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डेरा सचखंड बल्लां और पंजाब की सियासत, क्यों अहम है पीएम मोदी का जालंधर दौरा

संत रविदास जयंती के अवसर पर पीएम मोदी का जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां दौरा चर्चा में है. इसे दलित सम्मान, धार्मिक आस्था और पंजाब की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

डेरा सचखंड बल्लां और पंजाब की सियासत, क्यों अहम है पीएम मोदी का जालंधर दौरा
  • प्रधानमंत्री मोदी 1 फरवरी को संत रविदास जयंती पर जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां का दौरा करेंगे
  • डेरा सचखंड बल्लां के अनुयायी देश और विदेशों में लाखों में हैं और इसका प्रभाव पंजाब के बाहर भी फैला हुआ है
  • रविदास जयंती पर जालंधर में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और सभी प्रमुख दल इस अवसर पर आशीर्वाद लेने आते हैं
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जालंधर:

पीएम मोदी का 1 फरवरी को संत रविदास जयंती के अवसर पर जालंधर दौरा इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, डेरा सचखंड बल्लां, डेरा ब्यास और दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान जैसे धार्मिक स्थल पंजाब की राजनीति में बेहद अहम हैं. इन धार्मिक संस्थानों के अनुयायियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी की हार को जीत और जीत को हार में बदलने की क्षमता रखते हैं. यही वजह है कि चाहे नेता छोटा हो या बड़ा, यहां नतमस्तक होने का कोई अवसर नहीं छोड़ता.

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डेरा सचखंड बल्लां का देश‑विदेश में प्रभाव

अगर जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां की बात करें, तो इसके अनुयायियों की संख्या न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी लाखों में है. संत रविदास जी से जुड़े इस डेरे का प्रभाव महज पंजाब तक ही सीमित नहीं है. काशी को संत रविदास जी की जन्मस्थली माना जाता है, और इसी कारण वाराणसी में भी इनके अनुयायियों की धार्मिक और राजनीतिक जगत में गहरी पैठ है. ऐसा माना जाता है कि संत रविदास जी ने काशी को केवल एक धार्मिक नगर ही नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति का केंद्र भी बनाया.

रविदास जयंती पर आस्था और सियासत

संत रविदास जयंती के अवसर पर जालंधर में लाखों की संख्या में इस समुदाय से जुड़े लोग अपने परिवारों के साथ पहुंचते हैं. पूरा शहर और डेरा तक जाने वाले रास्ते श्रद्धालुओं से भर जाते हैं, रविदास जयंती का आयोजन कई हफ्तों तक चलता है. कांग्रेस, अकाली दल, बीजेपी, बसपा और आम आदमी पार्टी, हर राजनीतिक दल के शीर्ष नेता इस अवसर पर नतमस्तक होने की होड़ में रहते हैं. पंजाब में शायद ही कोई मुख्यमंत्री ऐसा रहा हो जिसने यहां हाजिरी न लगाई हो और जीत के लिए आशीर्वाद न मांगा हो. यह भी आम धारणा है कि जिस नेता या पार्टी पर डेरा प्रमुख का आशीर्वाद होता है, उसकी जीत लगभग तय मानी जाती है.

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पीएम मोदी के दौरे के क्या मायने

पीएम मोदी के इस दौरे को भी इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस अवसर पर पीएम मोदी न केवल रविदासिया समाज बल्कि पंजाब के लिए भी कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकते हैं. 1 फरवरी को जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी, संत रविदास जी से अपने जुड़ाव और दलित समुदाय, विशेषकर रविदास समाज के प्रति सम्मान और सीधे संवाद का संदेश देने जा रहे हैं. माघी पूर्णिमा और रविदास जयंती के आसपास का समय इस दौरे को और अधिक प्रतीकात्मक बनाता है.

धार्मिक स्थलों से जुड़ी पंजाब की राजनीति

पंजाब में किसी भी राजनीतिक दल के लिए धार्मिक‑सामाजिक स्थलों पर जाना हमेशा से विशेष महत्व रखता रहा है. इसे सकारात्मक और भावनात्मक राजनीति के संकेत के रूप में देखा जाता है, जो पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य में और भी अहम माना जाता है. संत रविदास जी की जयंती पर काशी और अन्य राज्यों के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाना यह दर्शाता है कि सरकार संत रविदास जी की विरासत को केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित न मानकर राष्ट्रीय स्तर पर देखती है.

दलित वोट और संतुलन साधने की राजनीतिक कोशिश

पंजाब और उत्तर भारत में दलित वोट हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहे हैं. पीएम मोदी का यह दौरा विश्वास निर्माण और राजनीतिक पहुंच को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है. कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह दौरा धार्मिक आस्था, दलित सम्मान, सामाजिक समरसता और राजनीतिक संदेश, तीनों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास माना जा रहा है.

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