्रशासनिक व्यवहार को शास्त्र और परंपरा के खिलाफ बताया था.  उनका कहना था कि शंकराचार्यों के लिए निर्धारित मर्यादा और मान-सम्मान का उल्लंघन किया गया. मामला यहीं नहीं रुका यह विवाद उस समय और गहरा गया जब काशी के मणिकर्णिका घाट पर एक स्थापित मूर्ति तोड़े जाने की घटना भी सामने आई, जिस पर कई संतों और धार्मिक संस्थानों ने सवाल उठाए. 
 

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