भारत और चीन के बीच पूर्वी सेक्टर में वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की पहली फ्लैग मीटिंग 6 और 7 सितंबर को आयोजित की गई. यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के वाचा और चीनी क्षेत्र के दमाई में हुई. यह नई व्यवस्था अगस्त 2025 और अगस्त 2026 में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति तथा WMCC बैठकों में हुई चर्चाओं के बाद लागू की गई.
इस तंत्र का उद्देश्य पूर्वी सेक्टर में सीमा प्रबंधन, संचार और समन्वय को बेहतर बनाना है ताकि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच नियमित संवाद बना रहे. विदेश मंत्रालय के अनुसार पश्चिमी सेक्टर में पहले से इसी तरह का फ्लैग मीटिंग तंत्र मौजूद है. अब पूर्वी सेक्टर में भी इसे लागू किया गया है.
वैसे भारत और चीन की यह बातचीत इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश को लेकर समय-समय पर ड्रैगन ऐसे दावे करता है जिस वजह से दोनों ही देशों के बीच तनाव बढ़ जाता है. पिछले महीने ही चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम अपने नक्शे में दिखा दिए थे. चीन की उस हरकत पर भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई थी और मुंहतोड़ जवाब भी दिया था.
विदेश मंत्रालय ने एक जारी बयान में कहा था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न अंग है और यह एक निर्विवाद तथ्य है. इस सच्चाई को कोई नहीं बदल सकता.
चीन साल 2017 से ही भारत के अरुणाचल प्रदेश को अपने नक्शे में दिखाता है. भारत ने हमेशा इसपर आपत्ति जताई है और चीन को उसकी सही जगह दिखाई है. हाल ही में भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से सर्वे ऑफ इंडिया मैप में अरुणाचल प्रदेश की झील, बस्तियों और स्मारक समेत 27 स्थलों के नाम बदले हैं.
इसपर चीन ने बौखला गया और चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में लिखा गया कि भारत के नक्शे में इन इलाकों को शामिल करने से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है.
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