नई दिल्ली:
- हमारा जोर माइक्रो कंटेनमेंट जोन, नाइट कर्फ्यू पर होना चाहिए. नाइट कर्फ्यू को कोरोना कर्फ्यू (Covid Curfews) की तरह प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि लोगों को बताया जा के कि महामारी अभी भी फैल रही है.
- हमें प्रोएक्टिव टेस्टिंग करनी होगी, यानी सिर्फ लक्षण के आधार पर नहीं बल्कि रैंडम टेस्टिंग भी तेज करनी होगी, ताकि बिना लक्षण वाले मरीजों को पहचाना जा सके. बिना लक्षण वाले मरीज पूरे परिवार को संक्रमित बना रहे हैं.
- कोरोना के कुल टेस्ट में से 70 फीसदी RT-PCR टेस्ट हों और यह सुनिश्चित किया जाए कि सैंपल सही तरीके से लिया जाए.हमें पॉजिटिविटी रेट (positivity rate)को 5 फीसदी के नीचे लाना है और मृत्यु दर को भी नियंत्रित रखना है. कोरोना से हुई मौतों का विश्लेषण कर डेटा हर पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए.
- हमें वैक्सीन की बर्बादी को बचाना है और प्राथमिकता के आधार पर खुराक देनी हैं. हमें11 से 14 अप्रैल के बीच टीकाकरण महोत्सव आयोजित करना चाहिए. हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका देने के साथ एक भी खुराक की बर्बादी नहीं होने देनी चाहिए.
- जो लोग कोरोना वायरस के प्रति लापरवाह हो रहे हैं, उन पर ध्यान दें और प्रशासनिक सुस्ती को भी दुरुस्त करें. राज्यों को सर्वदलीय बैठक बुलाना चाहिए और राज्यपालों को भी इसमें शामिल किया जाए. कोरोना को लेकर एक व्यापक जागरूकता अभियान की आवश्यकता है.
पूरी स्टोरी पढ़ें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
Prime Ministers Narendra Modi, Corona Meetings With Chief Ministers, Corona Testing Tracking Tracing, Night Curfew