- नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है.
- पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस हिंसा को एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए जांच के परिणाम साझा किए हैं.
- जांच में पता चला है कि हिंसा फैलाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप पर भ्रामक सूचनाएं और संदेश फैलाए गए थे.
Noida News : उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किए गए उपद्रव के बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है. घटना के बाद पूरे जिले में पुलिस पूरी तरह सतर्क है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा दोनों क्षेत्रों में पुलिस के आला अधिकारी लगातार सड़क पर मार्च कर रहे हैं. गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह स्वयं मोर्चा संभालते हुए अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं. इसी क्रम में उन्होंने ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र का दौरा कर मौके पर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया.
एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था...CP लक्ष्मी सिंह
नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं पर पुलिस कमिश्नर (CP) लक्ष्मी सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह हिंसा कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था. CP लक्ष्मी सिंह के बताया कि जांच में यह सामने आया है कि एक विशेष ग्रुप द्वारा शहर की शांति भंग करने और हिंसा फैलाने का सुनियोजित प्रयास किया गया. प्रदर्शन से पहले ही कई व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया अकाउंट तैयार किए गए थे. इन डिजिटल माध्यमों का उपयोग केवल सूचना देने के लिए नहीं, बल्कि गलत और भ्रामक जानकारियां फैलाने के लिए किया गया था.
'सोशल मीडिया पर संदेश प्रसारित किए गए..'
कमिश्नर ने यह भी बताया कि इन समूहों के माध्यम से मुख्य रूप से लेबर (श्रमिक वर्ग) को निशाना बनाया गया और उन्हें उकसाने का काम किया गया. सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश प्रसारित किए गए जिनमें लोगों से सड़कों पर उतरने, पत्थरबाजी करने और आगजनी करने का आह्वान किया गया था. जांच में यह भी पाया गया कि लोगों को पेट्रोल बम बनाने और पुलिस व सार्वजनिक संपत्ति पर हमला करने के लिए प्रेरित किया जा रहा था. हिंसा के लिए उकसाने वाले और भ्रामक खबरें फैलाने वाले मुख्य आरोपियों की पहचान की जा रही है. उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल पुलिस उन सभी व्हाट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया हैंडल्स को ट्रैक कर रही है, जहां से हिंसा की रूपरेखा तैयार की गई थी. पुलिस का कहना है कि डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए साजिशकर्ताओं तक पहुंचने का काम तेजी से जारी है. प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी सोशल मीडिया अफवाह पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें.
ये भी पढ़ें : मजदूरों के आंदोलन के पीछे क्या विदेशी हाथ? पुलिस की गिरफ्त में आए श्रमिक के भाई का खुलासा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं