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27,000 करोड़ का एयरपोर्ट प्रोजेक्ट क्यों रद्द हुआ, अब चेन्नई का दूसरा एयरपोर्ट कहां और कैसे बनेगा?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 27,000 करोड़ रुपये की Parandur Airport Project को रद्द कर दिया है. किसानों के 1000 दिन लंबे विरोध, पर्यावरणीय चिंताओं और चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत के बीच यह फैसला क्यों लिया गया? पढ़ें पूरी कहानी.

27,000 करोड़ का एयरपोर्ट प्रोजेक्ट क्यों रद्द हुआ, अब चेन्नई का दूसरा एयरपोर्ट कहां और कैसे बनेगा?

27,000 करोड़ रुपये का एयरपोर्ट प्रोजेक्ट, केंद्र की मंजूरियां, 1,700 एकड़ जमीन का अधिग्रहण और सालाना 10 करोड़ यात्रियों को संभालने की योजना. सब कुछ लगभग ट्रैक पर था, लेकिन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के एक फैसले ने पूरे खेल को बदल दिया. तमिलनाडु सरकार ने विवादित परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को रद्द कर दिया है. यह फैसला उन हजारों किसानों और ग्रामीणों की बड़ी जीत माना जा रहा है जो तीन साल से ज्यादा समय से अपनी जमीन और जलस्रोत बचाने के लिए 1000 दिनों से आंदोलन कर रहे थे.अब बड़ा सवाल यह है कि परंदूर के बाद चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट का क्या होगा? इस सवाल का जवाब इसलिए भी जरुरी हो जाता है क्योंकि खुद सरकार का मानना है कि चेन्नई को दूसरे एयरपोर्ट की सख्त जरूरत है

क्या थी परंदूर एयरपोर्ट परियोजना?

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने आधिकारिक तौर पर परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को रद्द करने की घोषणा कर दी. यह फैसला उन्होंने चुनाव से पहले स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से किए गए वादे को पूरा करते हुए लिया. विजय ने साफ कहा कि वह औद्योगिक विकास और एयरपोर्ट की जरूरत के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन परंदूर में एयरपोर्ट बनाना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जल्द ही नए एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक स्थान की घोषणा करेगी और तब तक मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट के विस्तार पर काम किया जाएगा.

परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पर चर्चा की अनुमति नहीं मिलने के विरोध में सदन से वॉकआउट करने के बाद मीडिया से बात करते DMK विधायक

परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पर चर्चा की अनुमति नहीं मिलने के विरोध में सदन से वॉकआउट करने के बाद मीडिया से बात करते DMK विधायक

उधर एयरपोर्ट परियोजना रद्द करने के ऐलान के बाद तमिलनाडु विधानसभा में जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला. विपक्षी DMK के विधायकों ने इस फैसले पर चर्चा की मांग की, लेकिन स्पीकर जेसी.डी.प्रभाकर ने नियम 110 का हवाला देते हुए चर्चा की अनुमति नहीं दी. उनका कहना था कि मुख्यमंत्री या मंत्री द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान पर बहस नहीं हो सकती. इसके बाद DMK विधायकों ने विरोध में सदन से वॉकआउट कर दिया.

परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट कैसे आगे बढ़ना था?

परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को तमिलनाडु की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक माना जा रहा था.इस एयरपोर्ट की अंतिम क्षमता सालाना 10 करोड़ यात्रियों (100 मिलियन) को संभालने की थी. प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक इसकी अनुमानित लागत करीब 27 हजार करोड़ रुपये थी. परियोजना को चार चरणों में पूरा किया जाना था. पहले चरण पर ही 13,854 करोड़ रुपये खर्च होने थे.एयरपोर्ट के निर्माण के लिए कांचीपुरम और श्रीपेरंबुदूर क्षेत्र के करीब 20 गांवों में फैली 5,369 एकड़ जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित था. परियोजना रद्द होने से पहले करीब 1,700 एकड़ भूमि अधिग्रहित भी की जा चुकी थी. केंद्र सरकार से कई जरूरी मंजूरियां और साइट क्लीयरेंस भी मिल चुके थे.एयरपोर्ट के साथ-साथ मेट्रो कनेक्टिविटी, नई सड़कें और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की भी योजना थी.

ग्रामीणों और किसानों का विरोध क्यों था?

2022 में तत्कालीन DMK सरकार द्वारा परियोजना की घोषणा के बाद से ही स्थानीय किसान और ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे थे. विशेष रूप से एकनापुरम और आसपास के गांवों के लोगों ने 1,000 दिनों से अधिक समय तक आंदोलन चलाया. ग्रामीणों का कहना था कि उनकी लड़ाई सिर्फ मुआवजे की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व की है. परियोजना के खिलाफ सबसे बड़ा तर्क पर्यावरण और कृषि से जुड़ा था.

परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को स्पेशल प्रोजेक्ट घोषित किए जाने के तमिलनाडु सरकार के फैसले के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संगठनों ने नई चिंताएं जताई थीं

परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को 'स्पेशल प्रोजेक्ट' घोषित किए जाने के तमिलनाडु सरकार के फैसले के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संगठनों ने नई चिंताएं जताई थीं

जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट के लिए चिन्हित 5,369 एकड़ जमीन में लगभग 47.6 फीसदी हिस्सा सिंचित कृषि भूमि था, जहां साल में तीन फसलें उगाई जाती हैं. इतना ही नहीं, परियोजना क्षेत्र का करीब 25 फीसदी हिस्सा झीलों, नहरों और अन्य जलस्रोतों से ढका हुआ था. स्थानीय लोगों का कहना था कि इन जल निकायों और वेटलैंड्स पर रनवे बनाने से इलाके का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा. उनका यह भी तर्क था कि चेन्नई में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या के पीछे नेचुरल जलस्रोतों का खत्म होना भी अहम वजह है.

विजय ने क्यों लिया यह फैसला?

परंदूर आंदोलन विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था. जनवरी 2025 में विजय खुद कांचीपुरम पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से मिले थे. उस समय उन्होंने कहा था कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर होने वाले विकास का समर्थन नहीं करेंगे. अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने उसी वादे को सरकारी नीति का रूप दे दिया है. सरकार का कहना है कि परंदूर की पारिस्थितिक संवेदनशीलता एयरपोर्ट निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं है.

25 साल पुरानी है दूसरे एयरपोर्ट की तलाश

दिलचस्प बात यह है कि चेन्नई के लिए दूसरे एयरपोर्ट की तलाश कोई नई कहानी नहीं है.यह प्रयास 1999 में शुरू हुआ था. पिछले 25 वर्षों में श्रीपेरंबुदूर समेत कई स्थानों को विकल्प के तौर पर देखा गया, लेकिन भूमि अधिग्रहण की लागत और कानूनी अड़चनों के कारण योजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं. 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के बाद बड़े स्तर पर जमीन हासिल करना और मुश्किल हो गया.
 

परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना के खिलाफ मुख्यमंत्री विजय के रुख का समर्थन करते हुए कांचीपुरम के एकनापुरम गांव के लोगों ने सर्वसम्मति से धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया

परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना के खिलाफ मुख्यमंत्री विजय के रुख का समर्थन करते हुए कांचीपुरम के एकनापुरम गांव के लोगों ने सर्वसम्मति से धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया

चेन्नई को दूसरे एयरपोर्ट की जरूरत क्यों?

हालांकि परंदूर परियोजना रद्द हो गई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि चेन्नई को जल्द या देर से दूसरा एयरपोर्ट चाहिए. रियल एस्टेट डेवलपर्स की संस्था CREDAI ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि शहर की हवाई क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो चेन्नई कई बड़े कारोबारी निवेश और आर्थिक अवसर खो सकता है. मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाकर 3.5 करोड़ यात्रियों सालाना तक ले जाने की तैयारी चल रही है. इसके बावजूद विशेषज्ञों और सरकारी अनुमानों के मुताबिक 2028 से 2032 के बीच एयरपोर्ट अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंच सकता है.

मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट के सामने क्या चुनौतियां हैं?

चेन्नई के मीनंबक्कम एयरपोर्ट का विस्तार करना आसान नहीं है. सबसे बड़ी चुनौती तो रनवे को ही लेकर है. यहां इसे बढ़ाने के लिए सीमित जगह ही है क्योंकि एयरपोर्ट के चारों ओर घनी आबादी बसी हुई है. रनवे में बढ़ोतरी नहीं होने की वजह से एयरपोर्ट को पीक आवर्स में भारी स्लॉट कंजेशन का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा यहां विमानों  पार्क करने की जगह भी बेहद कम है. एक अहम तथ्य ये है कि चेन्नई एयरपोर्ट पर इंटरनेशनल कार्गो भी भारी मात्रा में आता है लेकिन मौजूदा एयरपोर्ट इस दवाब को झेल पाने में सफल नहीं हो रहा है.  इन्हीं वजहों से लंबे समय से यहां दूसरे एयरपोर्ट की मांग उठती रही है.

अब आगे क्या होगा?

परंदूर परियोजना रद्द होने के बाद तमिलनाडु सरकार को नए सिरे से दूसरे एयरपोर्ट के लिए जमीन तलाशनी होगी. मुख्यमंत्री विजय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसी जगह चुनी जाए जहां उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण न्यूनतम हो और लोगों की जमीन, घर और आजीविका पर कम से कम असर पड़े.जब तक नया स्थान तय नहीं हो जाता, तब तक सरकार का पूरा फोकस मौजूदा चेन्नई एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने पर रहेगा.
 

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