- पीएम नरेन्द्र मोदी ने महात्मा ज्योतिबा फुले को महान समाज सुधारक और नैतिक साहस का प्रेरक उदाहरण करार दिया
- फुले ने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाकर वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले और सामाजिक सुधार किए
- फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जो सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देता था
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा ज्योतिबा फुले को एक महान समाज सुधारक करार देते हुए शनिवार को कहा कि उनका जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है.फुले की जयंती पर अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में मोदी ने कहा कि फुले को उनके द्वारा स्थापित संस्थानों और उनके नेतृत्व वाले आंदोलनों के लिए याद किया जाता है.
पीएम मोदी ने तारीफ में पढ़े कसीदे
उन्होंने कहा, ‘‘महान समाज सुधारक महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है.'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘हमें शिक्षा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करना होगा. अन्याय के प्रति संवेदनशील बनना होगा और यह विश्वास रखना होगा कि समाज अपने प्रयासों से ही खुद को बेहतर बना सकता है.उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की शक्ति को जनहित और नैतिक मूल्यों से जोड़कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं.''
मोदी ने कहा, ‘‘यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं। महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं।''
फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र में हुआ था और उनका निधन 28 नवंबर 1890 को हुआ.प्रधानमंत्री ने कहा कि फुले ने एक नई सामाजिक सोच को जन्म देकर शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया. उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें आज भी बहुत प्रेरित करता है.पिछले एक दशक में भारत ने युवाओं के लिए अनुसंधान और नवोन्मेष को बहुत प्राथमिकता दी है। एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का प्रयास किया गया है, जिसमें युवा सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और नवोन्मेष के लिए प्रेरित हों।''
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ज्ञान, कौशल और अवसरों में निवेश करके भारत अपने युवाओं को देश की प्रगति का आधारस्तंभ बना रहा है.''उन्होंने कहा कि अपने शैक्षिक ज्ञान और बौद्धिकता से महात्मा फुले ने कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की गहरी जानकारी हासिल की.
उन्होंने कहा, ‘‘वे कहते थे कि किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है.उन्होंने देखा कि सामाजिक असमानताएं खेतों और गांवों में लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं इसलिए उन्होंने गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया.इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए.''
उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज...
प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 अप्रैल हम सभी के लिए बहुत विशेष दिन है क्योंकि आज भारत के महान समाज सुधारकों में से एक और पीढ़ियों को दिशा दिखाने वाले महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती है.उन्होंने कहा कि इस वर्ष यह अवसर और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत भी हो रही है.उन्होंने कहा, ‘‘महान समाज सुधारक महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है.महात्मा फुले को केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्होंने लोगों के मन में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव हम आज भी महसूस करते हैं। उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं.''
मोदी ने कहा, ‘‘महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में एक बहुत साधारण परिवार में हुआ,लेकिन शुरुआती चुनौतियां कभी उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को नहीं रोक पाईं.उन्होंने हमेशा यह माना कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान हासिल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उन्हें अनदेखा करना चाहिए.''उन्होंने कहा कि बचपन से ही महात्मा फुले बहुत जिज्ञासु थे और अपनी उम्र के अन्य बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक पुस्तकें पढ़ते थे।
उन्होंने कहा, “वह कहते भी थे-‘हम जितना ज्यादा सवाल करते हैं, उनसे उतना ही अधिक ज्ञान निकलता है।' साफ है कि बचपन से मिली जिज्ञासा उनकी पूरी यात्रा में बनी रही.''प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा फुले के जीवन में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मिशन बनी जिनका मानना था कि ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है जिसे सभी के साथ साझा किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले.''
उन्होंने कहा कि वह कहते थे “बच्चों में जो सुधार मां के माध्यम से आता है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है इसलिए अगर स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाएं.”प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘महात्मा फुले ने कहा था-जोपर्यंत समाजातील सर्वांना समान अधिकार मिलत नाहीत, तोपर्यंत खरे स्वातंत्र्य मिलत नाही- यानी जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती.''
उन्होंने कहा, ‘‘इसी विचार को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने कई संस्थाओं की स्थापना की. उनका सत्यशोधक समाज, आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था.'' उन्होंने कहा, ‘‘यह आंदोलन सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा था. यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वाले लोगों की पुरजोर आवाज बना.यह आंदोलन उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि समाज की मजबूती के लिए न्याय, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और सामूहिक प्रगति जरूरी है.''
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फुले का व्यक्तिगत जीवन भी साहस की मिसाल...
मोदी ने कहा कि फुले का व्यक्तिगत जीवन भी साहस की मिसाल रहा.उन्होंने कहा, ‘‘लगातार लोगों के बीच रहकर काम करने का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा,लेकिन गंभीर बीमारी भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकी. एक गंभीर स्ट्रोक के बाद भी उन्होंने अपना काम और समाज के लिए संघर्ष जारी रखा.उनका शरीर कमजोर हुआ, लेकिन समाज के प्रति उनका समर्पण कभी नहीं डगमगाया.आज भी करोड़ों लोग उनके जीवन के इस पहलू से प्रेरणा लेते हैं.''
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi arrives at Prerna Sthal on the Parliament premises to pay a floral tribute to Mahatma Jyotiba Phule on his 200th birth anniversary today.
— ANI (@ANI) April 11, 2026
Lok Sabha Speaker Om Birla, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Union Minister Arjun Ram Meghwal, former… pic.twitter.com/QexqUVky1Z
प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा फुले का स्मरण, सावित्रीबाई फुले के सम्मानजनक उल्लेख के बिना अधूरा है. उन्होंने कहा कि वह स्वयं भारत की महान समाज सुधारकों में से एक थीं तथा भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाई और महात्मा फुले के निधन के बाद भी उन्होंने इस कार्य को जारी रखा. उन्होंने कहा, ‘‘1897 में प्लेग महामारी के दौरान उन्होंने मरीजों की इतनी सेवा की कि वह स्वयं भी इस बीमारी की शिकार हो गईं और उनका निधन हो गया।''
मोदी ने कहा, ‘‘भारतभूमि बार-बार ऐसी महान विभूतियों से धन्य होती रही है, जिन्होंने अपने विचार, त्याग और कर्म से समाज को मजबूत बनाया है। उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं बदलाव का माध्यम बने.सदियों से हमारे देश में समाज सुधार की आवाज उन्हीं लोगों से उठी है, जिन्होंने पीड़ा को भाग्य नहीं माना, बल्कि उसे खत्म करने के प्रयासों में जुटे रहे। महात्मा ज्योतिराव फुले भी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे.'' उन्होंने कहा, ‘‘मुझे 2022 में पुणे की अपनी यात्रा याद है, जब मैंने शहर में महात्मा फुले की भव्य प्रतिमा पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. थी.''
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