महाराष्ट्र के सीनियर नेता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड मामले का फैसला 20 जून को आने वाला है. मुंबई की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट की तरफ से यह फैसला सुनाया जाएगा. जिसमें एनसीपी के पूर्व सांसद और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री डॉ. पद्मसिंह पाटिल मुख्य आरोपी हैं. फैसले के दौरान वह भी कोर्ट में मौजूद रहेंगे. पवनराजे निंबालकर के बेटे और ओमराजे निंबालकर भी अपने परिवार के साथ फैसले से पहले पुणे से मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं. ओमराजे वर्तमान में उस्मानाबाद लोकसभा सीट से UBT सांसद हैं. पवनराजे निंबालकर हत्याकांड महाराष्ट्र की राजनीति की सबसे बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है. उनकी हत्या जून 2006 में हुई थी.
कैसे हुई थी पवनराजे निंबालकर की हत्या
पवनराजे निंबालकर महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस के बड़े नेता माने जाते थे. उस्मानाबाद और उसके आसपास के जिलों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी. जबकि इसी इलाके में एनसीपी के सीनियर नेता पदमसिंह पाटिल का भी दबदबा माना जाता था. ऐसे में निंबालकर और पाटिल परिवार में सियासी अदावत चलती थी. 3 जून 2006 के दिन पवनराजे निंबालकर को जब उनका ड्राइवर समद काजी नवी मुंबई के कलंबोली कार से लेकर जा रहा था. तभी एक कार सवार कुछ लोगों ने उन्हें रोका और निंबालकर की गाड़ी पर हमला कर दिया. गोली लगने की वजह से पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी दोनों की मौत हो गई. जबकि हमलावर मौके से भाग गए थे.
पद्मसिंह पाटिल मुख्य आरोपी
पवनराजे निंबालकर की हत्या की जांच का मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था. इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री पद्मसिंह पाटिल को बनाया गया था. सीबीआई अपनी चार्जशीट में बताया था कि यह साजिश राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हुई थी. पवनराजे निंबालकर की हत्याकांड में मुख्य आरोपी एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री पद्मसिंह पाटिल को बनाया गया था. 2009 में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था. जांच में यह बात सामने आई थी कि पद्मसिंह पाटिल पवनराजे निंबालकर की उस्मानाबाद जिले में बढ़ती लोकप्रियता से अहसज होने लगे थे और खुद के राजनीतिक प्रभाव के लिए खतरा मानने लगे थे. ऐसे में पाटिल ने उनकी हत्या का कॉन्ट्रैक्ट 30 लाख रुपए में दिया था. हत्या को राजनीतिक मकसद बताया गया था.
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20 सालों तक चली सुनवाई
20 सालों तक इस मामले की सुनवाई चली थी. पहले 16 जून को इस मामले में फैसला आना था. लेकिन फिर कोर्ट ने इसे टाल दिया था और 20 जून की तारीख तय की है. आरोपी और पीड़ित परिवार दोनों ही हाई-प्रोफाइल हैं. ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में भी इस फैसले का असर पड़ना तय है. लेकिन इस फैसले से महाराष्ट्र का एक बड़ा मामला खत्म हो जाएगा.
ओमराजे निंबालकर क्यों चर्चा में हैं
दरअसल, इसे संयोग ही माना जा सकता है कि कि यूबीटी सांसद ओमराजे निंबालकर के पिता पवनराजे निंबालकर की हत्या के मामले का फैसला ऐसे वक्त में आ रहा है, जब उनकी महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे का गुट छोड़कर एकनाथ शिंदे वाले गुट में जाने की चर्चा चल रही है. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि ओमराजे को यह भरोसा दिलाया गया है कि फैसला उनके पक्ष में आएगा. हालांकि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मैं अपने पिता की हत्या का केस पिछले 20 सालों से लड़ रहा हूं. मामला न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में कोई फैसला कैसे बदल सकता है. वहीं शिंदे गुट में जाने पर ओमराजे निंबालकर ने कहा कि इस बात का जवाब में अपने लोकसभा क्षेत्र में जाकर अपनी जनता को दूंगा.
पवनराजे और पद्मसिंह थे रिश्तेदार
बता दें कि पवनराजे निंबालकर और पद्मसिंह पाटिल करीबी रिश्तेदार हुआ करते थे. लेकिन धीरे-धीरे दोनों परिवारों में राजनीतिक मतभेद बढ़ना शुरू हो गए थे. जिसके बाद पवनराजे ने 2004 में कांग्रेस का दामन थाम लिया था. जबकि पद्मसिंह पाटिल एनसीपी में रहे थे. 2004 में दोनों नेता विधानसभा चुनाव में आमने-सामने भी थे. जहां पद्मसिंह पाटिल कड़ी चुनावी टक्कर में पवनराजे से 484 वोटों से चुनाव जीते थे. बाद में 2006 में उनकी हत्या हो गई थी. जिसके बाद उनके बेटे ओमराजे राजनीति में एक्टिव हुए थे. जहां ओमराजे ने विधानसभा चुनाव में पद्मसिंह पाटिल के बेटे राणा जगजीतसिंह पाटिल को हराया था और विधायक बने थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में वह उद्धव गुट की तरफ से उस्मानाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे और जीत हासिल की थी. अब वह उन सांसदों में शामिल हैं जो शिंदे गुट में विलय कर रहे हैं.
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