- ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने कहा कि आतंकवाद के लिए अब कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं बची है
- ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से नौ सटीक प्रिसिजन स्ट्राइक कीं
- ऑपरेशन सिंदूर को पिछले पचास वर्षों में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत का सबसे बड़ा सैन्य अभियान बताया गया है
पहलगाम हमले के आतंकियों को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सबक सिखाया था, आज उसी ऑपरेशन सिंदूर को एक साल हो गया है. ऑपरेशन ‘सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने साफ कहा कि आतंक के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह अब नहीं बची है और यह अभियान सिर्फ शुरुआत था. जयपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायु सेना, नौसेना और थल सेना के सैन्य संचालन प्रमुखों ने ऑपरेशन ‘सिंदूर' के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से बताया. इसे सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान को जवाब देने वाला पिछले पचास वर्षों में भारत का सबसे बड़ा सैन्य अभियान बताया गया.
‘यह अंत नहीं, सिर्फ शुरुआत'
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं था, बल्कि यह सिर्फ शुरुआत थी.” उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के तहत भारत ने अपने पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ते हुए नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि यह अभियान देश के संकल्प, जवाबदेही और रणनीतिक संयम का प्रतीक था. इसे पूरी सटीकता, संतुलन और स्पष्ट उद्देश्य के साथ अंजाम दिया गया. उन्होंने कहा, “भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा के लिए दृढ़ता और जिम्मेदारी के साथ कदम उठाता रहेगा.”
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ऑपरेशन सिंदूर में दिखा तीन सेनाओं का दम
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर भी तीनों सेनाओं का ज्वॉइंट ऑपरेशन था. इसने ज़मीन, हवा और समुद्री क्षमताओं को साझा स्थितिगत जागरूकता, एक समान ऑपरेशन और खुफिया जानकारी और वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता के साथ काम किया. कुल 9 'स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक' की गईं, जिनमें से 7 भारतीय सेना ने और 2 भारतीय वायु सेना ने कीं. इन स्ट्राइक्स का समय एकदम सटीक था, इन्होंने पूरी तरह से चौंका दिया और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू और कश्मीर के अंदरूनी इलाकों और पाकिस्तान के मुख्य भूभाग में स्थित हर स्थापित ठिकाने को अधिकतम नुकसान पहुंचाया. इसके ज़रिए यह संदेश दिया गया कि अब कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है..."
ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल पूरा होने पर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, "... अनजाने में ही, उनकी सम्मान और पुरस्कारों की सूची, जो इंटरनेट पर जारी हुई थी, उससे हमें पता चला कि उनमें से कई पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए थे. नियंत्रण रेखा पर हुई झड़पों में उन्हें जो नुकसान उठाना पड़ा, उसमें उन्होंने 100 से ज़्यादा सैनिक खो दिए... अगर पाकिस्तानी अपनी लड़ाई लड़ने की क्षमता में उतना ही निवेश करते, जितना वे अपनी कहानी गढ़ने में करते हैं, तो मुझे लगता है कि वे कहीं ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन करते, यह एक ऐसी सलाह है जिसे वे मान सकते हैं."
पाकिस्तान में कोई जगह सुरक्षित नहीं
राजीव घई ने यह भी कहा कि ऑपरेशन ‘सिंदूर' ने यह साफ कर दिया कि पाकिस्तान में कोई आतंकी ठिकाना सुरक्षित नहीं है. उन्होंने बताया कि इस जटिल बहु-आयामी ऑपरेशन की योजना, क्रियान्वयन और निष्पादन बेहद कम समय में सफलतापूर्वक पूरा किया गया. वहीं, उस समय वायु संचालन के महानिदेशक रहे एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा कि इस ऑपरेशन ने वायु शक्ति की प्रमुख भूमिका को दोबारा साबित किया. 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, उसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन ‘सिंदूर' शुरू किया था.
जब पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने किए नष्ट
इसके तहत पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर एकदम सटीक एयर स्ट्राइक की गई थी. इस कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया था. पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि भारतीय सेना ने अधिकांश हमलों को नाकाम कर दिया. आखिरकार दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन पर बातचीत के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बन गई और इस तरह टकराव का अंत हुआ.
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