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This Article is From Feb 08, 2026

फिर तेरी कहानी याद आई, ‘द्रोहकाल का पथिक’ पप्पू यादव की राजनीति का विरोधाभासी सफर

31 साल पुराने मामले में पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद बिहार की राजनीति फिर गरमा गई है और उनके समर्थन में राज्यभर में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं. समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, जबकि गिरफ्तारी ने पप्पू यादव के राजनीतिक प्रभाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.

फिर तेरी कहानी याद आई, ‘द्रोहकाल का पथिक’ पप्पू यादव की राजनीति का विरोधाभासी सफर
  • पटना पुलिस ने 31 वर्ष पुराने मामले में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है
  • पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है
  • पप्पू यादव छह बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं तथा तीन बार निर्दलीय सांसद बनना उनकी खास उपलब्धि है
पूर्णिया:

इतिहास ने खुद को दोहरा दिया. 06 फ़रवरी की देर रात पटना पुलिस ने 31 वर्ष पुराने मामले गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 552/95 में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. यह गिरफ्तारी अब राजनीतिक रंग ले चुकी है. पप्पू यादव की गिरफ्तारी के विरोध में पूरे राज्य में प्रदर्शन जारी हैं. ठीक इसी तरह, 11 मई 2021 को, जब देश कोविड काल से जूझ रहा था, 32 वर्ष पुराने एक अपहरण के मामले में मधेपुरा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. उस समय भी गिरफ्तारी को लेकर जबरदस्त राजनीतिक हंगामा हुआ था. निश्चित रूप से, दोनों बार गिरफ्तारी न्याय प्रक्रिया के तहत ही हुई, और ऐसे मामलों में गिरफ्तारी स्वाभाविक है. लेकिन सवाल यह है कि पप्पू यादव के समर्थक दोनों मौकों पर गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध क्यों बताते हैं.

समर्थकों का दावा है कि 2021 में गिरफ्तारी इसलिए हुई, क्योंकि पप्पू यादव ने सारण सांसद राजीव प्रताप रूढ़ि से जुड़ी एम्बुलेंस रिपोर्ट को प्रमुखता से उठाया था. इस बार गिरफ्तारी इसलिए हुई, क्योंकि वे नीट छात्रा मामले में लगातार पुलिस और सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे.

फिलहाल, पप्पू यादव की गिरफ्तारी सुर्खियों में है और उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है. अपने राजनीतिक जीवन में कई अप्रत्याशित सफलताएं अर्जित करने वाले पप्पू यादव का विवादों से गहरा रिश्ता रहा है. वे अपने बयानों और विद्रोही तेवरों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं. उन्हें स्वभाव से विद्रोही और अत्यधिक महत्वाकांक्षी नेता माना जाता है, जिसकी वजह से वे लगातार विवादों से घिरे रहते हैं.

जेल में रहते हुए लिखी गई उनकी पुस्तक ‘द्रोहकाल का पथिक' उनके जीवन-संघर्ष और व्यक्तित्व को विस्तार से सामने रखती है.

6 बार सांसद-विरोधाभासों से भरा पूरा जीवन

35 वर्षों की राजनीतिक यात्रा में 06 बार सांसद और 01 बार विधायक बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. इनमें से 03 बार निर्दलीय सांसद और 01 बार निर्दलीय विधायक बनना विरले ही देखा जाता है. इसी वजह से पप्पू यादव कहते हैं
“निर्दलीय सांसद बनना भगवान के भी वश की बात नहीं.”

साल 2015 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान भी मिला. यही नहीं, वे और उनकी पत्नी रंजीत रंजन दोनों एक साथ सांसद बनने वाले दुर्लभ दंपतियों में शामिल हैं.

हालांकि, उनका जीवन विरोधाभासों से भरा रहा है. वे 17 वर्ष जेल में बिता चुके हैं, लेकिन गरीब और जरूरतमंद उन्हें आज भी मसीहा कहते हैं, जबकि विरोधी उन्हें दबंग या बाहुबली करार देते हैं. कोविड काल के दौरान वे अस्पतालों से लेकर श्मशान तक सक्रिय रहे. दिल्ली स्थित अपने आवास पर उन्होंने बीमारों के लिए सेवाश्रम भी संचालित किया.

अजीत सरकार हत्याकांड में 15 साल रहना पड़ा जेल में

14 जून 1998 को पूर्णिया में सरेआम हुए अजीत सरकार हत्याकांड ने पप्पू यादव के जीवन की दिशा बदल दी. इस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई और वे तुरंत जेल भेज दिए गए. केस CBI को सौंपा गया और 2008 में उन्हें उम्रकैद की सजा मिली. बाद में 2013 में पटना हाई कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया. लगभग 15 साल वे बेउर और तिहाड़ जेल में रहे. रिहा होने के बाद 2004 में उन्होंने मधेपुरा से राजद उम्मीदवार के रूप में शरद यादव को हराकर धमाकेदार वापसी की.

राजनीतिक में बेहद महत्वाकांक्षी माने जाते हैं पप्पू यादव

पप्पू यादव की सबसे बड़ी ताकत उनकी अद्भुत संघर्ष क्षमता. बिना थके, बिना रुके, वे अपने राजनीतिक मिशन पर डटे रहते हैं. यही कारण है कि 2019 की लोकसभा और 2020 की विधानसभा में हार के बावजूद वे 2024 का लोकसभा चुनाव पूर्णिया से निर्दलीय जीतने में सफल रहे. यह जीत भी उनके जिद्दी संघर्ष और व्यक्तिगत नेटवर्क की मिसाल मानी जाती है. हालांकि उन्हें नज़दीक से जानने वाले कहते हैं वे सिर्फ महत्वाकांक्षी नहीं, अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं. इसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते वे किसी दल में लंबे समय तक टिक नहीं पाते. यही महत्वाकांक्षा उन्हें विद्रोह की राह पर ले जाती है.

कथित तौर पर पप्पू यादव यह कहते रहे हैं कि “DM बन नहीं सका, PM बन नहीं सकता, जब तक CM नहीं बन जाता-चैन कहां!”

देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनकी यह महत्वाकांक्षा कभी पूरी होती है. फिलहाल, गिरफ्तारी की इस विपत्ति को वे एक बार फिर राजनीतिक अवसर में बदलने में जुटे हैं. कम लोग जानते हैं कि तिहाड़ में रहते हुए उन्होंने इग्नू से आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा भी किया है. और अब उसी सिद्धांत को राजनीति में भी लागू करते दिखाई देते हैं.

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Pappu Yadav Arrest, Bihar Politics
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