राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद को 65.65 फीसदी मत हासिल हुए...
नई दिल्ली:
देश के 14वें राष्ट्रपति चुने जाने के बाद सभी का धन्यवाद देते हुए रामनाथ कोविंद ने कहा, 'जिस पद का मान डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी जैसे महान विद्वानों ने बढ़ाया है, उस पद के लिए मेरा चयन मेरी लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी का अहसास करा रहा है. व्यक्तिगत रूप से यह मेरे लिए बहुत ही भावुक क्षण है.'
दिल्ली की बारिश और अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'आज दिल्ली में सुबह से बारिश हो रही है. बारिश का यह मौसम मुझे बचपन के उन दिनों की याद दिलाता है जब मैं अपने पैतृक गांव में रहा करता था. घर कच्चा था, मिट्टी की दीवारे थीं, तेज बारिश के समय फूस की बनी छत पानी रोक नहीं पाती थी. हम सब भाई-बहन कमरे की दीवार के सहारे खड़े होकर इंतजार करते थे कि बारिश कब समाप्त हो.'
क्या कहा नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने अपने पहले संबोधन में, देखें वीडियो-
किसान, मजदूर और गरीब को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'आज देश में ऐसे कितने ही रामनाथ कोविंद होंगे, जो इस समय बारिश में भीग रहे होंगे, कहीं खेती कर रहे होंगे, कहीं मजदूरी कर रहे होंगे. शाम को भोजन मिल जाए इसके लिए पसीना बहा रहे होंगे. आज मुझे उनसे कहना है कि परौंख गांव का रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन में उन्हीं का प्रतिनिधि बनकर जा रहा है.'
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13 साल की उम्र में 13 किमी दूर पढ़ने जाते थे रामनाथ कोविंद
रामनाथ कोविंद ने कहा, 'मुझे यह जिम्मेदारी दिया जाना, देश के ऐसे हर व्यक्ति के लिए संदेश भी है जो ईमानदारी और प्रमाणिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है. इस पद पर चुने जाना न कभी मैंने सोचा था और न कभी मेरा लक्ष्य था... लेकिन अपने समाज के लिए, अपने देश के लिए अथक सेवा भाव आज मुझे यहां तक ले आया है. यही सेवा भाव हमारे देश की परंपरा भी है.'
रामनाथ कोविंद ने कहा, 'राष्ट्रपति के पद पर मेरा चयन भारतीय लोकतंत्र की महानता का प्रतीक है. इस पद रहते हुए संविधान की रक्षा करना और संविधान की मर्यादा को बनाए रखना मेरा कर्तव्य है.'
दिल्ली की बारिश और अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'आज दिल्ली में सुबह से बारिश हो रही है. बारिश का यह मौसम मुझे बचपन के उन दिनों की याद दिलाता है जब मैं अपने पैतृक गांव में रहा करता था. घर कच्चा था, मिट्टी की दीवारे थीं, तेज बारिश के समय फूस की बनी छत पानी रोक नहीं पाती थी. हम सब भाई-बहन कमरे की दीवार के सहारे खड़े होकर इंतजार करते थे कि बारिश कब समाप्त हो.'
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किसान, मजदूर और गरीब को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'आज देश में ऐसे कितने ही रामनाथ कोविंद होंगे, जो इस समय बारिश में भीग रहे होंगे, कहीं खेती कर रहे होंगे, कहीं मजदूरी कर रहे होंगे. शाम को भोजन मिल जाए इसके लिए पसीना बहा रहे होंगे. आज मुझे उनसे कहना है कि परौंख गांव का रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन में उन्हीं का प्रतिनिधि बनकर जा रहा है.'
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रामनाथ कोविंद ने कहा, 'मुझे यह जिम्मेदारी दिया जाना, देश के ऐसे हर व्यक्ति के लिए संदेश भी है जो ईमानदारी और प्रमाणिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है. इस पद पर चुने जाना न कभी मैंने सोचा था और न कभी मेरा लक्ष्य था... लेकिन अपने समाज के लिए, अपने देश के लिए अथक सेवा भाव आज मुझे यहां तक ले आया है. यही सेवा भाव हमारे देश की परंपरा भी है.'
रामनाथ कोविंद ने कहा, 'राष्ट्रपति के पद पर मेरा चयन भारतीय लोकतंत्र की महानता का प्रतीक है. इस पद रहते हुए संविधान की रक्षा करना और संविधान की मर्यादा को बनाए रखना मेरा कर्तव्य है.'
लेखक के बारे में
श्रीराम शर्मा
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