भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन पार्टी के सबसे युवा नेता हैं, जिन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है. आखिर उनमें ऐसा कौन सा गुण है, जिसके चलते उन पर पीएम मोदी समेत वरिष्ठ नेताओं ने भरोसा जताया. उनके करीबी कहते हैं कि नितिन नवीन बेहद मृदुभाषी हैं और लोगों के बीच अपना भरोसा कायम करने में महारत रखते हैं. इस बीच उनके सहपाठी रहे एक मित्र ने नितिन नवीन की कहानी शेयर की है, जिसे खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया. यही नहीं पीएम मोदी ने कहा कि नितिन नवीन की सादगी और सरलता हर कार्यकर्ता के लिए गर्व की बात है.
पीयूष पद्माकर नाम के पत्रकार ने नितिन नवीन पर यह पोस्ट लिखी थी. इसमें उन्होंने नितिन नवीन की सादगी समेत कई चीजों का जिक्र किया. वह लिखते हैं, 'नितिन नवीन कौन? नितिन कैसे यहां तक पहुंचे? क्या नितिन की तरह कोई और भी 45 साल में भाजपा अध्यक्ष बन सकता है? नितिन ने आज लखनऊ में अपनी पॉलिटिकल जर्नी के बारे में कुछ बातें भाजपा नेताओं को बताई. नितिन ने जो बातें नहीं बताईं, वो बताता हूं. ये कहानी साल 1998 से शुरू होती है. मैं और नितिन दोनों दिल्ली में ही पढ़ते थे. दोनों ने बारहवीं की पढ़ाई पूरी की. वो CSKM में पढ़ता था और मैं केंद्रीय विद्यालय में. नितिन के पिताजी विधायक थे लेकिन मुझे बहुत मानते थे. मेरे पिताजी और नवीन जी बरसों पुराने दोस्त थे. 1998 के मई और जून के महीने में मैं और नितिन साथ एक ही कमरे में रहते थे.'
इसके आगे वह लिखते हैं, '12वीं पास होने के बाद हम दिल्ली के अलग-अलग कॉलेज में दाख़िले की दौड़ में शामिल हुए थे. नितिन विधायक का बेटा था, लेकिन घमंड एक पैसे का नहीं. लंच में बीस रुपए की थाली हम शेयर करते थे ताकि दस रुपए बच सकें. डीटीसी बस में चलते थे ताकि ऑटो का किराया बच सके. टैक्सी ले लें, इतनी बात नितिन के मुंह से कभी निकली भी नहीं. उस जमाने में टैक्सी का मतलब पचास रुपये से ऊपर का खर्च था. हमारे छह सात दोस्त अगर आ जाते तो हम दोनों सोचते थे, आज थाली कैसे ऑर्डर की जाए ताकि कम खर्च हो. उस वक्त भी नितिन ने कभी किसी को दिखाने या जताने के लिए भी नहीं कहा - वो MLA का बेटा है.'
जब महंगे फ्लैट में रहने से खुद नितिन नवीन ने किया इनकार
उन्होंने आगे बताया, 'जून के बाद अगले कुछ महीने हम साथ ही एक ही कॉलेज में पढ़ने लगे. दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाके में मल्टी स्टोरी इमारतें बनी हैं. रहने का मन तो वहां था. लेकिन मैं, नितिन, विश्वजीत और सीताराम , चार दोस्त मिलकर भी दिल्ली-92 पटपड़गंज के अपार्टमेंट्स में फ़्लैट नहीं ले पाए. मुझे आज भी याद है वाघवा प्रॉपर्टी डीलर की दुकान थी. बेंच पर मैं और नितिन बैठे थे. सस्ता मकान दिलाने की बात कह रहे थे. उसने पूछा पिताजी क्या करते हैं. मैंने ही नितिन का भी परिचय करवाया. जैसे ही दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर को पता चला किरायेदार के पिता बिहार की राजधानी पटना के विधायक हैं, उसने महंगे फ़्लैट दिखाने शुरू कर दिए.'
दोस्तों संग बर्तन भी धोते थे नितिन नवीन
इसके बाद में नितिन ने ही कहा, 'हमारा बजट महीने का दो हज़ार है। पापा इससे ज़्यादा नहीं देंगे। रहना, खाना, कॉलेज जाना, सब दो हज़ार रुपए में करना होगा। इसके बाद अपार्टमेंट में रहना भूलना पड़ा। पश्चिम विनोद नगर के मंडावली इलाक़े में अंदर की गली में आज का भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन अपने तीन दोस्तों के साथ रहने लगा। नौकर या मेड रखने के पैसे नहीं थे। दो दोस्त सुबह-सुबह ब्रेकफास्ट बनाते तो बाकी दो दोस्त बर्तन धोते। झाड़ू पोछा लगाते । शुरू शुरू में मैं और नितिन एक साथ ड्यूटी पर लगे। दोनों मिलकर झूठे बर्तन भी धो लेते थे। झाड़ू भी लगा लेते थे। पोछा भी। फिर फटाफट तैयार होकर दो बस बदलकर कॉलेज पहुंच जाते थे। नितिन उस ज़माने में भी चारों दोस्तों में सबसे ज़्यादा अनुशासित और मिलनसार था। झगड़े हमारे होते तो सुलझाता नितिन था।'
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