- भारत ने पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिकी सरकार और सांसदों से भारतीय को रोकने की बार-बार गुजारिश की थी
- पाकिस्तान के राजनयिकों और डिफेंस अटैची ने अमेरिकी अधिकारियों से 66 बार मीटिंग के लिए गुजारिश की थी
पाकिस्तान के आतंकियों ने जब पहलगाम में आतंकी हमला किया तो भारत ने जवाब ऑपरेशन सिंदूर चलाकर दिया. पाकिस्तान को चोट अंदर तक लगी थी. आतंकवाद के खिलाफ भारत ने करारी चोट देने की कसम खाई थी और पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया. पाकिस्तान बचने का रास्ता खोज रहा था और वह अपनी फरियाद लेकर अमेरिका के पास बार-बार गया था. इसका एक बड़ा सबूत सामने आ चुका है. अमेरिका में पाकिस्तान की पैरवी के नए सबूतों से पता चला है कि वाशिंगटन में बैठे पाकिस्तानी राजनयिकों और डिफेंस अटैची ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत से लेकर सीजफायर के लागू होने तक, अमेरिकी सरकार और वहां के सांसदों के साथ 60 से अधिक बार बैठकें करने की गुजारिश की थी.
यह सबूत बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के गुस्से का सामना करने के बाद पाकिस्तान अमेरिकी हस्तक्षेप के लिए बेताब था. NDTV के हाथ लगे डॉक्यूमेंट्स से संकेत मिलता है कि अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत और डिफेंस अटैची ने ईमेल और कॉल के माध्यम से कुल 66 अमेरिकी सरकार के अधिकारियों, सांसदों और मीडिया से अमेरिकी हस्तक्षेप की मांग की और भारत के सैन्य अभियान को किसी तरह रोकने की मांग की.



इससे पहले नवंबर 2025 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट दी थी कि पाकिस्तान ने ट्रंप के अपनी बात जल्दी पहुंचाने और अपने अनुकूल डील हासिल करने के लिए 6 लॉबिंग फर्मों के साथ 5 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष के अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर हस्ताक्षर किए हैं. पाकिस्तान द्वारा सेडेन लॉ एलएलपी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ सप्ताह बाद ही ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर की मेजबानी की. उनके साथ लंच किया था.
बता दें कि जो सेडेन लॉ एलएलपी ने जेवलिन एडवाइजर्स को उपठेका दिया था, जो एक सरकारी रिलेशन वेंचर है.
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