विज्ञापन

हाफिज सईद के हर गुनाह का होगा हिसाब! भारत नहीं आया, तब भी अदालत में कैसे चलेगा मुकदमा? Explained

पाकिस्तान में बैठे आतंकी हाफिज सईद के खिलाफ भारत में ट्रायल शुरू हो सकता है. पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था. NIA ने उसके खिलाफ गैर-मौजूदगी में ही ट्रायल शुरू करने की अपील की है.

हाफिज सईद के हर गुनाह का होगा हिसाब! भारत नहीं आया, तब भी अदालत में कैसे चलेगा मुकदमा? Explained
हाफिज सईद की गैर-मौजूदगी में भी अब ट्रायल शुरू हो सकता है.
नई दिल्ली:

पहलगाम आतंकी हमले के 14 महीने बाद जम्मू की कोर्ट ने आतंकी हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है. वही हाफिज सईद जो लश्कर-ए-तैयबा का सरगना है. वही हाफिज सईद जो पहलगाम से लेकर भारत में कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है. 

अब गैर-जमानती वारंट इसलिए जारी किया गया है, क्योंकि हाल ही में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें हाफिज सईद को पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है. 

जांच से जुड़े सूत्रों ने NDTV को बताया कि हाफिज सईद के खिलाफ उसकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाया जा सकता है. हाफिज सईद अभी पाकिस्तान की सेना की सुरक्षा में अपनी सारी गतिविधियां चलाता है.

इस मामले में NIA ने पहली चार्जशीट दिसंबर 2025 में दाखिल की थी, जिसमें उन तीन आतंकवादियों- सुलेमान, जिब्रान और हमजा अफगान के नाम थे, जिन्होंने पहलगाम में 26 मासूमों की हत्या कर दी थी. तीनों आतंकियों को पिछले साल 'ऑपरेशन महादेव' में ढेर कर दिया गया था.

हाफिज पर चलेगा मुकदमा?

NIA ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि हाफिज सईद भारत के खिलाफ कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है. 

NIA का कहना है कि पहलगाम हमले की साजिश भी पाकिस्तान में बैठकर रची गई थी और इसमें हाफिज सईद ने अहम भूमिका निभाई थी.

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि उसे पाकिस्तान से भारत लाने की लगभग सभी कानूनी कोशिशें पूरी की जा चुकी हैं. इसलिए, न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कानून के तहत उस पर मुकदमा चलाना जरूरी है.

NIA ने जम्मू कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि हाफिज सईद पाकिस्तान में है और उसे भारत लाना मुमकिन नहीं है. ऐसे में कानून के तहत उसकी गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू किया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ेंः 100 में से 68 आरोपी हो जाते हैं बरी.... POCSO के मामलों में इतनी कम सजा क्यों होती है? Explainer

Latest and Breaking News on NDTV

कैसे चलेगा मुकदमा?

हाफिज सईद पर मुकदमा चलाना इसलिए मुमकिन हो पाया, क्योंकि कानून बदल गया है. जुलाई 2024 से पहले तक ट्रायल तब शुरू हो पाता था, जब आरोपी अदालत में मौजूद हो. 

लेकिन जुलाई 2024 में केंद्र सरकार ने क्रिमिनल जस्टिस से जुड़े तीन नए कानून लागू किए थे. इसके बाद इंडियन पीनल कोड (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (CrPC) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य संहिता ने ले ली थी.

आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी मुकदमा चलाने के लिए BNSS में एक नई धारा 356 जोड़ी गई थी. इसी में 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' का प्रावधान है. ये ऐसे अपराधियों के लिए जोड़ा गया था, जो फरार हैं. अगर किसी अपराधी को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है, तो अब उसके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जा सकता है.

NIA ने इसी धारा के तहत हाफिज सईद के खिलाफ मुकदमा शुरू करने की अपील की है. कोर्ट ने इसे मान लिया है और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है.

यह भी पढ़ेंः चाकू से 51 वार, नाले में लाश... दिल्ली दंगों में मारे गए IB अफसर अंकित शर्मा के साथ उस दिन क्या हुआ था?

Latest and Breaking News on NDTV

लेकिन अचानक शुरू नहीं होगा ट्रायल

BNSS की धारा 356 आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी ट्रायल शुरू करने की इजाजत देती है. लेकिन इसमें भी कुछ शर्तें हैं, जिनके पूरा होने पर ही आरोपी की गैर-मौजूदगी में मुकदमा शुरू किया जा सकता है.

आरोपी की गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू होने में कम से कम 90 दिन का वक्त लगता है. धारा 356 के तहत, ऐसे मामलों में मुकदमा शुरू करने से पहले 30 दिन में आरोपी के खिलाफ लगातार दो बार अरेस्ट वारंट जारी किया जाएगा. 

इसके अलावा, ऐसे आरोपी को लेकर नेशनल या लोकल अखबार में एक नोटिस दिया जाएगा, जिसमें बताया जाएगा कि अगर आरोपी 30 दिन के भीतर पेश नहीं होता है तो उसकी गैर-मौजदूगी में ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा.

ट्रायल शुरू करने से पहले उसके किसी रिश्तेदार या दोस्त को इसकी जानकारी दी जाएगी. इसके साथ ही उसके घर पर एक नोटिस भी चस्पा किया जाएगा या आरोपी जहां रहता है वहां के पुलिस थाने में नोटिस लगाया जाएगा. आरोपी को हाजिर होने के लिए 30 दिन का टाइम दिया जाएगा. इतना ही नहीं, अगर आरोपी का कोई वकील नहीं होता तो सरकार की ओर से वकील मिलता है.

यह भी पढ़ेंः तलाक दिए बगैर शादी करने पर दूसरे पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है महिला? हाई कोर्ट ने समझाया

Latest and Breaking News on NDTV

अगर बाद में आरोपी पकड़ा गया तो?

कुल मिलाकर, अदालत किसी भगोड़े अपराधी की गैर-मौजूदगी में ट्रायल शुरू करने के लिए 90 दिन इंतजार करती है. फिर ट्रायल शुरू कर देती है.

ट्रायल शुरू होने के बाद आरोपी अगर पकड़ा जाता है या खुद सरेंडर करता है तो उसे मौका दिया जाएगा. अगर फिर आरोपी भाग जाता है तो भी ट्रायल रुकेगा नहीं. 

धारा 356(7) के तहत, कोर्ट के फैसले के खिलाफ तब तक कोई अपील नहीं की जा सकती, जब तक अपराधी खुद पेश न हो जाए. इतना ही नहीं, कोर्ट के फैसले के खिलाफ तीन साल के भीतर ही अपील की जा सकती है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
NIA, Hafiz Saeed, Pahalgam Terroist Attack, Pahalgam Attack, Terrorist Attack
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com