- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी खोलने का निर्णय लिया है
- ट्रंप ने कहा कि युद्ध खत्म होने के करीब हैं और अमेरिका ईरान के साथ बड़ा समझौता कर सकता है
- होर्मुज की नाकाबंदी के कारण वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ गया है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ज्यादा न सही, लेकिन थोड़े तो नरम पड़ने ही लगे हैं. पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में पीस टॉक फेल होने के बाद ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करने का ऐलान कर दिया था. अमेरिकी सेना ने होर्मुज की नाकाबंदी भी कर दी थी और धमकी दी थी कि ईरान को टोल देने वाले जहाजों को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा. लेकिन अब ट्रंप का कहना है कि वह चीन और पूरी दुनिया के लिए होर्मुज को फिर से खोल रहे हैं.
ट्रंप का दावा है कि चीन और अमेरिका मिलकर काम कर रहे हैं और वह इस बात से खुश है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को खोल रहे हैं.
ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा, 'चीन इस बात से खुश है कि मैं होर्मुज स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोल रहा हूं. मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूं और पूरी दुनिया के लिए भी. ऐसी स्थिति फिर कभी नहीं आएगी.'

इतना ही नहीं, फॉक्स बिजनेस के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने जंग खत्म होने का इशारा भी किया. उन्होंने कहा कि होर्मुज खुल रहा है और जहाज वापस आ रहे हैं. हालांकि, उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी. ईरान युद्ध को लेकर उन्होंने कहा, 'हमारा काम अभी खत्म नहीं हुआ है.' लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 'मुझे लगता है कि युद्ध खत्म होने के बहुत करीब है और अमेरिका ईरान के साथ एक बड़ा समझौता कर सकता है.'
यह भी पढ़ेंः चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार, होर्मुज बंद रहने पर भी कैसे फायदे में रहेगा ड्रैगन? समझिए
होर्मुज को लेकर क्यों बदले ट्रंप के तेवर? 5 कारण
- दुनिया भर का विरोध: 28 फरवरी से जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद है. इस्लामाबाद टॉक फेल होने के बाद अमेरिका ने भी इसकी नाकाबंदी कर दी. इसके बाद ट्रंप का दुनियाभर में विरोध होने लगा. चीन ने तो अमेरिका पर खतरनाक और गैर-जिम्मेदारा रवैया अपनाने का आरोप लगा दिया था. इटली और यूके जैसे पुराने दोस्त भी ट्रंप से नाराज हो गए थे.
- वैश्विक मंदी का खतरा: ट्रंप की होर्मुज नाकाबंदी से वैश्विक मंदी का खतरा भी बढ़ गया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी थी कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने का खतरा पैदा हो गया है और इससे बड़े पैमाने पर ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है. IMF ने चेतावनी दी है कि अगर जंग और लंबी खिंचती है तो इससे वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में 1.3 फीसदी की गिरावट आ सकती है.
- अमेरिका को ही नुकसान: ईरान युद्ध के कारण अमेरिका को भी भारी नुकसान हो रहा है. अमेरिका में मार्च के महीने में थोक महंगाई दर 4% बढ़ गई है. यह तीन साल में सबसे ज्यादा है. फरवरी की तुलना में मार्च में एनर्जी की कीमतों में 8.5% का उछाल आया है. इतना ही नहीं, अनुमान है कि इस जंग में अमेरिका को हर दिन 2 अरब डॉलर का खर्च करना पड़ रहा है.
- वार्ता से पहले नरमी के संकेत: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर शांति वार्ता होने की उम्मीद है. एक या दो दिन में ही इनके बीच बातचीत हो सकती है. ऐसी भी चर्चा हैं कि अमेरिका-ईरान का सीजफायर दो हफ्ते और बढ़ाया जा सकता है. होर्मुज को लेकर ट्रंप अब जो कर रहे हैं, उसे इस बातचीत से पहले नरमी से जोड़कर देखा जा रहा है.
- ईरान की धमकी: ईरानी सेना ने धमकी दी थी कि अगर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहती है तो फारस की खाड़ी, ओमान सागर और रेड सी से जहाजों की आवाजाही रोक दी जाएगी. ईरानी सेना के मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने धमकी देते हुए कहा था कि अगर नाकाबंदी जारी रही तो फारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर में किसी भी तरह के आयाता-निर्यात को जारी रखने की इजाजत नहीं होगी.
यह भी पढ़ेंः ईरान प्री-वॉर कंडीशन चाह रहा था... ट्रंप के ऑफर को कर दिया 'ना'- पाकिस्तानी पत्रकार ने बता दी अंदर की बात
नाकाबंदी के बाद से नहीं निकला कोई जहाज: अमेरिका
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी सेना की नाकाबंदी सोमवार से शुरू हो गई है. यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकाबंदी के लिए 12 से ज्यादा जंगी जहाजों को तैनात किया गया है. इनमें 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान और 10 हजार से ज्यादा सैनिक हैं.
During the first 48 hours of the U.S. blockade on ships entering and exiting Iranian ports, no vessels have made it past U.S. forces. Additionally, 9 vessels have complied with direction from U.S. forces to turn around and return toward an Iranian port or coastal area. pic.twitter.com/h4msgvaPTl
— U.S. Central Command (@CENTCOM) April 15, 2026
यूएस सेंट्रल कमांड का दावा है कि होर्मुज की नाकेबंदी के बीच कोई भी जहाज ईरानी बंदरगाहों तक नहीं पहुंच पाया है. सेंट्रल कमांड ने एक बयान जारी कर कहा है कि होर्मु की नाकेबंदी के 48 घंटे बीत जाने के बाद कोई भी जहाज न तो ईरानी पोर्ट में दाखिल हुआ है और न ही बाहर निकला है. इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेना के आदेश के बाद 9 जहाज वापस भी लौट गए.
यह भी पढ़ेंः अमेरिका और इजरायल का हमला नहीं आया काम, ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम का नहीं हुआ बाल भी बांका- रिपोर्ट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं