- NSG कमांडो देश के महत्वपूर्ण आतंकवादी हमलों में ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो समेत कई ऐतिहासिक मिशनों में शामिल रहे हैं
- 26 नवंबर 2008 के मुंबई हमले में NSG ने आतंकियों का सफाया कर सैकड़ों बंधकों की जान बचाई थी
- गुजरात के अक्षरधाम मंदिर हमले में NSG ने ऑपरेशन वज्र शक्ति के तहत आतंकवादियों को खत्म किया था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात NSG कमांडो को आपने जरूर देखा होगा. हमेशा अलर्ट मोड में रहने वाले ये कमांडो सिर्फ पीएम की सुरक्षा ही नहीं देखते बल्कि देश में संकट के समय सबसे बड़ी ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं. इन 'ब्लैक कैट कमांडो' नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ने कई आतंकी हमलों को नाकाम किया है. देश के भीतर जब भी कोई संकट आता है तो दुश्मन पर सबसे तगड़ा वार करने में NSG कमांडो ही ना आता है. आज NSG का स्थापना दिवस है. पिछले 42 सालों में NSG के नाम कई शौर्य गाथाएं लिखी जा चुकी हैं. आज हम एनएसजी के उन 5 बड़े और ऐतिहासिक ऑपरेशन्स के बारे में बताएंगे, जिन्होंने न केवल देश को संकट से उबारा बल्कि दुनिया को भारत के कड़े प्रहार की ताकत दिखाई.
1. मुंबई अटैक के समय ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो
ये बात है 26 नंवबर 2008 की, जब मुंबई में पाकिस्तान से आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने हमला किया. ये वो काली रात थी, जब माया नगरी मुंबई की सड़कों पर गोलियों की तड़तड़ाहट का शोर गूंजने लगा. मुंबई का यह आतंकी हमला भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा हमला था. पाक के 10 आतंकियों ने मुंबई के ताज होटल, ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस को बंधक बना लिया था. पूरा देश सहमा हुआ था.
इस हमले के आतंकियों के खात्मे और आम लोगों को बचाने की जिम्मेदारी NSG को मिली. NSG कमांडो को दिल्ली से एयर लिफ्ट करके मुंबई पहुंचाया गया. NSG ने इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो' नाम दिया. कमांडो हेलीकॉप्टर से सीधे छतों पर उतरे. कमांडो ने तेजी से एक्शन शुरू किया और एक-एककर आतंकियों का खात्मा कर दिया. ताज होटल से कमांडो ने सैकड़ों बंधकों की जान बचाई और वहां मौजूद सभी आतंकियों को मार गिराया. इस ऑपरेशन में मेजर संदीप उन्नीकृष्णन शहीद हो गए.

2. अक्षरधाम अटैक के दौरान चलाया ऑपरेशन वज्र शक्ति
सितंबर 2002 में गुजरात के गांधीनगर में स्थित प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर को आतंकियों ने निशाना बनाया. आतंकी हथियार लेकर मंदिर परिसर में दाखिल हो गए और अंधाधुंध गोलीबारी करने लगे. आतंकियों ने कई श्रद्धालुओं को बंधक भी बनाया. पहले इस हमले से स्थानीय पुलिस बल को कमान दी गई. लेकिन स्थिति गंभीर होने के बाद दिल्ली से NSG कमांडो गांधीनगर पहुंचे और मोर्चा संभाल लिया.
इस ऑपरेशन को 'वज्र शक्ति' नाम दिया गया. NSG कमांडो ने बेहद चालाकी से मंदिर की बनावट का फायदा उठाया और सभी आतंकियों को मार गिराया. यह ऑपरेशन रातभर चला. इस ऑपरेशन में एनएसजी के जांबाज सूबेदार सुरेश चंद्र यादव शहीद हुए थे.

3. पठानकोट एयरबेस हमले के दौरान NSG का ऑपरेशन धंगू सुरक्षा
2 जनवरी 2016 को तड़के सुबह करीब 3 बजे पाकिस्तान से आए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला कर दिया. आतंकियों के पास भारी हथियार और गोला बारूद था. यह हमला ऐसे समय हुआ, जब ज्यादातर जवान सो रहे थे. इस हमले के दौरान भारतीय वायुसेना के संवेदनशील फाइटर जेट्स और अन्य संपत्ति खतरे में थी. आतंकियों का खात्मा करने के लिए NSG कमांडो को कमान सौंपी गई.
NSG ने भारतीय सेना के साथ मिलकर मोर्चा संभाला. इस मिशन को 'ऑपरेशन धंगू सुरक्षा' नाम दिया गया. कमांडो ने एयरबेस के भौगोलिक स्थिति को समझते हुए आतंकियों पर प्रहार किया. सभी आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया और भारतीय वायुसेना की संपत्ति को सुरक्षित बचाया गया.

4. अमृतसर IC-427 हाइजैक और NSG का ऑपरेशन अश्वमेध
ये बात है 24 अप्रैल 1993 की, जब दिल्ली से श्रीनगर जा रही इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट को एक आतंकी ने हाइजैक कर लिया. विमान में 141 लोग शामिल थे. हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी मोहम्मद यूसुफ शाह ने फर्जी पहचान के साथ विमान में पहुंचा था. उसने नकली प्लास्टर में छिपाकर पिस्तौल विमान में पहुंचाई. आतंकी ने विमान को अमृतसर के राजा सांसी एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर किया. विमान की लैंडिग के बाद यात्रियों को बचाने और आतंकी का खात्मा करने की जिम्मेदारी NSG को सौंपी गई.
NSG ने कमान संभालते ही जबरदस्त एक्शन शुरू कर दिया. कमांडो ने बिना समय गंवाए विमान में घुसने की बेहद सटीक योजना बनाई. महज 3-5 मिनटों में ही ऑपरेशन को पूरा किया गया. कमांडो ने आतंकी को ढेर कर दिया और सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान बचाई. इसे 'ऑपरेशन अश्वमेध' नाम दिया गया.

5. NSG का ऑपरेशन ब्लैक थंडर
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छिपे चरमपंथियों और उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए चलाए गए NSG ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर चलाया. इस ऑपरेशन को दो चरणों में चलाया गया था. ऑपरेशन ब्लैक थंडर-I 30 अप्रैल से 1 मई 1986 तक चला. इसमें करीब 300 NSG कमांडो ने BSF के जवानों के साथ एक्शन करना शुरू किया. करीब 122 से अधिक संदिग्धों को पकड़ा गया था और बिना किसी खून-खराबे के स्वर्ण मंदिर परिसर से चरमपंथियों को बाहर निकाला गया.
वहीं ऑपरेशन ब्लैक थंडर-II मई 1998 में चलाया गया. इस वक्त चरमपंथियों ने दोबारा स्वर्ण मंदिर में अपने ठिकाने बना लिए थे. इस ऑपरेशन का नेतृत्व पंजाब के डीजीपी के.पी.एस. गिल और अजीत डोभाल ने किया था. NSG के ब्लैक कैट कमांडो और स्नाइपर्स ने सूझबूझ से स्वर्ण मंदिर की पवित्रता को बिना नुकसान पहुंचाए 30 से अधिक चरमपंथियों को ढेर किया और कई को सरेंडर के लिए मजबूर किया.
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