- नेपाल की बाढ़ में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 लोगों का दल सुरक्षित भारत वापस लाया गया है
- दल की महिलाएं बाढ़ के दौरान भगवान शिव की आकृति देखकर अपनी जान बचने का चमत्कार मानती हैं
- यात्रियों ने इमरजेंसी खिड़की से बाहर निकलकर पहाड़ी पर चढ़कर नेपाली सेना के रेस्क्यू कैंप में शरण ली थी
नेपाल की बाढ़ में भारत के भी सैकड़ों लोग लापता हैं. सबसे ज्यादा शिकार वो लोग हुए जो कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर निकले थे. इनमें से कुछ का रेस्क्यू भी कर लिया गया है. तमिलनाडु के ऐसे ही 21 लोगों के दल को सुरक्षित वापस भारत लाया गया है. इस दल में शामिल तीन महिलाओं ने काठमांडू एयरपोर्ट पर बाढ़ के दौरान का किस्सा बताया. उनका कहना है कि जब बाढ़ आई तो उन्हें लगा कि अब बच नहीं पाएंगे लेकिन तभी कुछ सेकंड के लिए उन्हें ऐसा लगा जैसे साक्षात भगवान शिव उन्हें दर्शन दे रहे हैं. महिलाओं का कहना था कि भगवान शिव की वजह से ही उनकी और उनके साथियों की जान बची है. महिलाओं ने अपनी बात के समर्थन में एक तस्वीर भी शेयर की.
काठमांडू एयरपोर्ट पर दर्द की कई दास्तान
काठमांडू एयरपोर्ट पर NDTV से बातचीत में तमिलनाडु की महिलाओं ने बताया 'हमारा दल 60 लोगों का था, जिनमें 21 लोग तीन बसों में सवार होकर मानसरोवर दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे. एक बस आगे थी, हम बीच वाली बस में थे और एक बस हमारे पीछे थी, अचानक नदी की तरफ से हमें बहुत तेज धुआं और गुबार उठता दिखाई दिया. शुरुआत में हमें लगा कि शायद कोई बम धमाका हुआ है या पटाखे फूटे हैं, जिसकी वजह से यह स्थिति है, लेकिन फिर अचानक से बड़ी मात्रा में पानी के साथ रेत, कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थर नीचे आने लगे. बहकर आए मलबे और पत्थरों की टक्कर से हमारी बसों के शीशे टूट गए. सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि समझ ही नहीं आ रहा था क्या करें.'
महिला को लगा जैसे भगवान शिव उन्हें बचाने आ गए
महिला यात्रियों ने एक फोटो भी शेयर की. उनका दावा है कि इस फोटो में दिख रही आकृति भगवान शिव की है. जब पानी तेजी से उनकी तरफ बढ़ा था तभी यह तस्वीर ली गई थी. उनका कहना है कि यह एक तरह का चमत्कार था, जिससे सभी की जान भगवान ने ही बचाई है. क्योंकि बाढ़ बेहद तेजी से उनकी तरफ आई थी. महिलाओं ने बताया कि बाढ़ का मलबा बस से टकरा गया था. जिससे बस क्षतिग्रस्त हो गई थी. बस के यात्रियों ने इमरजेंसी खिड़की से बाहर निकलकर जान बचाई थी. बाढ़ से बचने के लिए सभी पहाड़ पर चढ़ गए. जहां नेपाली सेना ने रेस्क्यू कैंप बनाया था. इसी कैंप में सभी यात्री ठहरे. वहां उनके लिए रहने के साथ-साथ भोजन की व्यवस्था भी की गई थी. वहीं अगले दिन नेपाली सेना ने उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू कर सुरक्षित एयरलिफ्ट किया और काठमांडू एयरपोर्ट लाई. यहां से वह वापस फ्लाइट से वापस भारत लौट आए हैं.
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