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कैंसर का पता लगाने में पीछे हैं आयुष्मान भारत योजना के एचडब्लूसी, नीति आयोग की जांच में पता चला

आयुष्मान भारत योजना को करीब छह साल पहले लांच किया गया था. उसके बाद से 5.47 करोड़ से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं. लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए यह दुनिया की सबसे बड़ी चिकित्सा बीमा योजना बन गई है.

कैंसर का पता लगाने में पीछे हैं आयुष्मान भारत योजना के एचडब्लूसी, नीति आयोग की जांच में पता चला
आयुष्मान भारत योजना को करीब छह साल पहले लांच किया गया था.
नई दिल्ली:

देश में आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लोगों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है.प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) में अपग्रेड किया गया है. इसमें कई तरह की सेवाएं शामिल होंगी, जैसे 30 साल या उससे अधिक आयु के लोगों की कुछ तरह की बीमारियों की सालाना स्क्रीनिंग शामिल हैं. इसमें हाई ब्लड प्रेशर, डाइबटीज और मुंह का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सर्विकल कैंसर जैसी बीमारियां शामिल हैं.

आयुष्मान भारत योजना को करीब छह साल पहले लांच किया गया था. उसके बाद से 5.47 करोड़ से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं. लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए यह दुनिया की सबसे बड़ी चिकित्सा बीमा योजना बन गई है. लेकिन बात जब एचडब्ल्यूसी में कैंसर की जांच की बात आती है तो वहां एक बड़ा अंतर नजर आता है.केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.यह रिपोर्ट 13 राज्यों के 93 एचडब्ल्यूसी की जांच के बाद तैयार की गई है. 

किसने तैयार की है रिपोर्ट?

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक रिपोर्ट को पिछले साल जून में नीति आयोग के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने तैयार किया, हालांकि इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.इस रिपोर्ट से पता चला है कि इसके निष्कर्षों को स्वास्थ्य-परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ साझा किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक नीति आयोग की तीन सदस्यीय टीम ने योजना की प्रगति और कामकाज पर नजर रखने के लिए दिसंबर 2022 के मध्य से अप्रैल 2023 की शुरुआत तक 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 37 जिलों के 93 एचडब्ल्यूसी का दौरा किया. इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं. 

नीति आयोग ने इस साल मार्च में एचडब्ल्यूसी का नए सिरे से मूल्यांकन कराने का फैसला किया. इसके लिए उसने अनुरोध प्रस्ताव (Request for Proposal) जारी करते हुए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फर्मों से प्रस्ताव मांगें हैं.अखबार ने जब इस संबंध में अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. लेकिन उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी और क्षमता न होने की वजह से हुआ है. 

कैसे की जाती है कैंसर की जांच?

आधिकारिक प्रोटोकॉल के मुताबिक तीनों तरह के कैंसरों की जांच के तीन अलग-अलग तरीके से की जाती है.ओरल कैंसर की जांच ओरल विजुअल एग्जामिशेन से की जाती है.वहीं सर्विकल कैंसर या गर्भाशय के कैंसर की जांच एसिटिक एसिड के विजुअल इंस्पेक्शन से की जाती है.इसके तहत तीन से पांच फीसदी एसिटिक एसिड अप्लाई करने के बाद गर्भाशय ग्रीवा की जांच की जाती है. इसी तरह 30 से 65 साल तक की महिलाओं में स्तन कैंसर की जांच के लिए क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन (सीबीई) किया जाता है.

आयुष्मान योजना को अपग्रेड किए जाने के दौरान इन तीन तरह की स्क्रीनिंग के लिए डब्ल्यूसी में सहायक नर्स और मिडवाइफ (एएनएम) को प्रशिक्षित किया जाना था.डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों के प्रशिक्षण की भी योजना थी. एक अधिकारी ने कहा कि अच्छी स्क्रीनिंग करने का कौशल हासिल करने के लिए गहन प्रशिक्षण और सावधानीपूर्वक निगरानी की जरूरत होती है. लेकिन यह उस स्तर का नहीं हुआ, जिसकी उम्मीद थी. 

स्तन कैंसर की खुद ही जांच के लिए लाभार्थियों को शिक्षित किया जा रहा है.सर्विकल कैंसर की जांच का प्रावधान अभी तक लागू नहीं हुआ है. तंबाकू खाने-पीने की आदतों या नजर आ रहे किसी अन्य लक्षण के आधार पर, ओरल कैंसर की जांच अलग-अलग मामले में की जाती है.रिपोर्ट कहती है कि अभी कैंसर स्क्रीनिंग में बड़ा अंतर है. 

क्या चाहती है सरकार

नीति आयोग की टीम को इस दौरान यह भी पता चला कि एचडब्ल्यूसी स्टाफ को इस बात की भी ठीक से जानकारी नहीं थी कि हाइपरटेंशन और डायबीटिज का पता लगाने के लिए सालाना स्क्रीनिंग की जरूरत होती है. 

ये एचडब्ल्यूसी इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में बेहतर हालत में थे.रिपोर्ट के मुताबिक एचडब्ल्यूसी का इंफ्रास्ट्रक्चर मानक के मुताबिक था.एचडब्ल्यूसी  में स्टैथोस्कोप (आला), बीपी मापने की डिजिटल मशीन, वयस्कों और बच्चों का वजन लेने वाली मशीन और क्लिनिकल थर्मामीटर (ओरल और डिजिटल) भी चालू हालत में थे. टीम ने जितने केंद्रों का दौरा किया, उनमें दवाएं और टेस्ट मुफ्त में हो रहे थे. 

सरकार का फोसक शुरुआती चरण में ही कैंसर की रोकथाम और पता लगाने पर है. इसे देखते हुए कैंसर स्क्रीनिंग में यह गैप  महत्वपूर्ण है.लोकसभा चुनाव के लिए जारी अपने घोषणापत्र में बीजेपी ने महिलाओं के लिए स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करने के लिए एनीमिया,ब्रेस्ट कैंसर,सर्विकल कैंसर और ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम के लिए मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का वादा किया है. बीजेपी ने सर्विकल कैंसर के खात्म के लिए अभियान चलाने की भी घोषणा की है. 

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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