- मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने नई दिल्ली में ऑरस सेनेट लिमोसिन में सवारी कर भारत-रूस दोस्ती का संदेश दिया.
- INNOPROM प्रदर्शनी में दोनों नेताओं ने औद्योगिक तकनीकों और व्यापारिक साझेदारी के अवसरों पर चर्चा की.
- मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट कर सांस्कृतिक और भाषाई संपर्क को मजबूत करने की इच्छा जताई.
कूटनीति के बड़े फैसले अक्सर मीटिंग रूम की चारदीवारी में तय होते हैं. लेकिन जब PM मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ पुतिन की अभेद्य 'ऑरस सेनेट' लिमोसिन में सवार हुए, तो पूरी दुनिया देखती रह गई. नई दिल्ली में 7 टन वजनी इस बख्तरबंद कार का सफर महज एक राइड नहीं था, बल्कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत-रूस की अटूट दोस्ती का खुला और ताकतवर संदेश था.
यह वही कार है, जो पिछले साल चीन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी और पुतिन की यात्रा के बाद चर्चा में आई थी. दोनों नेता इससे पहले भी कई मौकों पर एक साथ यात्रा कर चुके हैं. बैठक के बाद दोनों नेता पुतिन की लिमोसिन में सवार होकर भारत मंडपम स्थित 'INNOPROM' प्रदर्शनी पहुंचे. इस खास कार को अक्सर 'पहियों पर किला' भी कहा जाता है.
INNOPROM एक अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी
INNOPROM, जहां दुनिया भर के निर्माता और खरीदार एक मंच पर आते हैं. यहां नई तकनीकों का प्रदर्शन किया जाता है और व्यापारिक साझेदारी के अवसर तलाशे जाते हैं. इससे पहले हुई द्विपक्षीय वार्ता में PM मोदी ने पुतिन को महान तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट किया. PM मोदी ने कहा, "करीब 2,000 साल पहले तिरुवल्लुवर ने तिरुक्कुरल की रचना की थी. इसमें मानव जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं. मुझे उम्मीद है कि इसका रूसी अनुवाद दोनों देशों के लोगों को और करीब लाने में मदद करेगा."
बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोदी ने लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया, जो तिरुवल्लुवर के ज्ञान को भाषाओं और सीमाओं से परे पहुंचाता है. रूस भारत का एक अहम रणनीतिक साझेदार और रक्षा क्षेत्र का प्रमुख सहयोगी रहा है. मोदी और पुतिन नई दिल्ली के सम्मेलन केंद्र में एक-दूसरे से गर्मजोशी से मिलते और बातचीत करते दिखाई दिए.
'संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव'
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की. मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की. ये क्षेत्र भारत और रूस की लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के प्रमुख आधार हैं. इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र की स्थिति समेत कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए. प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है और भारत शांति प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है.
पुतिन ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था. हालांकि, इस महीने की शुरुआत में दोनों नेता किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भी मिले थे.
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