CJP Protest on Paper Leak Case: NEET पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर में छात्रों का प्रदर्शन जारी है. दिल्ली से शुरू हुआ यह आंदोलन अब मुंबई, पटना, रांची, कोलकाता सहित देश के कई शहरों में फैल चुका है. दूसरी ओर सरकार ने भी पेपर लीक पर नकेल कसने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं, जैसे- फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन, शिक्षा सचिव का हटाया जाना, NTA से 47 कर्मियों को बर्खास्त किया जाना. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी है. इस बीच आज कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि और सरकार के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होनी है. इधर थोड़ी देर पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉफ्रेंस कर प्रधान की बर्खास्तगी, छात्रों को पीटने वालों को सजा और प्रधानमंत्री से माफी की मांग कर दी है.
जंतर-मंतर पर बढ़ाई गई सुरक्षा
दूसरी ओर जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है. दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग और जयसिंह मार्ग पर सुरक्षा बढ़ाते हुए लोहे की रॉड, सरियों और वेल्डिंग की मदद से बैरिकेड्स को जमीन पर पूरी तरह फिक्स कर दिया है. इसके साथ ही जंतर-मंतर के पास वाली सड़क पर 6 लेयर की बैरिकेडिंग लगा दी गई है.
आज तीन बजे सरकार और सीजेपी से बातचीत
आज दोपहर बाद तीन बजे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि आशुतोष रांका और सौरव दास की सरकार से बातचीत होगी. सरकार की ओर से इस बातचीत में जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह शामिल होंगे. मिली जानकारी के अनुसार यह बातचीत शाम 3 बजे होगी. यह बातचीत आंदोलन की अगली कड़ी तय करेगी. देखना होगा इस बातचीत में क्या फैसला होता है?
रांका ने कहा- धमेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही चाहिए
इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने NTA से 47 कर्मियों को बर्खास्त किए जाने पर कहा, "अब हमें यह देखना होगा कि किन 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है और किस मकसद से यह कार्रवाई की गई है. हमें उन सभी जानकारियों को देखना होगा. लेकिन जैसा कि हम कहते आ रहे हैं, असल जवाबदेही इस देश के शिक्षा मंत्री की है, क्योंकि पेपर लीक और नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के लिए वही सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. इसलिए, उन्हें इस्तीफा देना ही चाहिए."
प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ तो कठोर फैसले लेंगेः रांका
आशुतोष रांका ने कहा, "सरकार पूरी तरह से अड़ी हुई है. जब पूरे देश को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए, और आप कह रहे हैं कि वह इस्तीफा नहीं देंगे, तो यह तो सबसे आसान काम है. अगर यह इतना आसान कदम है, तो पहले यही कर लीजिए और मुश्किल मुद्दों से बाद में निपटिए. अगर सरकार अपना ऐसा ही रवैया रखेगी तो हमे कठोर निर्णय लेने पड़ेंगे."
प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ तो बैठकों का क्या मतलबः रांका
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता ने कहा, "अब तक, कोई खास हलचल नहीं हुई है. कल की बैठक में, हमें मुआवजा और कानूनी मामलों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली. हमें सैद्धांतिक सहमति मिली, और उम्मीद है कि आज लिखित समझौता भी मिल जाएगा. हालांकि, हमारी मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है. असल में, जैसा कि हमने कल मुख्यधारा की मीडिया में देखा, सूत्रों का कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे. अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देने वाले हैं, तो कृपया हमें बताएं, ऐसी बैठकें करने का क्या मतलब है? ऐसे में, हम अपनी अगली रणनीति के अनुसार आगे बढ़ेंगे."
कल दो घंटे तक चली थी बातचीत
बता दें कि शुक्रवार को दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कॉकरोच पब्लिक पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की थी. बैठक के बाद जेपी नड्डा ने कहा था, "हम आंदोलनकारी लोगों के विषयों पर चर्चा करने के लिए यहां आए थे. बैठक लगभग 2 घंटे तक चली. सरकार की ओर से मैं और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह आए. हमने उनकी बातें सुनीं. हर विषय पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई. उनकी 3 मुख्य मांगें और परीक्षाओं के लिए 5 सुधार के सुझाव थे. हमने उनसे कहा है कि हम शनिवार दोपहर फिर मिलेंगे और उन्हें सरकार के बीच हुई चर्चा के बारे में बताएंगे."
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