पंजाब कांग्रेस का झगड़ा बढ़ता ही जा रहा है. प्रभारी भूपेश बघेल की नाराज़ चल रहे चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा से मुलाकात तो हो गई लेकिन इसके ठीक बाद सांसद रंधावा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि “हमें ठोक कर बोलने वाला नेता चाहिए, कॉम्प्रोमाइज़्ड लीडर नहीं चाहिए.” इस बयान से चन्नी गुट ने यह साफ़ संकेत दे दिया कि राजा वडिंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का पार्टी आलाकमान का फैसला उन्हें हरगिज मंज़ूर नहीं है. इस दौरान पूर्व सीएम चन्नी रंधावा के बगल में खड़े थे.
कांग्रेस ने किसी भी बदलाव से किया इनकार
दूसरी तरफ प्रभारी भूपेश बघेल ने पार्टी के फैसले में किसी भी तरह के बदलाव की संभावना का एक बार फिर खंडन करते हुए कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है और सबको अपनी बात कहने का अधिकार है. पार्टी आलाकमान के फ़ैसले में कोई बदलाव नहीं होगा. वहीं, रंधावा के बयान पर बघेल ने कहा कि कोई कॉम्प्रोमाइज़्ड नेता नहीं चलेगा. ये मेरी ज़िम्मेदारी है. हम ऐसा नहीं होने देंगे कि कोई नेता बीजेपी या आम आदमी पार्टी से कंप्रोमाइज़ हो जाएगा.
चन्नी ने रखी अपनी मांग
कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत के घर पर बघेल और चन्नी की मुलाकात हुई. राणा गुरजीत के घर नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत कांग्रेस के एक दर्जन विधायक और बीते विधानसभा चुनाव के करीब अस्सी उम्मीदवार भी पहुंचे थे. सूत्रों के मुताबिक चन्नी गुट ने एक सुर में राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने की मांग की. बघेल ने इन नेताओं से कहा कि वो पार्टी आलाकमान तक संदेश पहुँचा देंगे. इसके बाद बघेल अपना छह दिनों का चंडीगढ़ दौरा ख़त्म कर निकल गए.
कई दौर की हो चुकी है बैठक
कई दौर की बैठकों के बाद कांग्रेस ने एक जुलाई को पंजाब चुनाव के लिए नई टीम का ऐलान किया. नई टीम के साथ बैठकों के लिए भूपेश बघेल सोमवार को चंडीगढ़ पहुंचे. बघेल शुरू से राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखे जाने के पक्ष में थे. इससे नाराज़ चन्नी गुट ने शुरुआत में बघेल का बहिष्कार किया. लेकिन वरिष्ठ नेताओं के सुझाव के बाद चन्नी गुट के एक वरिष्ठ नेता और विधायक के घर पर यह मुलाकात तय हुई. प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग को इस बैठक से दूर रखा गया.
बैठक के बाद रंधावा ने कहा कि हमनें कार्यकर्ताओं की भावनाओं और आशंकाओं को लेकर खुल कर बात की. हमने कहा कि कई बार फैसले वापस भी लेने पड़ते हैं. सभी नेता चाहते हैं राज्य में कांग्रेस की सरकार बने. सभी चाहते हैं आम आदमी पार्टी की सरकार में भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था की जो हालत है ऐसे में ठोक कर बोलने वाला नेता चाहिए, कंप्रोमाइज्ड नेता नहीं चाहिए.
लेकिन कांग्रेस आलाकमान को लगा कि अब बदलाव के लिए पर्याप्त समय नहीं है. सामाजिक समीकरण और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण कांग्रेस नेतृत्व चन्नी को पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाना चाहता था और इसीलिए राजा को बरकरार रखा गया. राजा को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है और उनके पक्ष में यह बात भी गई कि दो साल पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब में 13 में से 7 सीटें जीती थी. आलाकमान के भरोसे से राजा का जोश हाई है!
तभी, रंधावा के “कंप्रोमाइज्ड लीडर” वाले तंज पर राजा वडिंग ने सधे हुए अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा कि पार्टी में कोई स्लीपर सेल या कंप्रोमाइज़्ड लीडर नहीं होना चाहिए. राजा ने कहा कई नेताओं पर बीजेपी नेताओं से मिलने के आरोप लगते हैं. राजा वडिंग ने कहा, “कौन है कंप्रोमाइज़्ड लीडर ? अगर उन्होंने नाम नहीं लिया तो आप मेरी तरफ क्यों इशारा कर रहे हैं? रंधावा बिल्कुल ठीक कह रहे हैं. पार्टी में कोई भी स्लीपर सेल या कॉम्प्रोमाइज़्ड लीडर नहीं होना चाहिए. कइयों पर आरोप लगते हैं कि वो बीजेपी के नेताओं से मिलते हैं, तो कइयों पर आरोप लगते हैं कि वो झाड़ू (आम आदमी पार्टी) के नेताओं से मिलते हैं! स्लीपर सेल और कंप्रोमाइज़्ड नेता पंजाब को बिल्कुल नहीं चाहिए. हम दोनों कॉम्प्रोमाइज़्ड नहीं हैं. मुझसे उनका जो मनमुटाव हो गया है वो जल्द दूर हो जाएगा.”
क्यों है नाराजगी
इसी नाराज़गी को दूर करने और चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए भूपेश बघेल सोमवार से चंडीगढ़ में डेरा डाले हुए थे. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कई बैठकें की और कई वरिष्ठ नेताओं से उनके घर पर मुलाकात कर “ऑल इज वेल” का संदेश देने की पूरी कोशिश की लेकिन इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ. उल्टे नेताओं ने अब एक दूसरे पर “कॉम्प्रोमाइज़्ड” यानी दूसरी पार्टी से मिले होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया है. छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और अनुभवी नेता बघेल पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा और चुनाव प्रचार अभियान समिति प्रमुख चन्नी को एक साथ नहीं ला पाए.
भूपेश बघेल अब कांग्रेस आलाकमान को पंजाब कांग्रेस के हालात से अवगत कराएँगे. बागियों की अगुवाई कर रहे चरणजीत सिंह चन्नी राहुल गांधी से मुलाकात करना चाहते हैं. देखना होगा राहुल गांधी इस पेंच को कैसे सुलझाते हैं? समय रहते अगर आम सहमति नहीं बनी तो पंजाब में कांग्रेस की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है. पाँच साल पहले 2021 में पहले कैप्टन बनाम सिद्धू और फिर चन्नी बनाम सिद्धू के झगड़े में कांग्रेस की चुनाव में दुर्गति हो गई थी.
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