- बिहार में पांच राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में सभी सीटों पर NDA की जीत लगभग निश्चित मानी जा रही है
- महागठबंधन AIMIM और BSP के समर्थन के बावजूद आवश्यक 41 विधायकों का समर्थन जुटाने में असफल रहा
- कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक मतदान के समय उपस्थित नहीं हुए, जिससे विपक्षी रणनीति प्रभावित हुई
बिहार में पांच सीटों पर हो रहे राज्यसभा चुनाव में सभी सीटों पर NDA की जीत अब तय मानी जा रही है. AIMIM और BSP के समर्थन के बावजूद महागठबंधन 41 का आंकड़ा नहीं जुटा पाया. कांग्रेस के 3 और राजद के एक विधायक वोट डालने ही नहीं पहुंचे. इसने विपक्षी एकजुटता को धक्का पहुंचाया है. तो आइए जानते हैं वो 4 विधायक कौन हैं जिन्होंने ऐन मौके पर महागठबंधन का खेल बिगाड़ दिया.
सुरेंद्र कुशवाहा
वाल्मीकिनगर क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र कुशवाहा पहली बार विधायक बने हैं. 2015 में वे उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLSP से चुनाव भी लड़ चुके हैं.तब उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार रिंकू सिंह ने चुनाव हराया था. बाद में रिंकू जदयू में शामिल हो गए और सुरेंद्र कुशवाहा कांग्रेस में. 2020 के चुनाव में सुरेंद्र कुशवाहा ने जदयू उम्मीदवार को 1675 वोट से हराया. हालांकि वे पहले से ही एनडीए कैंप में आने की कोशिश कर रहे थे. राज्यसभा चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने उनसे मुलाकात की थी. सुरेंद्र कुशवाहा बिहार विधानसभा की याचिका समिति के सदस्य भी हैं.
मनोज विश्वास
फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास पहली बार सदन पहुंचे हैं. वे महज 221 वोट से चुनाव जीते थे. कांग्रेस में आने से पहले वे राजद और जदयू में भी रह चुके हैं. 2019 में जदयू के प्रखंड अध्यक्ष थे.बाद में राजद में शामिल हुए.इस बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा. वे पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के करीबी माने जाते थे.
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मनोहर प्रसाद सिंह
मनोहर प्रसाद सिंह चौथी बार विधायक बने हैं.अनुसूचित जनजाति से आने वाले मनोहर प्रसाद पहली बार जदयू से विधायक बने थे. 2015 में जब महागठबंधन बना और मनिहारी की सीट कांग्रेस के कोटे में गई तो नीतीश कुमार के कहने पर वे कांग्रेस में शामिल हुए और उम्मीदवार बने. तब से वे लगातार कांग्रेस के विधायक हैं.कांग्रेस में रहते हुए भी वे जदयू नेताओं के करीब थे.
फैसल रहमान
फैसल रहमान पूर्व सांसद मोतीउर रहमान के बेटे हैं. मोतीउर रहमान राजद से राज्यसभा सांसद रहे, कांग्रेस से विधायक भी रहे. फैसल पहली बार विधायक बने हैं.ढाका से भाजपा के पवन जायसवाल को 178 वोट से हरा कर जीते. पवन जायसवाल ने उनके निर्वाचन को चुनौती दी है. जदयू की एक सांसद के वे करीबी बताए जाते हैं.
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