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81 घंटे बाद खत्म हुआ पुणे के मोशी हादसे का रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे से 9 शव बरामद, कैसे कचरे का पहाड़ बना काल

Pune Moshi Accident: पुणे के मोशी इलाके में कचरा डिपो परियोजना में हुए हादसे के बाद यहां रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 81 घंटे तक चला है. यहां से 9 शव मलबे से निकाले गए हैं. जबकि 14 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है.

81 घंटे बाद खत्म हुआ पुणे के मोशी हादसे का रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे से 9 शव बरामद, कैसे कचरे का पहाड़ बना काल
मोशी हादसे का रेस्क्यू ऑपरेशन 81 घंटे बाद पूरा
  • पुणे के मोशी हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन 81 घंटे बाद खत्म हुआ है. यह रविवार सुबह तक चला..
  • बुधवार को पुणे के मोशी में कचरे का विशाल पहाड़ गिर गया था. जिसमें कई लोग दब गए थे.
  • रेस्क्यू ऑपरेशन में 9 लोगों के शव मलबे से मिले हैं. जबकि 14 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है.
पुणे:

पुणे के पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के मोशी कचरा डिपो में कचरे का विशाल पहाड़ अचानक से भूस्खलन की तरह खिसक गया था. जिसमें यहां काम करने वाले कई लोग दब गए थे. घटना के बाद यहां रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था. करीब 81 घंटे यानि 3 दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यहां से 9 लोगों के शव मलबे से निकाले गए हैं. जबकि 14 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है. रविवार सुबह ऑपरेशन पूरा हुआ है. इस घटना के बाद एक बार फिर प्रबंधन की लापरवाही उजागर हुई है. मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया गया है. 

बुधवार को हुई थी घटना 

दरअसल, यह घटना 8 जुलाई बुधवार के दिन दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर हुई थी. उस दौरान यहां लगातार बारिश हो रही थी. ऐसे में कचरा डिपो के अंदर कचरे का पुराना विशाल पहाड़ अचानक खिसक गया, यह एक दम भूस्खलन जैसा था. ऐसे में यहां एक साथ कई टन कचरा वहां स्थित तीन मंजिला प्रशासनिक इमारत पर जा गिरा, जिससे पूरी इमारत मलबे के नीचे दब गई. जिस वक्त यह घटना हुई उस दौरान इमारत के पास करीब 23 लोग मौजूद थे. जो इस हादसे का शिकार हो गए. कचरे का पहाड़ भरभराकर गिरने से हड़कंप मच गया. आनन-फानन में जिला प्रशासन को जानकारी दी गई, जहां राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंची और कचरा हटाना शुरू किया. 

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81 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन 

हादसा बड़ा था. ऐसे में एनडीआरएफ और सेना को भी बचाव कार्य में लगाया गया. जबकि दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला था. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती कचरे के मलबे से रिस रही जहरीली मीथेन गैस थी. जिससे दम घुटने का खतरा था. इसके अलावा बारिश की वजह से रास्ता भी संकरा था. मलबे को हटाने और कंक्रीट संरचना को काटने के लिए अत्याधुनिक पोकलेन, जेसीबी और डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई. बुधवार से शुरू हुआ ऑपरेशन रविवार सुबह तक चलता रहा. करीब 81 घंटे तक बिना रुके चले इस अभियान के बाद रविवार सुबह बचाव कार्य को आधिकारिक रूप से बंद किया गया. 

9 लोगों की मौत 14 को बचाया गया

इस घटना में 9 लोगों की मौत हुई है. जबकि 14 लोगों को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरक्षित बचा लिया गया. लेकिन इस घटना प्रशासनिक लापरवाही को एक बार फिर सामने ला दिया है. हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित प्रोजेक्ट कंपनी ने पीड़ित परिवारों के लिए 25 लाख के मुआवजे की घोषणा की है. जबकि परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है. वहीं महाराष्ट्र सरकार ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं.

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