- कांग्रेस छात्र संगठन NSUI के पदाधिकारियों को नेता नेहा बोरा को मंच पर अहमियत मिलने से नाराजगी हुई थी
- नाराज NSUI कार्यकर्ताओं ने संगठन के आधिकारिक व्हॉट्सएप ग्रुप का नाम तीन दिन तक “WE THE छोटू” रखकर असंतोष जताया
- राहुल गांधी से मुलाकात के बाद NSUI की नाराजगी दूर हुई और व्हॉट्सएप ग्रुप का नाम वापस पहले जैसा बदल दिया गया
कांग्रेस के मंचों पर वामपंथी छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को मिलती अहमियत से कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के पदाधिकारियों की नाराजगी सामने आई है. नाराज़ कार्यकर्ताओं ने संगठन के एक आधिकारिक व्हॉट्सएप ग्रुप का नाम तीन दिनों तक बदल कर “WE THE छोटू” रख दिया. राहुल गांधी से मुलाकात के बाद NSUI के पदाधिकारियों की नाराज़गी दूर हुई और ग्रुप का नाम बदला गया.
इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल हुईं थी नेहा बोरा
दरअसल 12 अक्टूबर को जब इंडिया गठबंधन के नेता सुप्रीम कोर्ट तक मार्च कर रहे थे. उस दौरान नेहा बोरा ने पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पैदल मार्च किया और फिर वो गठबंधन के शीर्ष नेताओं वाली ट्रक पर भी नज़र आईं. नेहा बोरा को मिली ये अहमियत कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के नेताओं को रास नहीं आई. उन्हें इस बात का मलाल था कि पार्टी के प्रदर्शन के लिए वो मिहनत कर रहे हैं और मंच दूसरे संगठन के नेता को दिया जा रहा है. विभिन्न विश्विद्यालयों के छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई और आईसा एक दूसरे के प्रतिद्वंदी होते हैं.
राहुल गांधी से पहले भी मिल चुकी हैं नेहा
बीते कुछ समय में युवा नेता के तौर पर उभरी नेहा नीट पेपर लीक के ख़िलाफ़ जंतर मंतर पर चले आंदोलन के दौरान लेंगे अनशन पर बैठी थीं. इसके बाद दस जनपथ पर बोरा राहुल गांधी से मिलीं और साथ में प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी. तब भी एनएसयूआई के नेता असहज महसूस कर रहे थे.बहरहाल सुप्रीम कोर्ट वाला मार्च ख़त्म कर एक तरफ़ राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य बड़े नेता याचिका से जुड़ी कागज़ी कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, तभी एनएसयूआई के “दिल्ली कॉर्डिनेशन”व्हॉट्सएप ग्रुप में संगठन के पदाधिकारियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए. इसी बीच एक सदस्य ने ग्रुप का नाम बदल कर “WE THE छोटू” रख दिया. सूत्रों के मुताबिक इसका संदेश यह था कि एनएसयूआई के कार्यकर्ता की हालत किसी चाय की दुकान पर काम करने वाले छोटे बच्चे जैसी हो गई जिसकी कोई परवाह नहीं करता. एनएसयूआई के नेताओं ने बोलना शुरू किया कि क्या हम केवल भीड़ जुटाने के लिए हैं ?
NSUI की महिला कार्यकर्ताओं ने भी मार्च में लिया था हिस्सा
लगातार दो दिनों से राहुल गांधी के साथ नेहा बोरा को मंच साझा करते देख एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का सब्र जवाब देने लगा. वो संगठन के भीतर खुल कर सवाल उठा रहे थे. कांग्रेस आलाकमान को पार्टी के युवा नेताओं की नाराज़गी की जानकारी दी गई. माना जा रहा है कि युवा नेताओं की नाराज़गी दूर करने के लिए ही राहुल गांधी के साथ इन सबकी मुलाक़ात तय हुई. हालांकि इससे एक दिन पहले राहुल गांधी ने एनएसयूआई की दो महिला कार्यकर्ताओं समेत कुछ प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी जिन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की. राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने व्हॉट्सएप ग्रुप का नाम वापस बदला. तीन दिनों तक एनएसयूआई के आधिकारिक ग्रुप का नाम “WE THE छोटू” ही रहा जिसमें संगठन के प्रभारी कन्हैया कुमार, अध्यक्ष विनोद जाखड़ समेत सभी पदाधिकारी शामिल हैं.
राहुल गांधी के सामने किसी ने अपनी इसका जिक्र नहीं किया
राहुल गांधी के सामने किसी ने इन बातों का जिक्र नहीं किया. नेता के सामने सीधी शिकायत क्यों नहीं की के सवाल पर एनएसयूआई के एक पदाधिकारी ने कहा, अपने नेता से मिलते ही हमारा सारा दुख दूर हो गया. चाहे वो पुलिस के डंडे हों या “छोटू वाली पीड़ा”. हम अपने नेता राहुल गांधी के दिखाए रास्ते पर इस सरकार और आरएसएस की विचारधारा से लड़ते रहेंगे और छात्र आंदोलन को और मजबूत करेंगे. रोचक बात यह रही कि राहुल गांधी के सामने भले ही किसी ने “नेहा बोरा वाले मुद्दे” का जिक्र नहीं किया लेकिन NSUI के ह्वाट्सऐप ग्रुप का नाम बदलने वाले अखिलेश यादव नाम के पदाधिकारी द्वारा ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ शुरू की गई एक मुहिम की प्रियंका गांधी ने तारीफ़ की. सेवा दल के प्रमुख श्रीनिवास की भी तारीफ़ हुई जिस तरह उन्होंने प्रदर्शन के बाद साफ़-सफ़ाई करवाई.
इन सब की पृष्ठभूमि में राहुल गांधी ने गुरुवार को पार्टी के युवा संगठन आईवाईसी, छात्र संगठन एनएसयूआई और सेवा दल के करीब साठ कार्यकर्ताओं को पार्टी मुख्यालय में चाय-नाश्ते पर आमंत्रित किया और उनसे एक घंटे से ज्यादा समय तक बातचीत की. ये सभी वो कार्यकर्ता थे जिन्होंने बीते दो हफ्तों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ दिल्ली की सड़कों पर जम कर प्रदर्शन किया. राहुल ने इन सब के संघर्ष की सराहना की और सबका हौसला बढ़ाया. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं. कहने को ये पार्टी के शीर्ष नेताओं की ख़ून-पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं के साथ अनौपचारिक मुलाक़ात थी लेकिन बीते कई सालों में ऐसा पहली बार हुआ. इसकी पृष्ठभूमि का किस्सा बेहद दिलचस्प है.
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