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हार का 'शतक' लगाने के करीब राहुल गांधी! 20 साल में कांग्रेस ने झेली 99 चुनावी हार

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का यह पूरा चुनावी इतिहास साफ-साफ बताता है कि कांग्रेस एक बहुत ही गहरे आत्ममंथन वाले दौर से गुजर रही है, जहां उसे खुद के फैसलों पर बहुत गंभीरता से सोचने की जरूरत है.

हार का 'शतक' लगाने के करीब राहुल गांधी! 20 साल में कांग्रेस ने झेली 99 चुनावी हार
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार चुनाव हारती आ रही है. (फाइल फोटो)
IANS

Delhi News: कांग्रेस की राजनीति में राहुल गांधी का सफर काफी लंबा रहा है, लेकिन यह सफर ज्यादातर चुनावी हारों से घिरा रहा है. अब तक वे देशभर में 99 चुनाव हार चुके हैं, और हार का 'शतक' बनाने से बस एक कदम दूर हैं. अगर राज्यों और सालों के हिसाब से उनके चुनावी नतीजों को देखें, तो तस्वीर काफी चिंताजनक नजर आती है. बार-बार मिल रही यह नाकामयाबी न केवल राहुल गांधी के करियर पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस के लिए आगे की राह कितनी मुश्किल भरी है.

इस सदी के शुरुआती सालों में हार की शुरुआत

हार के इस सफर की शुरुआत इस सदी के शुरुआती सालों में ही हो गई थी. साल 2004 में पार्टी को कर्नाटक, ओडिशा और सिक्किम में हार का सामना करना पड़ा. इसके ठीक अगले साल यानी 2005 में बिहार और झारखंड में पार्टी को झटके लगे. जैसे-जैसे यह दशक आगे बढ़ा, साल 2006 में केरल और पश्चिम बंगाल में पार्टी चुनाव हार गई. साल 2007 कांग्रेस के लिए बहुत भारी रहा, जब वह गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में जीत हासिल करने में फेल रही. इसके बाद 2008 में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में उसे हार मिली. इस दशक का अंत 2009 में झारखंड, ओडिशा और सिक्किम में मिली हार के साथ हुआ.

अगले दस सालों में भी नहीं बदली किस्मत

अगले दस सालों में भी कांग्रेस की किस्मत को कोई राहत नहीं मिली. साल 2010 में कांग्रेस को बिहार में हार का सामना करना पड़ा. साल 2011 में पार्टी पुडुचेरी और तमिलनाडु में चुनाव हार गई. इसके बाद 2012 में गोवा, गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पार्टी को कई जगह हार का सामना करना पड़ा. मुश्किलें 2013 में भी जारी रहीं, जब दिल्ली, मध्य प्रदेश, नागालैंड, राजस्थान, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में पार्टी को हार झेलनी पड़ी.

2014 का वो टर्निंग पॉइंट...

साल 2014 का आम चुनाव कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इस साल पार्टी ने लोकसभा चुनाव तो हारा ही, साथ ही राज्य स्तर पर आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, सिक्किम और तेलंगाना में भी उसे करारी हार मिली. इस दशक का आधा हिस्सा बीतने के बाद भी मुश्किलें वैसी ही रहीं. साल 2015 में पार्टी दिल्ली में हार गई. 2016 में असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में उसे हार का मुंह देखना पड़ा. साल 2017 में गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा. 2018 के चुनावों में कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में पार्टी को झटके लगे. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में फिर से पूरे देश में हार मिली, और इसी के साथ आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा और सिक्किम में भी हार का सामना करना पड़ा.

आज के समय में भी नहीं बदले हालात

मौजूदा दशक में आने के बाद भी यह हार का सिलसिला नहीं थमा. साल 2020 में बिहार और दिल्ली में हार दर्ज की गई. 2021 के चुनावी कैलेंडर में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल रहे जहां पार्टी चुनाव हार गई. 2022 में पार्टी गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में फेल हो गई. 2023 तक, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, राजस्थान, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ में मिली हार के साथ यह आंकड़ा और भी बड़ा हो गया. अभी सबसे ताजा 2024 के आम चुनावों में पार्टी को एक और लोकसभा हार का सामना करना पड़ा, जबकि इसी साल आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा और सिक्किम में भी उसे झटके लगे. अगर एकदम आगे की बात करें तो, 2025 और 2026 के लिए शुरुआती नतीजे यह बताते हैं कि बिहार, दिल्ली, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का संघर्ष अभी भी लगातार जारी है.

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