नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. इस आपदा में अब 389 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 800 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं. वहीं नेपाल-तिब्बत सीमा के पास फंसे 31 तीर्थयात्रियों में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) के पूर्व प्रमुख सतीश रेड्डी और उनकी पत्नी भी शामिल हैं. वे भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर थे. अचानक आई बाढ़ के समय उनका दल तिब्बत के सागा काउंटी क्षेत्र में पहुंच चुका था. उनके साथ फंसे सभी 31 तीर्थयात्रियों ने अपने परिवारों को संदेश देकर सुरक्षित होने की जानकारी दी है.
300 भारतीय नागरिकों के लापता होने की आशंका
काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि करीब 300 भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर है. इनमें अधिकांश लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं. उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र से होकर बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक गुजरते हैं और सरकार लगातार उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है.
चीन के रास्ते भारत लौटने की तैयारी
फिलहाल ये यात्री तिब्बत-चीन मार्ग से भारत लौटने की योजना बना रहे हैं. हालांकि उनकी वापसी सीमा खुलने पर निर्भर करेगी. विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है जबकि 288 भारतीयों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं.
ग्लेशियर टूटने से आई तबाही
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ग्लेशियर टूटने के कारण भोटे कोशी नदी की सहायक ल्हेन्डे नदी का प्रवाह बाधित हो गया था. इसके बाद जमा पानी अचानक टूटकर नीचे आया और विनाशकारी बाढ़ में बदल गया.
आपदा के बाद भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया है. दो अलग-अलग खेपों में लगभग 50 टन मानवीय सहायता और राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है. पहली उड़ान में 10 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई, जबकि दूसरी खेप में 37.5 टन HADR सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए हैं.
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