- 22 लाख से अधिक छात्रों द्वारा दी गई मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को पेपर लीक के कारण रद्द कर दिया गया
- शिकायतकर्ता टीचर केशव अग्रवाल ने कहा कि परीक्षा रद्द होने से छात्रों का सिस्टम पर विश्वास पूरी तरह टूट चुका है
- केशव ने सरकार से सवाल किया कि दो साल में कोई सुधार नहीं किया गया और फिर परीक्षा रद्द करनी पड़ी
3 मई को 22 लाख से ज्यादा छात्रों द्वारा दी गई मेडिकल प्रवेश नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है. पेपर लीक के सभी आरोपियों की धर पकड़ की कोशिश तेज हो गई है. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. इस मामले पर शिकायतकर्ता टीचर केशव अग्रवाल का ने कहा है कि परीक्षा रद्द होने पर छात्रों के ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. अगर बच्चे ने इतनी बड़ी बात कह दी तो इतने बड़े सिस्टम को उसे समझना चाहिए कि सिस्टम और एग्जाम पर बच्चे का ट्रस्ट खत्म हो चुका है.
पॉलिटिक्स न करें और बच्चों के बारे में सोचें
टीचर केशव अग्रवाल ने कहा कि वो तो चीजें सामने आ गईं. अगर सामने नहीं आतीं तो सोचिए कौन डॉक्टर बन रहा होता. वे लोग डॉक्टर बन रहे होते जिन्होंने पढ़ाई नहीं बल्कि चोरी की. वह कैसे डॉक्टर बनते. इस प्रॉफेशन में कितना बड़ा काम है और दाखिले में कितना उल्टा काम हो रहा है. आप उन बच्चों के बारे में सोचिए कि वे कितनी जिंदगियों से खेलते हैं जब ऐसे बच्चे डॉक्टर बनकर अंदर जाते हैं. हमने यही बात 2024 में भी उठाई थी कि इस पर पॉलिटिक्स न करें और बच्चों के बारे में सोचें. उनका इस सिस्टम में विश्वास खत्म हो गया है. उनको कभी ये विश्वास नहीं होगा कि ये पेपर सही होगा.
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दो साल में आपने कोई सीख नहीं ली
उन्होंने कहा कि अभी भी बच्चे ये कह रहे हैं कि वापस ये एग्जाम फिर से कैंसिल नहीं होगा और ठीक तरह से होगा, इस बात की क्या संभावना है. टीचर केशव अग्रवाल ने सरकार से सवाल किया कि दो साल में आपने कोई सीख नहीं ली. तब आप री-नीट बचा गए लेकिन आज आपको मजबूरन परीक्षा को रद्द करना पड़ा. क्यों कि अब वॉट्सऐप, फॉरवर्ड समेत सभी प्रूफ मिल गए. पहले प्रूफ नहीं था इसीलिए री-नीट नहीं हुआ. लेकिन यहां तो सारे प्रूफ मिल गए कि ये खुलेआम चला. बड़ी हैरानी की बात है कि हमारी जांच एजेंसी और एनटीए को इसका पता क्यों नहीं चला.
सीटें और कॉलेज क्यों नहीं बढ़ाते
केशव अग्रवाल ने कहा कि इतना बड़ा एग्जाम हो रहा है,जब ये पहले से पता हो कि ये सब होता है तो इसके लिए सारे प्रिकॉशन लिए जाते हैं. उन्होंने जब चीफ जस्टिस रहते चंद्रचूड़ की एक टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा जो उन्होंने एक पेरेंट के सीबीआई को 75 लाख रुपये का चेक देने को लेकर की थी. उन्होंने कहा था कि 1 घंटे पहले पेपर लेने के लिए कोई 75 लाख का चेक नहीं देगा. आप सोचिए कि अगर एक पेरेंट एक एग्जाम में अगर 75 लाख लगा रहा है तो इस एग्जाम में कितना बड़ा स्टेक है. क्यों नहीं हम सीटें बढ़ाते हैं और क्यों नहीं हम कॉलेज बढ़ाते हैं. डिमांड-सप्लाई कम हो. उन्होंने कहा कि ये सारा खेल इसलिए है क्यों कि 60 हजार सीटें हैं और 24 लाख बच्चे एग्जाम दे रहे हैं.
देश का भविष्य अंदर से खत्म होता जाएगा
केशव अग्रवाल ने कहा सलेक्शन न होने का स्ट्रेस, जिस वजह से बच्चे सुसाइड भी कर लेते हैं. हमें उन चीजों को देखने की जरूरत है तभी चोरी रुकेगी नहीं तो पेपर लीक होते जाएंगे, हम बातें करते रह जाएंगे जो दो साल से कर रहे हैं. देश का भविष्य अंदर से खत्म होता जाएगा. बच्चे की समझिए उसकी कौन सुन रहा है. आपने आदेश दे दिया उन्होंने फॉलो कर लिया. लेकिन बच्चे का क्या, सोचिए उसका मेंल स्टेट आज क्या है. वह टूट चुका है. उसके लिए वापस से परीक्षा देना बहुत मुश्किल काम है. हमारे सिस्टम ने उसका विश्वास खत्म कर दिया है.
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