विज्ञापन

ओडिशा में मिले 5 बेबी ओरंगुटान पांच हजार किमी दूर भारत कैसे पहुंचे; CCTV फुटेज और समुद्री रास्तों की भी जांच

ओडिशा के एक जंगल में मिले पांच बेबी ओरंगुटान ने जांच एजेंसियों को हैरान कर दिया है. भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाने वाले ये दुर्लभ जीव आखिर यहां तक कैसे पहुंचे? CCTV फुटेज, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और समुद्री मार्गों की जांच की जा रही है.

ओडिशा के जंगल में मिले 5 ओरंगुटान
NDTV
भुवनेश्वर:

ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल में मिले पांच बेबी ओरंगुटान का रहस्य लगातार गहराता जा रहा है. भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाने वाले इन दुर्लभ वन्यजीवों के अचानक जंगल में मिलने के बाद जांच एजेंसियां संभावित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही हैं. सीसीटीवी फुटेज, सड़क मार्ग, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों और समुद्री रास्तों तक जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. इस बीच बचाए गए सभी ओरंगुटान भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर में रखे गए हैं, जहां उनकी लगातार निगरानी की जा रही है. राज्य सरकार ने मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं.

CCTV फुटेज बनी जांच की अहम कड़ी

जांच एजेंसियों के अनुसार मामले में एक महिंद्रा थार एसयूवी विशेष जांच के केंद्र में है. जंगल में ओरंगुटान मिलने के बाद STF ने चंदनेश्वर और उदयपुर से दीघा जाने वाले मार्गों पर लगे कम से कम 46 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है. जांच का दायरा अब पश्चिम बंगाल तक बढ़ चुका है. इसके अलावा रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इन जानवरों की तस्करी किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए तो नहीं हुई. वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) भी जांच में सहयोग कर रहे हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

भारत में नहीं पाए जाते ओरंगुटान

ओरंगुटान भारत के मूल वन्यजीव नहीं हैं. इनका प्राकृतिक आवास मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में है. 8 सितंबर को बालासोर जिले के बिछित्रपुर-बड़ापाही वन क्षेत्र में कैसुरिना के पेड़ों के बीच पांच बेबी ओरंगुटान मिले थे. इनकी उम्र लगभग छह महीने से एक वर्ष के बीच बताई गई है. इस असामान्य बरामदगी ने जांच एजेंसियों को हैरान कर दिया है और अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये जानवर भारत तक कैसे पहुंचे?

ट्रांजिट ऑपरेशन में गड़बड़ी की आशंका

क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (RCCF) प्रकाश चंद गोगिनेनी ने पहले संभावना जताई थी कि किसी असफल ट्रांजिट ऑपरेशन के दौरान ये ओरंगुटान जंगल में छोड़ दिए गए हों. इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच एजेंसियां सड़क मार्गों के साथ-साथ समुद्री रास्तों की भी जांच कर रही हैं. बताया जा रहा है कि तटरक्षक बल (Coast Guard) भी यह पता लगाने में जुटा है कि कहीं इन जानवरों को जलमार्ग के जरिए भारत में तो नहीं लाया गया.

नंदनकानन चिड़ियाघर में विशेष देखभाल

बचाए गए सभी ओरंगुटान फिलहाल भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन चिड़ियाघर में रखे गए हैं. चिड़ियाघर के अधिकारियों के अनुसार उन्हें तनावमुक्त वातावरण में रखा गया है. उनके लिए मैश किए गए सेब का विशेष आहार दिया जा रहा है और उन्हें शांत रखने के लिए शास्त्रीय संगीत भी सुनाया जा रहा है. NDTV से बातचीत में नंदनकानन चिड़ियाघर के उपनिदेशक प्रदीप मिरासे ने बताया कि बचाए गए सभी ओरंगुटानों को तनावमुक्त वातावरण में रखा गया है और उन पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि एक बेबी ओरंगुटान की उम्र करीब एक वर्ष है, जबकि बाकी चार की उम्र लगभग छह महीने है. इनमें से एक ओरंगुटान को बुखार आ गया था, लेकिन गुरुवार तक वह पूरी तरह ठीक हो गया.

मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पांच दिवसीय दौरे पर गए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को मामले की जांच के आदेश दिए. उन्होंने कहा, 'ओडिशा को कभी भी विदेशी वन्यजीवों की अवैध तस्करी के ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा.' मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'यदि इस अवैध परिवहन में किसी नेटवर्क की संलिप्तता पाई जाती है तो उसकी पहचान की जाएगी और कानून के अनुसार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.' मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मोहन चरण माझी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच पूरी होने तक बचाए गए बेबी ओरंगुटान को निर्धारित वन्यजीव संरक्षण प्रोटोकॉल के तहत उचित चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जाए.

कई एजेंसियां जुटीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए STF, अपराध शाखा, वन विभाग, WCCB और राज्य स्तरीय जांच टीमों ने घटनास्थल का दौरा किया है. जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ओरंगुटान भारत में कब, किस रास्ते और किन लोगों के जरिए पहुंचे. अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी की आशंकाओं के बीच यह मामला देश की सबसे चर्चित वन्यजीव जांचों में शामिल हो गया है. फिलहाल पांचों ओरंगुटान सुरक्षित हैं, लेकिन उनके ओडिशा के जंगल तक पहुंचने का रहस्य अब भी अनसुलझा बना हुआ है.

यह भी पढ़ें : ओडिशा: जिस जंगल में 5 ओरंगुटान मिले, वहां से रात 11:25 बजे गुजरी थी काली Thar; CCTV में कैद हुई घटना

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Orangutan, Baby Orangutans In India, Baby Orangutans Odisha Forest, Odisha, Baby Orangutans Rescued
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com