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श्रीलंका आर्थिक संकट से कैसे निकला? NDTV WORLD SUMMIT में बोले मंत्री- हमने भारत के 30 साल के अनुभव से सीखा

NDTV World Summit: भारत-श्रीलंका आर्थिक सहयोग पर बात करते हुए अबेसिंघे ने कहा कि श्रीलंका की कई कंपनियां भारतीय बाजार में आने की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग की संभावनाएं बताईं.

मैं भारत के लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं: श्रीलंका के मंत्री चतुरंगा अबेसिंघे
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NDTV World Summit 2026 में श्रीलंका के उद्योग और उद्यमिता विकास उपमंत्री चतुरंगा अबेसिंघे ने भारत का आभार जताते हुए कहा कि 2022 के भीषण आर्थिक संकट से उबरने में भारत ने श्रीलंका का हर कदम पर साथ दिया. उन्होंने कहा कि अब श्रीलंका संकट से निकल चुका है और देश विकास की ओर बढ़ रहा है. साथ ही उन्होंने भारतीय कंपनियों और निवेशकों को श्रीलंका में निवेश और साझेदारी के लिए खुला निमंत्रण दिया. इस समिट में चतुरंगा अबेसिंघे ने कहा कि 2022 के आर्थिक संकट के बाद भारत ने हमें बड़ी वित्तीय सहायता दी और मुश्किल समय में हमारे साथ खड़ा रहा. मैं भारत के लोगों का दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं. इस संकट से निकलने के लिए हमे भारत के 30 साल के अनुभव से काफी कुछ सीखने को मिला है. 

उन्होंने बताया कि श्रीलंका आर्थिक संकट से कैसे निकला. चतुरंगा अबेसिंघे ने कहा कि हमने भारत के 30 साल के अनुभव से सीखा है. संकट के बाद श्रीलंका ने अर्थव्यवस्था में कई बड़े और संरचनात्मक बदलाव किए हैं और इसका असर अब दिखाई देने लगा है. उन्होंने बताया कि देश ने वित्तीय मोर्चे पर मजबूती हासिल की है, सरकारी वित्त को बेहतर बनाया गया है और Debt Restructuring का बड़ा काम पूरा हो चुका है. इसके अलावा व्यापार से जुड़े जरूरी सुधार भी लागू किए जा रहे हैं. अबेसिंघे के मुताबिक अगले तीन से पांच वर्षों में ये बदलाव श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे.

भारत की इकोनॉमी के कायल 

भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वह "सही शहर, सही देश, सही सम्मेलन और सही अर्थव्यवस्था" यानी भारत में बैठे हैं. उनका इशारा भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और क्षेत्रीय प्रभाव की ओर था, जिसे श्रीलंका अपने विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है.

श्रीलंका के उपमंत्री ने कहा कि उनका देश अब केवल आर्थिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि तेज विकास के दौर में प्रवेश कर रहा है. उन्होंने कहा, "हम स्थिरता से विकास की ओर बढ़ रहे हैं. 2019 के बाद लगभग 6 सालों तक कई बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट रुके हुए थे, लेकिन अब उन्हें दोबारा शुरू कर दिया गया है और उन पर तेजी से काम चल रहा है."

उन्होंने यह भी कहा कि निवेश और सुशासन से जुड़े कानूनी सुधार किए जा रहे हैं ताकि निवेशकों को भरोसेमंद और स्थिर कारोबारी माहौल मिल सके. उनके अनुसार यही सुधार श्रीलंका की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की नींव बनेंगे.

भारत श्रीलंका में किन सेक्टर में निवेश कर सकता है?

भारत-श्रीलंका आर्थिक सहयोग पर बात करते हुए अबेसिंघे ने कहा कि श्रीलंका की कई कंपनियां भारतीय बाजार में आने की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग की संभावनाएं बताईं. उनका कहना था कि भारत की तकनीकी क्षमता और श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति मिलकर क्षेत्रीय व्यापार को नई दिशा दे सकती है.

उन्होंने कहा, "हम खुद को व्यापार के एक बड़े हब के रूप में स्थापित कर रहे हैं. भारतीय कंपनियां श्रीलंका का इस्तेमाल लॉजिस्टिक्स, वैल्यू एडिशन और क्षेत्रीय व्यापार के केंद्र के रूप में कर सकती हैं."

जब उनसे पूछा गया कि वह विदेशी निवेशकों को श्रीलंका में निवेश के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे, तो उन्होंने कहा कि श्रीलंका खुद को केवल व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि इवेंट्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), लॉजिस्टिक्स और विभिन्न वैश्विक गतिविधियों के लिए एक क्षेत्रीय हब के रूप में विकसित करना चाहता है.

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