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बेमौसम बारिश से किसानों की फसल तबाह, खेतों में खड़ी मेहनत पर फिरा पानी, मुआवजे की आस में किसान

बिन मौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. गेहूं, चना, आम और लीची की फसलें प्रभावित हुई हैं, जिसके बाद किसानों ने मुआवजे की मांग की है.

बेमौसम बारिश से किसानों की फसल तबाह, खेतों में खड़ी मेहनत पर फिरा पानी, मुआवजे की आस में किसान
किसानों की फसल पर मौसम की मार
  • देश के कई राज्यों में बिन मौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है
  • मध्य प्रदेश के 42 जिलों में बारिश और 13 जिलों में ओलावृष्टि से रबी की फसलें खासकर गेहूं और चना प्रभावित हुए
  • मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों तक बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी करते हुए सतर्क रहने को कहा है

कभी आसमान से बरसती राहत, तो कभी वही बारिश किसानों के लिए आफत बन जाती है. इस बार भी मौसम कुछ ऐसा ही बेरहम हुआ कि देश के किसान संकट में आ गए. देश के कई राज्यों में बिन मौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों की साल‑भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है. कहीं गेहूं खेतों में बिछ गया, तो कहीं आम‑लीची की फसल को सीजन से पहले ही भारी-भरकम नुकसान पहुंचा है. हालात ऐसे हैं कि किसानों की आंखों से आंसू बरस रहे हैं और हर तरफ से एक ही सवाल है कि आखिर मौसम इतना बेरहम क्यों हुआ कि किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया.

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मार

मध्य प्रदेश के 42 जिलों में बारिश हुई है, जबकि 13 जिलों में ओलावृष्टि दर्ज की गई है. शिवपुरी, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, झाबुआ, खंडवा, आगर‑मालवा, विदिशा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, दमोह, सिवनी और छतरपुर जैसे इलाकों में ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. बारिश, ओले और तेज हवाओं की वजह से करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो गई है. इस समय अधिकांश खेतों में रबी की फसलें पककर तैयार थीं और किसान कटाई में लगे हुए थे, लेकिन 19 और 20 मार्च को मौसम के अचानक बदलने से हालात बिगड़ गए.

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मौसम विभाग की चेतावनी, चिंता और बढ़ी

भोपाल से आई जानकारी के मुताबिक, राज्य में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के सक्रिय होने से प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में मौसम ने पलटी मार दी. भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई, जबकि करीब 10 स्थानों पर आंधी के साथ ओले गिरे. मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों तक इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना जताई है और 30 से ज्यादा जिलों में फिर आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है. इसका मतलब अभी किसानों का संकट पूरी तरह टला नहीं है.

गेहूं‑चना सबसे ज्यादा प्रभावित

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम बदलाव से रबी की फसल, खासकर गेहूं और चना, को बड़ा नुकसान हुआ है. कई इलाकों में ओलों और तेज हवाओं से फसलें खेतों में बिछ गई हैं. कुछ जगहों पर तो स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब कई जगहों पर कटी हुई फसलें खुले खेतों में भीग गईं, जिससे उनके खराब होने का खतरा बढ़ गया है.

बिहार और जम्मू में भी बिगड़े हालात

बिहार के मुजफ्फरपुर जो लीची के लिए प्रसिद्ध है वहां भी अचानक मौसम बदला. जिले के अलग‑अलग इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई और तेज हवाएं चलीं. इससे आम और लीची की फसल को नुकसान पहुंचा है. वहीं जम्मू के सांबा इलाके में बारिश के कारण किसानों की गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. किसानों ने खराब फसल के लिए मुआवजे की मांग की है.

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उत्तर प्रदेश में नुकसान के आकलन के निर्देश

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी यूपी में बारिश से फसलों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और अन्य अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में रहकर किसानों से संवाद करने और फसल क्षति की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि राहत आयुक्त समन्वय कर समय पर मुआवजा वितरण को सुनिश्चित करें. मौसम विभाग के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर समेत कई जिलों में आंधी‑तूफान और बारिश की संभावना बनी हुई है.

किसानों की मांग: जल्द मिले मुआवजा

मौसम की इस बेरुखी के आगे लगातार हो रहे नुकसान से किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेतों में खड़ी और कटी दोनों तरह की फसलों को नुकसान पहुंचा है. देशभर के तमाम किसानों का कहना है कि अगर जल्द सरकारी मदद और मुआवजा नहीं मिला, तो उनकी आर्थिक हालत और बिगड़ सकती है.

मराठवाड़ा में बेमौसम बारिश का कहर: 533 गांवों के 20 हजार से ज्यादा किसान प्रभावित

मराठवाड़ा में पिछले चार दिनों से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है. विभागीय आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस आपदा में नांदेड़ और हिंगोली में बिजली गिरने से एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है. 16 मार्च से 20 मार्च के बीच हुई इस बारिश ने मराठवाड़ा के 533 गांवों को अपनी चपेट में लिया है, जिससे 20,896 किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बागायती, जिरायती और फलों के बागों सहित कुल 11,572 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों का भारी नुकसान हुआ है. हालांकि यह शुरुआती आंकड़ा है, प्रशासन द्वारा पंचनामा पूरा होने के बाद नुकसान की यह संख्या और भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

छत्रपति संभाजीनगर

  • बाधित गांवों की संख्या: 387
  • प्रभावित किसान: 15,302
  • कुल बाधित खेती: 8,455 हेक्टेयर

जालना

  • बाधित गांवों की संख्या: 34
  • प्रभावित किसान: 2,566
  • कुल बाधित खेती: 1,364 हेक्टेयर

नांदेड़

  • प्रभावित किसान: 56
  • कुल बाधित खेती: 34 हेक्टेयर
  • मृतक संख्या: 01

धाराशिव

  • बाधित गांवों की संख्या: 81
  • प्रभावित किसान: 2,616
  • कुल बाधित खेती: 1,509 हेक्टेयर

बीड

  • बाधित गांवों की संख्या: 16
  • प्रभावित किसान: 262
  • कुल बाधित खेती: 156 हेक्टेयर

लातूर

  • बाधित गांवों की संख्या: 05
  • प्रभावित किसान: 94
  • कुल बाधित खेती: 52 हेक्टेयर

हिंगोली

मृतक संख्या: 01

(IANS और भाषा इनपुट्स के साथ)

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