- ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर जयपुर में सेना के तीनों अंगों के अधिकारियों ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
- वायुसेना की ओर से डीजी-एयर ऑपरेशंस एयर मार्शल एके भारती ने कहा कि भारत की कार्रवाई सटीक और संतुलित थी.
- नेवी के डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि भारत ने परमाणु धमकी की हवा निकाल दी.
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सेना की ओर से बड़ा बयान सामने आया है. राजस्थान के जयपुर में सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई. मीडिया को ऑपरेशन सिंदूर के समय सेना के तीनों अंगों के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन ने संबोधित किया. थल सेना की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इसे सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़ा रणनीतिक मोड़ बताया. उन्होंने कहा कि भारत ने इस ऑपरेशन में नई सोच दिखाई. सेना ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार जाकर आतंकियों को निशाना बनाया. जनरल घई के मुताबिक, सरकार के शुरू से ही साफ आदेश दिए थे. लक्ष्य था आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को खत्म करना. उन्होंने बताया कि सेनाओं को पूरी आजादी और जरूरी संसाधन दिए गए थे. यही कारण था कि ऑपरेशन सिंदूर को पूरी ताकत से अंजाम दिया गया.
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं है. यह आतंकवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई की शुरुआत है. भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करता रहेगा.

ताकत के साथ खुफिया तंत्र का भी सटीक इस्तेमाल
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव ने तीनों सेनाओं के तालमेल पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि यह एक संयुक्त ऑपरेशन था. भारत लगातार अपनी तीनों सेनाओं को एक जॉइंट कमांड से जोड़ने पर काम कर रहा है. तीनों सेनाओं के काम करने का तरीका, बातचीत आदि कि भाषा अलग-अलग होती है, इसलिए ये जरूरी है कि एक सिंगल कमांड हो. इसे थिएटर कमांड कहा जाता है. यही वजह थी कि थल, वायु और नौसेना ने इस ऑपरेशन में मिलकर काम किया.
इस ऑपरेशन में सिर्फ ताकत ही नहीं बल्कि खुफिया तंत्र का भी इस्तेमाल किया गया. टेररिस्ट कैंप की सटीक लोकेशन ढूंढने और उन पर हमला करने में खुफिया जानकारी ने अहम भूमिका निभाई. DGMO ने बताया कि खुफिया जानकारी और तेजी से लिए गए फैसले इस ऑपरेशन में सबसे अहम रहे. यही वजह थी कि इस हमले से दुश्मन चौंक गया.
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सटीक और संतुलित कार्रवाई, सेनाओं को थी पूरी छूट
वहीं वायुसेना की ओर से डीजी-एयर ऑपरेशंस एयर मार्शल एके भारती ने भी संबोधित किया. उन्होंने पहलगाम हमले को बेहद दुखद बताया. उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए, कम है. उन्होंने कहा कि मारे गए लोगों को वापस नहीं लाया जा सकता है. हालांकि ऐसी घटना दोबारा न हो, यह सुनिश्चित करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि भारत की कार्रवाई सटीक और संतुलित थी. सेनाओं का लक्ष्य साफ था और सेना को पूरी छूट दी गई थी. उन्होंने कहा कि भारत की लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ है. इसलिए हर हमले से पहले ये आकलन कर सुनिश्चित किया गया कि आम लोगों की जान न जाए. उन्होंने बताया कि जब पाकिस्तान ने आतंकियों का साथ दिया, तो जवाब देना जरूरी था. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने तब रुकने का फैसला लिया, जब पाकिस्तान की ओर से अनुरोध आया.

ऑपरेशन सिंदूर में दिखी तीनों सेनाओं की एकजुटता
एयर मार्शल भारती के मुताबिक सेना ने इस ऑपरेशन से कई सबक सीखे. एयर पावर की अहम भूमिका फिर से साबित हुई. यही वजह थी कि भारत ने पाकिस्तान के 13 लड़ाकू विमान तबाह किए. इनमें सबसे अहम पाकिस्तान का अवाक्स विमान था जिसे S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने 300 किलोमीटर से भी अधिक दूरी से निशाना बनाया. साथ ही इस ऑपरेशन में तीनों सेनाओं की एकजुटता भी मजबूत दिखी. यह ऑपरेशन भारत की ताकत, जिम्मेदारी और संयम का उदाहरण बना. एयर मार्शल भारती ने बताया कि कि ऑपरेशन सिंदूर महज एक शुरुआत है. आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई आगे जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि जब शांति की हमारी इच्छा को हमारी कमजोरी मान लिया जाता है और हमारी चुप्पी को हमारी अनुपस्थिति समझा जाता है, तो फिर कार्रवाई करने के अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नही बचता. जब हम कार्रवाई करते हैं, तो वह अधूरी नही होता.

पाकिस्तानी नौसेना रक्षात्मक रुख अपनाने को मजबूर
इसके अलावा इंडियन नेवी की ओर से डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस, वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान की परमाणु वाली धमकी की हवा निकाल दी. जिस तरह भारत ने पाकिस्तान के अंदर मौजूद आतंकी ठिकानों पर लंबी दूरी के सटीक हथियारों से हमला किया उससे साफ था कि एटमी ब्लैक मेकिंग की आड़ में आतंकवाद नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने कहा यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की नई सोच, तेज जवाबी क्षमता और तीनों सेनाओं के तालमेल का जबरदस्त उदाहरण था. ऑपरेशन के दौरान डीजी ऑपरेशंस ने यह भी कहा कि नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में अपने कैरियर बैटल ग्रुप, फ्रंटलाइन युद्धपोत, सबमरीन, समुद्री निगरानी विमान को जिस तेजी के साथ तैनात किया, उससे पाकिस्तानी नौसेना रक्षात्मक रुख अपनाने के मजबूर हो गई.
पाकिस्तान के 13 विमान ढेर, मलबे में बदले 11 एयरबेस
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सेना के इन बयानों ने साफ कर दिया है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति बदल चुका है. यह ऑपरेशन सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि दुश्मन को दिया गया एक स्पष्ट संदेश था कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. तीनों सेनाओं के तालमेल, सटीक खुफिया जानकारी और तेज फैसलों ने यह दिखाया कि भविष्य की लड़ाइयों के लिए भारत अब पहले से ज्यादा तैयार है. सेना के अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर एक अध्याय का अंत नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ लंबी और निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है. पाकिस्तानी आर्मी चीफ भले ही खुद को प्रमोशन दे दें, लेकिन सच्चाई यही है कि पाकिस्तान के 13 विमान और 11 एयरबेस मलबे में बदल गए थे.
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