- सीमा सोनी नामक महिला लगभग चार से पांच महीने से छत पर निढाल हालत में पड़ी हुई मिली
- महिला की हालत इतनी खराब थी कि वह हड्डियों का ढांचा लग रही थी और केवल "खाना" शब्द बोल पाई
- महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम को सूचना मिलने पर तुरंत उसे सहायता और अस्पताल में भर्ती कराया गया
40 डिग्री की तपती धूप, एक सुनसान छत और उस पर एक महिला नग्न, निढाल, लगभग कंकाल में बदल चुकी. जब अधिकारी उसके पास पहुंचे और उसे पुकारा, तो उसने मदद नहीं मांगी, वो रोई नहीं, बस होंठ हिले और बहुत धीमी आवाज में एक शब्द निकला - "खाना…". यह एक शब्द अब पूरे समाज पर सवाल बनकर खड़ा है.
ये महिला हैं सीमा सोनी (40), जो उस छत पर पिछले चार से पांच महीनों से ऐसे ही पड़ी थीं, बिना कपड़ों के, बिना सम्मान के, और शायद बिना पर्याप्त भोजन के. जब महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम वहां पहुंची, तो जो दृश्य सामने था, उसने सभी को भीतर तक झकझोर दिया.
सीमा का शरीर इतना कमजोर हो चुका था कि वह हड्डियों का ढांचा मात्र लग रही थीं. एक गंदी चादर से ढकी, खुले आसमान के नीचे, तपती धूप में… जैसे किसी ने उन्हें जीते-जी छोड़ दिया हो.

जब टीम ने सीमा को देखा और आवाज़ लगाई, तो उनकी प्रतिक्रिया सिर्फ एक शब्द थी "खाना…" यह आवाज इतनी कमजोर थी, जैसे शरीर ने उम्मीद छोड़ दी हो, लेकिन भूख अभी भी ज़िंदा हो. उन्हें तुरंत खाना और पानी दिया गया और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है.
नीमच में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी दीपिका नामदेव ने कहा, "हमें वीडियो और फोन के जरिए सूचना मिली थी कि एक महिला 40 डिग्री तापमान में छत पर बग़ैर कपड़ों के पड़ी है, सिर्फ एक चादर ढका है. मौके पर जाकर देखा तो स्थिति वैसी ही मिली. महिला बात कर पा रही है, लेकिन वह कई सालों से अवसाद से पीड़ित लग रही है. फिलहाल हमारी प्राथमिकता उनकी जान बचाना और उचित इलाज देना है."
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पड़ोसियों का कहना है कि सीमा पहले बिल्कुल सामान्य और मिलनसार थीं, लेकिन पिछले कुछ सालों से वह अचानक दिखना बंद हो गईं. लोगों ने समझा कि शायद वह कहीं चली गई हैं. किसी ने नहीं सोचा कि वह यहीं, उसी घर की छत पर, इस हालत में पड़ी होंगी.

अब प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर रहा है कि कैसे एक बीमार महिला को महीनों तक इस अमानवीय हालत में रखा गया? जिम्मेदार कौन है? लेकिन इन सवालों से भी बड़ा सवाल है, एक भरे-पूरे मोहल्ले में, एक जिंदा इंसान, धीरे-धीरे टूटती रही और जब उसने आवाज उठाई, तो बस इतना कहा, "खाना…".
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