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महाराष्ट्र से INDIA गठबंधन से राज्यसभा में उद्धव ठाकरे या शरद पवार? एक अनार सौ बीमार

Maharashtra Rajyasabha Seat: शिवसेना उद्धव की तरफ से संजय राउत जो पहले शरद पवार के पक्ष में बोल रहे थे मगर आदित्य ठाकरे ने कहा है कि इस बार राज्यसभा की यह सीट उनकी पार्टी को मिलनी चाहिए. आदित्य ठाकरे का कहना है कि 2020 में शिवसेना ने अपनी एक सीट एनसीपी को दी थी इसलिए इस बार ये सीट उनको मिलनी चाहिए.

महाराष्ट्र से INDIA गठबंधन से राज्यसभा में उद्धव ठाकरे या शरद पवार? एक अनार सौ बीमार
महाराष्ट्र से कौन जाएगा राज्यसभा.
  • राज्यसभा चुनाव के लिए 10 राज्यों की 37 सीटों पर 9 मार्च तक नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित है
  • महाराष्ट्र में 7 सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें से 6 सीटें एनडीए या महायुति जीतेगी.
  • शरद पवार राज्यसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, लेकिन एमवीए के घटक दल उनके समर्थन में स्पष्ट नहीं हैं
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मुंबई:

राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है.10 राज्यों के 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं. इसके अनुसार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 9 मार्च है. अगर वोटिंग की जरूरत हुई तो 16 मार्च को 9 बजे से 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे और वोटों की गिनती भी उसी दिन यानि 16 मार्च को ही 5 बजे शाम से शुरू हो जाएगी. इस बार महाराष्ट्र से 7,तमिलनाडु से 6,पश्चिम बंगाल और बिहार से 5-5,ओडिशा से 4,असम से 3, तेलंगाना, हरियाणा और छत्तीसगढ़ से 2-2 और हिमाचल से 1 सीटों के लिए चुनाव होगा.

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महाराष्ट्र में 7 सीटों पर होना है चुनाव

इन सभी राज्यों में सबसे महत्वपूर्ण और दिलचस्प चुनाव महाराष्ट्र का होने वाला है. वहां पर 7 सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें से 6 सीटें एनडीए या महायुति जीतेगी. महायुति अपने कोटे में से एक सीट रामदास आठवले को भी देगी जो अभी भी केंद्र में मंत्री हैं. एक सीट अजित पवार वाली एनसीपी को मिलेगी, जिस पर अजित पवार के बेटे पार्थ पवार चुन कर आएंगे. आने वाले दिनों में जब सुनेत्रा पवार अपनी राज्यसभा सीट से इस्तीफा देंगी तब उनकी बची हुई 4 साल वाली सीट पर उपचुनाव होगा, तब उसपर कौन उम्मीदवार होगा यह कहना अभी मुश्किल है.

महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी के पास 131, शिवसेना शिंदे के पास 57, और एनसीपी अजित पवार के पास 40 विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए महाराष्ट्र में 37 वोटों की जरूरत होती है. वहीं महाराष्ट्र में विपक्ष यानि एमवीए के पास शिवसेना उद्धव के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी शरद पवार के पास 10 विधायक हैं. ऐसे में एमवीए अपने एक उम्मीदवार को आसानी से जितवा सकता है.

राज्यसभा की एक सीट पर शरद पवार की चर्चा

विपक्ष के उम्मीदवार के रूप में सबसे बड़ा नाम शरद पवार का आ रहा है. हालांकि कुछ दिनों पहले शरद पवार ने कहा था कि वो इसबार राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते और राजनीति से रिटायर होना चाहेंगे. बाद में यह खबर आई कि महाराष्ट्र में दोनों एनसीपी का विलय होगा और इस बारे में शरद पवार और अजित पवार में बातचीत भी हो चुकी थी. 12 फरवरी की तारीख भी तय हो चुकी थी, लेकिन 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में अजित पवार की मौत हो जाती है और दोनों एनसीपी के विलय पर भी रोक लग जाती है. 

उसी वक्त यह भी खबर आती है कि अब शरद पवार राज्यसभा का चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक हैं. दिक्कत यहां पर ये है कि महाराष्ट्र में एमवीए का कोई भी घटक दल खुलकर शरद पवार के पक्ष में नहीं बोल रहा है. सुप्रिया सुले ने इतना जरूर कहा है कि जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे महाराष्ट्र के उद्धव शिवसेना और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं से बात करेंगे और वो खुद दिल्ली में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से बात करेंगी. 

प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा से राज्यसभा भेजना चाहती है शिवसेना

शिवसेना उद्धव की तरफ से संजय राउत जो पहले शरद पवार के पक्ष में बोल रहे थे मगर आदित्य ठाकरे ने कहा है कि इस बार राज्यसभा की यह सीट उनकी पार्टी को मिलनी चाहिए. आदित्य ठाकरे का कहना है कि 2020 में शिवसेना ने अपनी एक सीट एनसीपी को दी थी इसलिए इस बार ये सीट उनको मिलनी चाहिए. आदित्य ठाकरे प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा से राज्यसभा में भेजना चाहते हैं. उनका कहना है कि प्रियंका चतुर्वेदी महाराष्ट्र के जनहित से जुड़ा मुद्दा जोर शोर से उठाती हैं, इसलिए उनको एक और मौका मिलना चाहिए. शिवसेना उद्धव गुट से यह भी संकेत दिए जा रहे हैं कि विधानपरिषद में उद्धव ठाकरे का कार्यकाल खत्म हो रहा है उन्हें खुद राज्यसभा में आना चाहिए. उधर कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने पत्ते नहीं खोल रही है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का कहना है कि एमवीए के सभी घटक दलों को मिलकर तय करना चाहिए कि उम्मीदवार कौन होगा. वैसे तो शरद पवार के नाम पर किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए मगर इस पर शीर्ष नेताओं को आपस में बात करनी होगी.
 

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