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राहुल गांधी ने दी PM मोदी को दी ओपन डिबेट की चुनौती तो निर्मला सीतारमण ने पूछा- संसद में क्यों भागते हो?

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है. इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि संसद चर्चा का सबसे उपयुक्त मंच है और विपक्ष को पहले वहां जवाब सुनने की परंपरा निभानी चाहिए.

राहुल गांधी ने दी PM मोदी को दी ओपन डिबेट की चुनौती तो निर्मला सीतारमण ने पूछा- संसद में क्यों भागते हो?
राहुल गांधी के ओपन डिबेट चैलेंज पर बीजेपी का पलटवार
NDTV
  • राहुल गांधी ने मोदी को दी ओपन डिबेट की चुनौती, बीजेपी ने दिया करारा जवाब
  • 'डरिए मत, बहस कीजिए', राहुल के चैलेंज पर निर्मला सीतारमण का पलटवार
  • 'मॉक संसद या संसद का उपहास?' निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस को घेरा
नई दिल्ली:

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती देने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री को किसी भी मंच पर सार्वजनिक बहस के लिए आमंत्रित करते हुए कई मुद्दों पर सवाल उठाए. इसके जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चर्चा के लिए संसद पहले से मौजूद मंच है, जहां राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं. उन्होंने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और जवाब सुनने से बचने का भी आरोप लगाया.

राहुल गांधी ने दी थी खुली बहस की चुनौती

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी बहस की चुनौती दी. उन्होंने कहा कि 24 घंटे बीत चुके हैं और वह अभी भी अपने प्रस्ताव पर कायम हैं.  राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा अक्सर विपक्ष पर देशद्रोह जैसे आरोप लगाते हैं. ऐसे में सार्वजनिक मंच पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर देशद्रोही कौन है, किसका विदेशी ताकतों से संबंध है और किस प्रकार का संबंध है.

राहुल गांधी ने युवाओं से पूछा सवाल

राहुल गांधी ने युवाओं से पूछा सवाल
Photo Credit: NDTV राहुल गांधी की पोस्ट

उन्होंने कहा कि मंच, स्थान और निर्णायक कोई भी तय कर सकता है. राहुल गांधी ने यहां तक कहा कि यदि भाजपा चाहे तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को भी निर्णायक बनाया जा सकता है.

किन मुद्दों पर बहस चाहते हैं राहुल?

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि बहस के दौरान वित्तीय व्यवस्था, आर्थिक ढांचे, अमेरिका से हुए समझौतों, उनकी प्रक्रिया, कैबिनेट को जानकारी दिए जाने या न दिए जाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. उन्होंने अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री से "डरिए मत" कहते हुए बहस में आने का आग्रह किया और दिवाली की शुभकामनाएं भी दीं.

युवाओं से भी पूछा सवाल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन पोल भी साझा किया, जिसमें उन्होंने देश के युवाओं से पूछा कि क्या वे राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बीच खुली बहस देखना चाहते हैं. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री को बहस के लिए राजी करें.

बीजेपी का जवाब

बीजेपी का जवाब
Photo Credit: NDTV निर्मला सीतारमण की पोस्ट

निर्मला सीतारमण का जवाब

राहुल गांधी की चुनौती पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री से चर्चा के लिए मंच चुनने की बात कर रहे हैं, जबकि चर्चा का मंच पहले से मौजूद है और वह संसद है. उन्होंने याद दिलाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एसआईआर (SIR) और ईवीएम (EVM) जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र का प्रस्ताव भी दिया था. सीतारमण ने सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर बहस की चुनौती देने वाला विपक्ष संसद में उसी उत्साह के साथ चर्चा के लिए आगे क्यों नहीं आता.

वॉकआउट और बाधा का आरोप

वित्त मंत्री ने कहा कि जवाब मांगने के साथ-साथ जवाब सुनने की जिम्मेदारी भी होती है. उनका आरोप था कि कई मौकों पर कांग्रेस और विपक्षी दल सरकार का जवाब सुने बिना सदन से बाहर चले गए. उन्होंने कहा कि केवल वॉकआउट ही नहीं, बल्कि विपक्ष ने कई बार संसद की कार्यवाही भी बाधित की, जिससे पूरे-के-पूरे सत्र प्रभावित हुए. निर्मला सीतारमण ने पूछा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में चर्चा चाहते हैं तो वह संसद को सुचारू रूप से चलने क्यों नहीं देते.

‘मॉक संसद' पर भी निशाना

वित्त मंत्री ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर आयोजित "मॉक संसद" को लेकर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वह मॉक संसद से ज्यादा "संसद का उपहास" था. उनका कहना था कि यदि ऐसे आयोजन के लिए समय और उत्साह है, तो वास्तविक संसद को भी उतना ही सम्मान दिया जाना चाहिए.

सबूत पेश करने की सलाह

निर्मला सीतारमण ने कहा कि केवल आरोपों की लंबी सूची गिना देने से कोई पक्ष मजबूत नहीं हो जाता. उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि यदि उनके पास कोई विशिष्ट आरोप हैं, तो उनके समर्थन में प्रमाण भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए राहुल गांधी से अधिक गंभीरता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है.

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