- भारतीय सेना ने श्रीलंका के कैंडी जिले में केवल एक दिन में सौ फीट लंबा बेली ब्रिज बनाया है
- नया पुल सेंट्रल प्रांत को उवा प्रांत से जोड़ता है, इससे आम लोगों को काफी राहत हुई है
- सेना ने खराब मौसम में पुल के साथ सड़क निर्माण भी किया, जिससे राहत सामग्री की आपूर्ति सुगम हुई
मात्र एक दिन में भारतीय सेना ने श्रीलंका में 100 फीट लंबा बेली ब्रिज बना डाला . सेना के इंजीनियरों ने यह कमाल कैंडी जिले में कर दिखाया है . यह पुल बी-492 हाईवे पर बना हैं . यह कैंडी के सेंट्रल प्रांत को उवा प्रांत से जोड़ता है . इससे पहले पुराने पुल से लोगों को चार घंटे का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था . अब यह नया पुल बनने के बाद यह सफर करीब दो घंटे में ही पूरा होने लगा है.
सेना ने श्रीलंका के लोगों के लिए यह अदभुत काम पहाड़ी इलाके में खराब मौसम के दौरान किया. सेना ने वहां केवल पुल ही नहीं बनाया बल्कि सड़क का निर्माण भी किया है . भारतीय सेना ने श्रीलंका में ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसकी तारीफ की जाए उतनी कम है.
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श्रीलंका में आये भीषण चक्रवात और उसके बाद हुए भूस्खलन से वहां की सड़कें और पुल बुरी तरह टूट गए थे. कई इलाकों में लोगों का आना-जाना, राहत सामग्री की आपूर्ति और जरूरी सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गई थीं. ऐसे मुश्किल समय में भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए ऑपरेशन सागर बंधु के तहत सैन्य इंजीनियरों को श्रीलंका भेजा.

इससे पहले, भारतीय सेना ने जाफना इलाके में भी ए-35 हाईवे पर 120 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाया था. इससे कई दिनों से बंद रास्ता फिर से खुल गया. पुल बनने से राहत सामग्री, मशीनरी और जरूरी सेवाओं की आवाजाही तेज हो गई और प्रभावित लोगों को बड़ी राहत मिली. पुल बनाने से पहले दोनों किनारों को मजबूत किया गया और आधुनिक तकनीक जैसे स्वदेशी ड्रोन और लेजर उपकरणों का इस्तेमाल किया गया . इससे काम तेजी और सुरक्षित तरीके से हो सका.
भारत कई स्तरों पर कर रहा है श्रीलंका की मदद
भारत ने सिर्फ पुल ही नहीं बनाए, बल्कि श्रीलंका को बड़े पैमाने पर राहत भी पहुंचाई है. भारत ने करीब 1100 टन राहत सामग्री, दवाइयां और मेडिकल उपकरण भेजे. इलाज के लिए भारतीय सेना की मेडिकल टीम ने फील्ड अस्पताल लगाकर हजारों लोगों का इलाज किया. गंभीर मरीजों की सर्जरी भी की गई और महिलाओं व बच्चों की खास देखभाल की गई.
वही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने श्रीलंका को 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण सहायता पैकेज की घोषणा की, जिसमें रियायती कर्ज और अनुदान दोनों शामिल हैं. यह मदद श्रीलंका में सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को दोबारा खड़ा करने के लिए दी जा रही है. ऑपरेशन सागर बंधु के जरिए भारत ने यह साबित किया है कि वह सिर्फ पड़ोसी देश भर नहीं, बल्कि जरूरत के समय एक भरोसेमंद साथी भी है. भारतीय सेना की तेज और प्रभावी कार्रवाई से श्रीलंका में हालात सामान्य होने लगे हैं और भारत की नेबरहुड फर्स्ट और “वसुधैव कुटुंबकम” की नीति को मजबूती मिली है.
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