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Bee Corridor Project: हाईवे बनेंगे मधुमक्खियों के घर! NHAI ओडिशा में लॉन्च करेगा नया ग्रीन मिशन

NHAI ओडिशा में ‘बी कॉरिडोर प्रोजेक्ट’ शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत हाईवे किनारे 20 हजार फूलदार पौधे लगाए जाएंगे. इस पहल का उद्देश्य मधुमक्खियों को सुरक्षित आवास देना, जैव विविधता बढ़ाना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है. यह ग्रीन मिशन किसानों के लिए भी फायदेमंद होगा.

Bee Corridor Project: हाईवे बनेंगे मधुमक्खियों के घर! NHAI ओडिशा में लॉन्च करेगा नया ग्रीन मिशन
प्रतीकात्मक तस्वीर. (AI)
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Bee Corridor Project India: अब हाईवे सिर्फ गाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए भी काम करेंगे. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ओडिशा में एक अनोखा और पर्यावरण के लिए अहम कदम उठाने जा रही है. जून 2026 से शुरू होने वाला ‘बी कॉरिडोर प्रोजेक्ट' इस दिशा में एक बड़ा प्रयोग है, जहां सड़कों के किनारे मधुमक्खियों का घर बसाया जाएगा. इसका मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती, पर्यावरण और जैव विविधता को नई जिंदगी देना है.

क्या है बी कॉरिडोर प्रोजेक्ट?

बी कॉरिडोर का सीधा मतलब है हाईवे के किनारों पर ऐसी हरित पट्टी बनाना, जहां फूलों वाले पेड़-पौधे सालभर मौजूद रहें. ये पौधे मधुमक्खियों, तितलियों और भंवरों के लिए भोजन और रहने की जगह तैयार करेंगे. NHAI का यह कदम पर्यावरण के साथ संतुलन बनाने की दिशा में एक नई सोच को दिखाता है.

कहां बनेगा यह ग्रीन कॉरिडोर?

पहले चरण में यह प्रोजेक्ट ओडिशा के तीन जिलों संबलपुर, बेरहामपुर और ढेंकनाल में शुरू किया जाएगा. इन इलाकों के नेशनल हाईवे के किनारे करीब 20 हजार पौधे लगाए जाएंगे. मानसून के मौसम को इसके लिए इसलिए चुना गया है, ताकि पौधों को प्राकृतिक पानी मिले और उनकी संख्या ज्यादा से ज्यादा बची रहे.

कौन-कौन से पेड़ लगाए जाएंगे?

इस प्रोजेक्ट के तहत ऐसे 7 देसी पेड़ों का चयन किया गया है, जो साल के अलग-अलग समय पर फूल देते हैं. इनमें नीम, करंज, अर्जुन, कदंब, जामुन, इमली और कंचन शामिल हैं. इनकी खासियत यह है कि पूरे साल किसी न किसी पेड़ पर फूल बने रहेंगे, जिससे मधुमक्खियों को लगातार भोजन मिलता रहेगा.

मधुमक्खियों के लिए ‘हर समय भोजन' की व्यवस्था

इन पौधों का चयन इस तरह किया गया है कि जनवरी से दिसंबर तक फूलों की उपलब्धता बनी रहे. इस वजह से यह कॉरिडोर मधुमक्खियों के लिए एक तरह का ‘24 घंटे खुला भोजन केंद्र' बन जाएगा. इससे उनका जीवन चक्र बेहतर होगा और उनकी संख्या बढ़ेगी.

क्यों जरूरी है यह पहल?

आज के समय में मधुमक्खियों की संख्या तेजी से घट रही है, जबकि खेती का बड़ा हिस्सा इन्हीं पर निर्भर है. करीब 75 प्रतिशत फसलें परागण के लिए मधुमक्खियों पर निर्भर करती हैं. ऐसे में यह प्रोजेक्ट जैव विविधता बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को संतुलित रखने में बड़ा योगदान देगा.

पर्यावरण और तापमान पर भी असर

20 हजार पेड़ हर साल बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड को सोखेंगे और ऑक्सीजन छोड़ेंगे. साथ ही सड़क के किनारे हरियाली बढ़ने से तापमान भी 3 से 4 डिग्री तक कम हो सकता है. इससे हीटवेव का असर कम होगा और सड़क भी ज्यादा सुरक्षित बनेगी.

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

इस प्रोजेक्ट का फायदा सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा. आस-पास के गांवों में रहने वाले किसानों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग दी जाएगी. इससे शहद उत्पादन बढ़ेगा और फसलों की पैदावार में भी 15-20 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है.

NHAI का बड़ा लक्ष्य

NHAI का मकसद 2030 तक देश के सभी नेशनल हाईवे को ग्रीन कॉरिडोर में बदलना है. ओडिशा का यह बी कॉरिडोर प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक पायलट प्रोजेक्ट माना जा रहा है. अगर यह सफल होता है तो देशभर में इस मॉडल को अपनाया जा सकता है.

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