- भारत में 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 से 3.60 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है
- मुंबई और कोलकाता में पेट्रोल दिल्ली से 9 से 11 रुपये प्रति लीटर ज्यादा महंगा बिक रहा है
- राज्यों द्वारा लगाए गए वैट, परिवहन लागत, डीलर कमीशन और स्थानीय टैक्सों के कारण तेल की कीमतों में अंतर होता है
15 मई को जब सुबह-सुबह लोगों की नींद खुली तो उनको पता चला कि पेट्रोल-डीजल 3 रुपये महंगा हो गया है. तेल कंपनियों ने दामों में 3 रुपये से लेकर 3.60 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे उनकी जेब पर बोझ और बढ़ गया है. वैसे तो सरकार ने 3 से 3.60 रुपये तक ही हर राज्य में बढ़ाए हैं लेकिन फिर भी कीमतें राजधानी दिल्ली की तुलना में हर जगह अलग-अलग हैं.
मुंबई और कोलकाता में दिल्ली से महंगा क्यों है पेट्रोल-डीजल?
जैसे मुंबई में पेट्रोल दिल्ली से 9 रुपये ज्यादा महंगा बिक रहा है. जबकि कोलकाता में यह दिल्ली से 11 रुपये महंगा है. कोलकाता में पेट्रोल सबसे ज्यादा महंगा हुआ है. यहां दाम 3.29 की बढ़त के साथ 108.74 रुपय प्रति लीटर बिक रहा है. जबकि डीजल 3.11 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 95.13 रुपये बिक रहा है.

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वैट,सेस और परिवहन लागत वाला गेम समझिए
आप सोच रहे होंगे कि शहर अलग होते ही तेल के दाम अलग कैसे हो गए. तो जान लें कि भारत के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल के दामों में अंतर होने की सबसे बड़ी वजह राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT/Value Added Tax) और परिवहन लागत (Freight Charges) है. केंद्र सरकार पूरे देश में एक समान एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) वसूलती है, लेकिन राज्य सरकारें अपने हिसाब से टैक्स (वैट) और सेस (Cess) तय करती हैं. यही वजह है कि महाराष्ट्र के मुंबई में पेट्रोल के दाम 3.10 महंगा होने के बाद 106.64 प्रति लीटर हो गए हैं. डीजल 3.11 रुपये बढ़कर 93.14 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.

15 मई 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट के दबाव की वजह से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है, इन प्रमुख पांच शहरों में टैक्स के गणित और नई दरों की पूरी स्थिति नीचे स्पष्ट की गई है.
इन शहरों में दामों के अंतर के 4 मुख्य कारण
प्रतिशत बनाम फिक्स्ड वैट: दिल्ली या यूपी में वैट मुख्य रूप से प्रतिशत आधारित है, जबकि मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में बेस रेट के ऊपर अतिरिक्त फिक्स्ड टैक्स या सेस (जैसे ₹5.12 या ₹11.52 प्रति लीटर) लगाया जाता है. यही कारण है कि कोलकाता और मुंबई में पेट्रोल का दाम ₹106–₹108 के पार है, जबकि दिल्ली में यह ₹98 के नीचे है.
डीलर कमीशन: अलग-अलग शहरों और शहरी/ग्रामीण इलाकों के आधार पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) का कमीशन भी थोड़ा अलग होता है (औसतन ₹2 से ₹4 प्रति लीटर).
परिवहन लागत: रिफाइनरी या तेल डिपो (Oil Depots) से पेट्रोल पंप की दूरी जितनी अधिक होगी, परिवहन का खर्च उतना ही बढ़ेगा. समुद्र तटीय शहरों (जैसे मुंबई/चेन्नई) और अंतर्देशीय शहरों (जैसे लखनऊ) के लॉजिस्टिक्स खर्च में अंतर आता है.
लोकल बॉडी टैक्स: कुछ राज्यों में नगर निगम या स्थानीय निकाय भी ईंधन के परिवहन पर छोटा चुंगी या एंट्री टैक्स लगाते हैं, जो अंतिम कीमत में जुड़ जाता है.
ईंधन की कीमत कैसे तय होती है?
अगर आसान भाषा में समझें, तो कच्चे तेल की बेस कीमत पर पहले परिवहन खर्च जुड़ता है. इसके बाद केंद्र सरकार अपनी एक्साइज ड्यूटी (पेट्रोल पर ₹19.90 और डीजल पर ₹15.80) जोड़ती है. इस कुल कीमत पर डीलर का कमीशन लगता है, और सबसे अंत में राज्य सरकारें अपना वैट (VAT) वसूलती हैं. क्यों कि वैट सबसे अंत में पूरी राशि पर लगता है, इसलिए राज्यों के टैक्स में जरा सा भी बदलाव अंतिम कीमत में ₹5 से ₹10 तक का बड़ा अंतर पैदा कर देता है.
केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी घटाई, लेकिन राज्यों ने नहीं दी राहत
भारत सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों पर तेल आयात के बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए 27 मार्च, 2026 से भले ही पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटा दी हो लेकिन राज्य सरकारों ने VAT और सेल्स टैक्स में कोई रियायत नहीं दी है. दरअसल राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले VAT/Sales Tax से हर साल लाखों करोड़ रुपये की कमाई होती है. इसीलिए, संकट के इस दौर में भी राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर ये टैक्स घटाने को तैयार नहीं हैं . बता दें कि केंद्र सरकार ने आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय कीमतों को देखते हुए तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए छोड़ने का फैसला किया था.
4 साल बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
आज से देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं. जबकि अप्रैल 2022 से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर थीं. हालांकि, मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों ईंधनों के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती की गई थी. लेकिन वैश्विक संकट के बीच ईंधन के दामों में बढ़ोतरी की गई है.
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