- दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि CJP ने 20 जुलाई के प्रदर्शन में अनुमति शर्तों का उल्लंघन किया
- प्रदर्शन में संसद की ओर मार्च किया गया, भीड़ ने बैरिकेड तोड़कर हिंसक प्रयास किए जिससे 240 पुलिसकर्मी घायल हुए
- पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग पंद्रह हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में दावा किया है कि कॉकरोज जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया और संसद की ओर मार्च करने के लिए लोगों को जुटाया. दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 14 अक्टूबर को सत्यापित और 15 अक्टूबर 2026 को दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा गया है कि 20 जुलाई 2026 को हुए प्रदर्शन के दौरान गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई थी. पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के मुताबिक कदम उठाए. यह मामला शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका और सुप्रीम कोर्ट में लंबित अवमानना कार्यवाही से संबंधित है. याचिका में 9 अक्टूबर 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया है. पुलिस के मुताबिक, विवाद का एक पहलू मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने से भी जुड़ा है.
20 जुलाई के प्रदर्शन में शर्तों का उल्लंघन!
हलफनामे के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 17 जून 2026 को जंतर-मंतर पर 20 जून को एक दिन के धरने के लिए आवेदन दिया था. पुलिस का कहना है कि निर्धारित स्थल पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी और आयोजकों ने लिखित आश्वासन भी दिया था. पुलिस के अनुसार, आश्वासन में अधिकतम 1,000 प्रदर्शनकारियों की सीमा, निर्धारित समय और स्थल का पालन, यातायात बाधित नहीं करने तथा जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च नहीं निकालने जैसी शर्तें शामिल थीं. हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि अभिजीत दीपके समेत अन्य सीजेपी नेताओं ने इन शर्तों का उल्लंघन किया. पुलिस का दावा है कि 20 जुलाई को संसद के सत्र के पहले दिन बिना अनुमति ‘चलो संसद' मार्च का आह्वान किया गया और 30,000 से अधिक लोग इलाके में जुट गए. पुलिस ने कहा कि भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने और संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश की.

240 से अधिक पुलिसकर्मी हुए थे घायल
दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरों और डंडों से हमला किया. पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के सुरक्षा उपकरण हटाए और उन्हें जमीन पर धकेला. हलफनामे में 240 से अधिक पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मियों के घायल होने का दावा किया गया है. पुलिस ने कहा कि हालात संभालने के लिए लगभग 15,000 पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा, जिनमें 3,750 महिला पुलिसकर्मी शामिल थीं. पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के कारण आम लोगों की आवाजाही, यातायात और सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित हुईं. इन घटनाओं के समर्थन में तस्वीरें और वीडियो भी हलफनामे के साथ संलग्न किए गए हैं.
अक्टूबर के प्रदर्शनों का भी दिया हवाला
दिल्ली पुलिस ने 6, 7 और 8 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों के दौरान भी कानून-व्यवस्था और यातायात संबंधी समस्याएं पैदा हुईं. हलफनामे के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान हिरासत में लेने के लिए इस्तेमाल की गई बसों में तोड़फोड़ की गई और उनके टायरों को नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने 7 अक्टूबर को 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के संबंध में केवल सूचना दी थी, अनुमति के लिए औपचारिक आवेदन नहीं किया था. इसके बाद 9 अक्टूबर को पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के आधार पर प्रदर्शन की सूचना स्वीकार नहीं की.

मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियों को बताया एहतियाती कदम
हलफनामे में कहा गया है कि 10 अक्टूबर को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस ने कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था. शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाए गए, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद घटाकर 45 कर दिया गया. पुलिस के अनुसार, दिल्ली में कुल 303 मेट्रो स्टेशन हैं और प्रतिबंध केवल लगभग 15 प्रतिशत नेटवर्क तक सीमित थे. हलफनामे में कहा गया है कि 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक पूरी मेट्रो सेवा बहाल हो गई थी. पुलिस ने दलील दी कि ये कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और संभावित हिंसा को रोकने के लिए उठाए गए थे.
ये भी पढ़े:- दीपके ने दिल्ली में फिर किया प्रदर्शन का ऐलान, अब 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क CP में लहराएंगे तिरंगा
दिल्ली पुलिस ने किया अवमानना नोटिस खारिज करने का आग्रह
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी की संसद मार्च की अनुमति देने से इनकार करना, प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लेना कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक था. ये कदम 'अनुरूप' हैं. ये सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए जरूरी कदम थे. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि पुलिस बल किसी ऐसे संगठन को कानून-व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दे सकता, जिसका कथित तौर पर 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान भीड़ की हिंसा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों के घायल होने की घटनाओं से संबंध था. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया. हलफनामे के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी और उसका उद्देश्य शांति एवं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना था. पुलिस ने अदालत से उसके खिलाफ जारी अवमानना नोटिस खारिज करने का अनुरोध किया है.
ये भी पढ़े:- '10 अक्टूबर को कोई ट्रेन कैंसिल नहीं हुई', DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं