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पानी बचाने की मुहिम को नई धार, हर बूंद बचाने का प्लान, PM मोदी ने दिया 'जल उत्सव' का मंत्र

केंद्र और राज्यों ने मिलकर देश की जल सुरक्षा के लिए साझा रणनीति बनाई है. प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने, AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और मई 2027 तक 2 करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे बनाने का लक्ष्य रखा है.

पानी बचाने की मुहिम को नई धार, हर बूंद बचाने का प्लान, PM मोदी ने दिया 'जल उत्सव' का मंत्र
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जनभागीदारी के बिना जल संरक्षण अधूरा है.
@PIBWater/X

देश की जल सुरक्षा को लेकर केंद्र और सभी राज्यों ने एक साथ आकर एक नई शुरुआत की है. जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय सम्मेलन में देशभर के जल मंत्रियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों ने पानी की हर एक बूंद बचाने का खाका तैयार किया है. इस सम्मेलन का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक मार्गदर्शन के साथ हुआ. पीएम मोदी ने इस दौरान साफ कर दिया कि पानी का संकट केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसे जनांदोलन बनाकर ही सुलझाया जा सकता है. इसके लिए उन्होंने देश भर में 'जल उत्सव' मनाने और जल प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने का अपील किया.

यह सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी की ओर से शुरू की गई 'टीम इंडिया' और सहकारी संघवाद की उस सोच का हिस्सा है, जिसके तहत केंद्र और राज्य मिलकर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर काम करेंगे. यह अपनी तरह का पहला विभागीय सम्मेलन था और आने वाले समय में अन्य मंत्रालयों के भी इसी तर्ज पर शिखर सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

सम्मेलन के चार मुख्य स्तंभ और बड़े फैसले 

दो दिनों तक चले इस मंथन में मुख्य रूप से चार बड़े विषयों पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई है. अव्वल तो जल अवसंरचना परियोजनाओं में तेजी है. अधूरी पड़ी पानी की परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करना.

  • 'जल संचय' अभियान को आम जनता से जोड़कर वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देना.
  • पीने के पानी के प्राकृतिक और कृत्रिम स्रोतों को लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखना.
  • जल जीवन मिशन 2.0: ग्रामीण इलाकों में नल से जल की निरंतर और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति के लिए संचालन व रखरखाव (O&M) को मजबूत करना.

'जल उत्सव' और 'जहां पानी गिरे , वहीं करो संचय' का नारा

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जनभागीदारी के बिना जल संरक्षण अधूरा है. उन्होंने 'जल उत्सव' जैसे अभियानों के जरिए लोगों में जागरूकता फैलाने का सुझाव दिया. पीएम मोदी ने 'जल जहां गिरे, वहीं संचित करें' का मंत्र दोहराते हुए राज्यों से कहा कि वे अपने-अपने भूगोल के हिसाब से बारिश के पानी को सहेजने की व्यवस्था करें. इस दिशा में एक बड़ा लक्ष्य तय करते हुए मई 2027 तक पूरे देश में 2 करोड़ नए जल संरक्षण ढांचे तैयार करने की योजना बनाई गई है.

राज्यों के बीच सीख का आदान-प्रदान और छत्तीसगढ़ मॉडल

पीएम मोदी ने कहा कि राज्यों को एक-दूसरे के सफल प्रयोगों से सीखना चाहिए, ताकि किसी को नए सिरे से समाधान खोजने की जरूरत न पड़े. सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी अपने राज्य के जल संरक्षण मॉडल को सामने रखा. प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्यों के मंत्रियों, अधिकारियों और किसानों के अध्ययन दौरे आयोजित किए जाने चाहिए ताकि वे दूसरे राज्यों में जाकर सफल मॉडलों को जमीनी स्तर पर समझ सकें.

AI और डेटा से मजबूत होगी जल नीति

भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए पीएम मोदी ने तकनीक के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया. उन्होंने पानी के आंकड़ों को एक समान प्रारूप में इकट्ठा करने और उनके विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की सलाह दी. इससे पानी की कमी वाले इलाकों में पहले से योजना बनाने में मदद मिलेगी.

इसके अलावा खेती और उद्योगों में रिसाइकल्ड पानी के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई. जलाशयों से गाद निकालने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने और मानसून से पहले बांधों की सुरक्षा जांचने के निर्देश दिए गए. बच्चों में बचपन से ही पानी की कीमत समझाने के लिए इसे स्कूली पढ़ाई का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया.

सटीक तकनीक और शहरी निकायों को संदेश

तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए पीएम मोदी ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को भविष्य की जल जरूरतों के प्रति सतर्क रहने को कहा और उनके लिए भी 'चिंतन शिविर' आयोजित करने का सुझाव दिया. पानी की खपत घटाने वाली वैश्विक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रदर्शनियां और वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी ताकि भारतीय उद्योग भी बेहतर जल-बचत उपकरण बना सकें.

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सम्मेलन के समापन पर कहा कि दो दिनों का यह मंथन भारत को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.

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