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This Article is From Jan 16, 2024

‘डंकी रूट’ से लोगों को यूरोप भेजने के नौ आरोपी गिरफ्तार, अंतरराष्‍ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश 

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पूर्व) अचिन गर्ग के अनुसार, गिरोह का पर्दाफाश होने की शुरुआत चार जनवरी को बांग्लादेशी नागरिकों मोहम्मद अनवर काजी (22) और मोहम्मद खलीलुर रहमान (22) की गिरफ्तारी के साथ शुरू हुई.

‘डंकी रूट’ से लोगों को यूरोप भेजने के नौ आरोपी गिरफ्तार, अंतरराष्‍ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश 
पुलिस ने आरोपियों के पास से कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए हैं.
  • दिल्ली पुलिस ने 4 बांग्लादेशी नागरिकों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है
  • अवैध दस्‍तावेजों के आधार पर लोगों को यूरोपीय देशों में भेजने का आरोप है
  • आरोपी डंकी रूट का इस्तेमाल करते थे और यात्रियों से 15 लाख तक वसूलते थे
नई दिल्‍ली :

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने सोमवार को दावा किया कि अवैध दस्तावेजों के आधार पर लोगों को यूरोपीय देशों में भेजने के आरोप में चार बांग्लादेशी नागरिकों समेत नौ लोगों की गिरफ्तारी के साथ एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है. एक अधिकारी ने कहा कि आरोपी काम के फर्जी परमिट हासिल करके कुख्यात “डंकी रूट” का इस्तेमाल कर रहे थे और प्रत्येक यात्री से 15 लाख रुपये तक वसूल रहे थे. ‘डंकी रूट' एक अवैध आप्रवासन तकनीक है जिसका उपयोग देशों में अनधिकृत प्रवेश के लिए किया जाता है.

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पूर्व) अचिन गर्ग के अनुसार, गिरोह का पर्दाफाश होने की शुरुआत चार जनवरी को बांग्लादेशी नागरिकों मोहम्मद अनवर काजी (22) और मोहम्मद खलीलुर रहमान (22) की गिरफ्तारी के साथ शुरू हुई.

गर्ग ने कहा, “काजी और रहमान की गिरफ्तारी के बाद अली अकबर, मोहम्मद इब्राहिम, मोहम्मद मुदस्सिर खान, नरेंद्र आर्य, धीरज बिश्नोई, गौरव गुलाटी और मोहम्मद यूनुस को गिरफ्तार किया गया.”

अधिकारी ने कहा कि अली अकबर और यूनुस खान भी बांग्लादेशी नागरिक हैं और वे दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे थे.

पुलिस ने कहा कि काजी और रहमान ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उन्होंने ग्रीक वर्क परमिट हासिल करने के लिए यूनुस खान, इब्राहिम और अकबर को जाली दस्तावेज उपलब्ध कराए थे.

कई पासपोर्ट और पीड़ितों की सूची बरामद 

अधिकारी ने कहा, “यूनुस खान, इब्राहिम और अकबर को दक्षिणपूर्वी दिल्ली के सरिता विहार से गिरफ्तार किया गया और उनके पास से 12 पासपोर्ट, 10 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, तीन पेन ड्राइव, एक इंकजेट प्रिंटर, 150 व्यक्तियों के बांग्लादेश के 150 नोटरी दस्तावेज, 50 बांग्लादेश पुलिस क्लीयरेंस प्रमाणपत्र और डायरी तथा पीड़ितों की सूची जैसे कई अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए.”

यूरोपीय देशों में नौकरी का देते थे झांसा 

तीनों ने पुलिस को बताया कि वे ढाका में अपने आकाओं के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट चला रहे हैं. ढाका स्थित गिरोह के संचालक बांग्लादेश और भारत में मानवशक्ति परामर्श संस्था संचालित करते हैं जो भारत के माध्यम से ‘डंकी रूट' का उपयोग करके बांग्लादेश से लोगों को यूरोपीय देशों में भेजने में मदद करते हैं. उनके संचालक बांग्लादेश के पीड़ितों को यूरोपीय देशों में नौकरी दिलाने का वादा करके लुभाते थे.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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