- महाराष्ट्र में अप्रैल में 7 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से 6 महायुति और 1 MVA को मिलने की संभावना
- महाविकास आघाड़ी के दो सदस्यों शरद पवार और रजनी पाटिल का कार्यकाल खत्म हो रहा है, पर केवल एक सीट ही मिल सकेगी
- शरद पवार को राज्य सभा में वापसी के लिए कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन आवश्यक है
16 मार्च को होने जा रहे राज्य सभा चुनाव महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी के लिए एक अग्नि परीक्षा साबित होने वाले हैं. अप्रैल महीने में महाराष्ट्र से राज्य सभा की कुल सात सीटें खाली हो रही हैं. विधानसभा में संख्या बल के आधार पर इनमें से छह सीटें महायुति को मिलेंगी, जबकि एक सीट महाविकास आघाड़ी के हिस्से में आएगी. सस्पेंस इस बात को लेकर है कि महाविकास आघाड़ी के कौन-से घटक दल को यह सीट मिलती है.
‘एक अनार, सौ बीमार', पवार बनाम पाटिल, किसे मिले समर्थन
महाविकास आघाडी के लिए राज्यसभा चुनाव में स्थिति ‘एक अनार, सौ बीमार' जैसी है. अप्रैल में महाविकास आघाडी के दो राज्यसभा सदस्यों शरद पवार (एनसीपी-एसपी) और रजनी पाटिल (कांग्रेस) का कार्यकाल खत्म हो रहा है. मौजूदा संख्या बल के मुताबिक इन दोनों में से सिर्फ एक ही सीट अब महाविकास आघाड़ी को मिलेगी. ऐसे में अगर शरद पवार फिर से राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हैं, तो उनके लिए कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन जरूरी हो जाता है, नहीं तो जीत के लिए जरूरी वोट नहीं मिलेंगे. पेंच यह है कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस दोनों की इस सीट पर नजर है. आदित्य ठाकरे ने तो खुलकर इस सीट पर अपनी पार्टी का दावा ठोंक दिया है.
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समर्थन का गणित: एनसीपी (अजित) से संभावनाएं और कांग्रेस की शर्त
शरद पवार की पार्टी के सूत्र बताते हैं कि पवार फिर एक बार राज्यसभा जाने के इच्छुक हैं. अगर उन्हें शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस से समर्थन नहीं मिलता, तो ऐसी स्थिति में उन्हें अजित पवार की एनसीपी से समर्थन की गुंजाइश है. बशर्ते शरद पवार की पार्टी का अजित पवार की एनसीपी में विलय को लेकर बातचीत ठोस तरीके से आगे बढ़े और शरद पवार आगे चलकर एनडीए में शामिल होने को मंजूरी दे दें. कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक पार्टी राज्य सभा सीट पर अपना दावा छोड़ने को तैयार है, बशर्ते शरद पवार की एनसीपी और शिवसेना (यूबीटी) उसे विधान परिषद चुनाव में मदद करें, जो राज्यसभा चुनाव के तुरंत बाद होंगे. शरद पवार और रजनी पाटिल के अलावा फौजिया खान, धैर्यशील पाटिल, भागवत कराड, रामदास आठवले और प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है.
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महायुति का बंटवारा तय: 4 बीजेपी, 1 शिवसेना, 1 एनसीपी
दूसरी तरफ महायुति को मिलने वाली छह सीटों में दलगत बंटवारा साफ है. चार सीटें बीजेपी के खाते में, एक सीट शिवसेना के और एक सीट एनसीपी के. हालांकि, भागवत कराड की जगह किसी नए चेहरे को अवसर मिलने की संभावना अधिक है. विनोद तावड़े और रावसाहेब दानवे के नाम चर्चा में हैं. भाजपा अपनी परंपरा के अनुसार अचानक नए चेहरों को मौका दे सकती है, इसकी संभावना ज्यादा है. एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर से मराठवाड़ा या विदर्भ से किसी चेहरे को मौका दिया जा सकता है. शिंदे की पार्टी में संजय निरुपम और शायना एनसी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं.
संख्याबल मजबूत: 6 उम्मीदवारों की राह आसान
आंकड़ों में भी महायुति की स्थिति मजबूत है. भाजपा के 131, शिंदे सेना के 57 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 40 विधायकों को मिलाकर उनके पास कुल 228 विधायक हैं. अन्य सात विधायकों का समर्थन प्राप्त होने के कारण यह संख्या 235 है. राज्य सभा की एक सीट के लिए 37 मतों का कोटा है. इस आंकड़े के अनुसार, महायुति के छह उम्मीदवार आसानी से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हो जाएंगे. अगर भाजपा ने सातवां उम्मीदवार उतार दिया तो कहानी में ट्विस्ट आ सकता है.
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