एनडीए सरकार ने संसद के मॉनसून सत्र से पहले संसद और विधानसभाओं में महिलों के लिए एक-तिहाई आरक्षण की सुविधा देने से जुड़े महिला आरक्षण कानून को लागू करने और देश में परिसीमन के नए प्रारूप से जुड़े संविधान संसोधन बिल के पक्ष में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कवायद तेज कर दी है. सरकार की नजर डीएमके जैसे विपक्षी दल पर है, जो तमिल नाडु में टीवीके सरकार के गठन के बाद से कांग्रेस से दूरी बना रही है.
सियासी गलियारों में मॉनसून सत्र शुरू से पहले डीलिमिटेशन से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर डीएमके के संभावित रुख को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
रविवार को डीएमके संसदीय दल के नेता टीआर बालू ने सर्वदलीय बैठक में कहा, "महिला आरक्षण कानून को लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के तहत ही लागू किया जा सकता है. हमें नहीं पता कि सरकार परिसीमन विधेयक के संबंध में क्या खास प्रस्ताव लाना चाहती है. हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है."
डीएमके का क्या रुख?
मीटिंग के बाद NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में डीएमके के सीनियर लीडर और राज्य सभा सांसद तिरुचि शिवा ने कहा, "अगर नए प्रस्तावित डीलिमिटेशन प्रोसेस से दक्षिणी राज्यों के हितों पर असर पड़ता है, तो हम संविधान संशोधन विधेयक का कभी समर्थन नहीं करेंगे. हमारा प्रतिनिधित्व घटना नहीं चाहिए."
उन्होंने आगे कहा, "हमें डर है कि अगर दूसरे राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ता है, तो हमारी अहमियत कम हो जाएगी. उपराष्ट्रपति का चुनाव इसका एक अच्छा उदाहरण है. चेन्नई में एमके स्टालिन की अध्यक्षता में दक्षिण के मुख्यमंत्रियों की जो बैठक हुई थी, उसमें ये प्रस्ताव पारित किया गया था कि लोकसभा की सीटें 25 साल के लिए फ्रीज की जा सकती हैं."
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क्या बोले रिजिजू?
मीटिंग के बाद संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों को सरकार ने बताया है कि फिलहाल उसके एजेंडे में 8 बिल हैं, जिसमें 5 नए बिल शामिल हैं.
मॉनसून सत्र में डीलिमिटेशन बिल जाए जाने से जुड़े सवाल पर किरेन रिजिजू ने कहा, "हमने संसदीय बुलेटिन में 8 बिल लाने की जानकारी दी है. अगर और कोई बिल आएगा तो बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में हम इस पर चर्चा करेंगे, बीएसी को जरूर सूचित करेंगे."
उन्होंने आगे कहा, "सरकार कुछ छुपाना नहीं चाहती है. देश के लोग चाहते हैं कि संसद में कामकाज हो. आज हमने सभी की बात सुनी है. मेरी गुजारिश है कि विपक्ष अपनी बात रखे लेकिन संसद को बंद करने की कोशिश ना करे. इससे संसद की गरिमा को चोट पहुंचेगी."
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