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राम मंदिर में आने वाला चढ़ावा कहां होता है खर्च? NDTV से EXCLUSIVE बातचीत में नृपेंद्र मिश्र ने बताया

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर में आने वाले चढ़ावे और खर्च के बारे में बताया है. उन्होंने कहा कि अब तक मिले कुल फंड में से मंदिर निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था के अलावा सरकार को टैक्स भी चुकाया गया है.

राम मंदिर में आने वाला चढ़ावा कहां होता है खर्च? NDTV से EXCLUSIVE बातचीत में नृपेंद्र मिश्र ने बताया
अयोध्या राम मंदिर में चंदे को लेकर क्या बोले नृपेंद्र मिश्र
NDTV
  • नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि जो चंदा इकट्ठा किया है, उसी से मंदिर का निर्माण और विस्तार किया गया है
  • निर्माण समिति के पास कोई संसाधन नहीं हैं और वे भुगतान की जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं
  • रोजाना लगभग दो हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था चढ़ावे के पैसे से की जाती है

अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी और कथित हेराफेरी मामला तूल पकड़ता दिख रहा है. इस मामले में यूपी पुलिस की SIT जांच कर रही है. इस बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 'मंदिर निर्माण समिति' के अध्यक्ष और पीएम मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र से NDTV ने खास बातचीत की. नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि राम मंदिर में आने वाला चढ़ावा कहां खर्च होता है. उन्होंने बताया कि हर दिन आने वाले चढ़ावे का इस्तेमाल अलग-अलग होता है.

कहां-कहां खर्च होता है चंदे का पैसा?

NDTV से बात करते हुए नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने अब तक जितने पैसे कलेक्ट किए, उसी के जरिए राम मंदिर का निर्माण हुआ है और विस्तार भी हुआ है. SIT जांच को लेकर उन्होंने कहा कि निर्माण समिति से कोई ब्योरा एसआईटी ने नहीं मांगा है. उन्होंने कहा कि कोई भी पेमेंट निर्माण समिति नहीं करती. हमारे पास कोई संसाधन नहीं हैं, सिर्फ 5 लोग हैं. शुरुआत में जो चंदा जुटा था, उसमें 3200 करोड़ रुपये मिले थे. वह एकदम अलग रखा गया है.

'रोजाना 2000 लोग करते हैं भोजन'

उन्होंने कहा कि फाइनेंशल ट्रांजैक्शन ट्रस्ट ही करता है. हर दिन आने वाले चढ़ावे का इस्तेमाल अलग होता है. इससे दिन-प्रतिदिन का खर्च निकलता है. वेतन, आयोजन, मुफ्त भोजन की व्यवस्था इससे होती है. प्रतिदिन करीब 2000 लोग खाना खाते हैं. इसके अलावा पहले जो दान आया था, उसका इस्तेमाल सिर्फ निर्माण में होता है. उसका खर्च मेंटनेंस में नहीं होता है.

आखिर कितने करोड़ रुपये का गबन हुआ? इस सवाल पर नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि आंकड़ा देना बहुत मुश्किल है. इसलिए क्योंकि एक पहलू यह है कि कब से गड़बड़ी हो रही थी. एक बात यह कि आखिर दान मिला कितना था. हमने अनौपचारिक रूप से दो से तीन साल के आंकड़े देखे, जिसमें पता चला कि मासिक चंदा हर महीने 10 से 12 करोड़ रहा है. 

पिछले 11 महीने में 16 करोड़ लोगों ने दर्शन किए. इसके आधार पर ट्रस्ट ने कहा कि 83 करोड़ रुपये आए हैं. इसका अनुपात निकाला जाए तो हर व्यक्ति 5 रुपये दान कर रहा है. इस पर नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि यह तो कम लग रहा है. मैं समझता हूं कि अधिकांश लोगों ने इससे अधिक ही दान किया होगा.

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लेखक के बारे में
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अनुभव शाक्य
Chief sub editor
NDTV इंडिया में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. पिछले करीब 5 वर्षों से मेनस्ट्रीम की पत्रकारिता में सक्रिय हैं. इस दौरान ज़ी न्यूज़, नवभारत टाइम्स और ह... और पढ़ें
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