- सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की का मक्का रक्षा समझौता अपनी पहली परीक्षा में फेल
- यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जाजान में अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया
- लेकिन समझौते में शामिल देशों ने इसके खिलाफ सामूहिक रूप से जवाब देने का संकल्प व्यक्त नहीं किया, कोई बयान नहीं
क्या 'मुस्लिम नाटो' अपने पहले ही टेस्ट में फेल हो गया है? सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मिलकर जिस नए रक्षा समझौते को बड़ी ताकत और एक-दूसरे की सुरक्षा की गारंटी के तौर पर पेश किया था, उसकी पहली बड़ी परीक्षा में ही सवाल खड़े हो गए हैं. ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जाजान में अरामको की रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला कर दिया, लेकिन इस हमले के बाद नए बने गठबंधन की तरफ से न तो कोई साफ सैन्य जवाब दिखा और न ही हमलावरों को कोई खुली सैन्य धमकी दी गई. जेरूसलम पोस्ट में छपे एक विश्लेषण में इसे इस नए समझौते की पहली बड़ी परीक्षा में नाकामी जैसा बताया गया है.
दरअसल जाजान की अरामको रिफाइनरी में रविवार सुबह आग लग गई थी. हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उनके संगठन ने रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि यह हमला सऊदी अरब के सादा और हज्जाह प्रांतों में की जा रही सऊदी ड्रोन कार्रवाई के जवाब में किया गया. बाद में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की. मंत्रालय ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है.
क्या है मुस्लिम नाटो?
यह समझौता शुक्रवार, 7 अगस्त को सऊदी अरब के मक्का में हुआ था. इसे आधिकारिक तौर पर मक्का रक्षा समझौता नाम दिया गया लेकिन कई एक्सपर्ट इसे मुस्लिम नाटो भी कह रहे हैं. इस पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे. तीनों देशों की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में इसकी जानकारी दी गई थी. इस समझौते के मुताबिक, अगर तीनों में से किसी एक देश पर हथियारों से हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. इस मामले में यह ठीक नाटो गठबंधन की तरह है.
भारत का क्या स्टैंड है?
भारत ने कहा है कि वह पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए इस नए मक्का रक्षा समझौते के असर की जांच कर रहा है, उसे स्टडी कर रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस समझौते पर भारत का रुख बताया. उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है. उन्होंने साफ किया कि भारत इस नए समझौते के अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता पर पड़ने वाले असर को देख रहा है.
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए जरूरत पड़ने पर सभी जरूरी कदम उठाएगा. भारत का कहना है कि वह इस समझौते के असर को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के नजरिए से भी देख रहा है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं